इस दौर के फरियादी जायें तो कहां जायें
कानून तुम्हारा है दरबार तुम्हारा है।
सूरज की तपन तुमसे बर्दाश्त नहीं होती
इक मोम के पुतले सा किरदार तुम्हारा है।
~ अर्जुन सिंह चांद
“अगर तलाश करूँ कोई मिल ही जाएगा,
मगर तुम्हारी तरह कौन मुझ को चाहेगा…
तुम्हें ज़रूर कोई चाहतों से देखेगा,
मगर वो आँखें हमारी कहाँ से लाएगा।”
— बशीर बद्र
विनम्र श्रद्धांजलि
#BashirBadr
होने थे जितने खेल मुक़द्दर के हो गए
हम टूटी नाव ले के समंदर के हो गए
ख़ुशबू हमारे हाथ को छूकर गुज़र गई
हम फूल सबको बांट के पत्थर के हो गए
- इरफ़ान जाफ़री