आचार्य चाणक्य के अस्तित्व के दो प्रमाण—
[1] आचार्य का अस्तित्व था, इसका सबसे बड़ा प्रमाण महावंश है। महावंश एक प्राचीन बौद्ध-पोथी है, जो प्राचीन घटनाओं का कालक्रम सुनिश्चित करने के लिए बहुतायत में प्रयोग की जाती है। आप इसे सरल शब्दों में टाइमलाइन-डॉक्यूमेंट कह सकते हैं। इसमें आचार्य चाणक्य और चंद्रगुप्त का स्पष्ट उल्लेख है, नाम व परिचय सहित।
इसी महावंश से यह भी निश्चित हुआ है कि तथागत बुद्ध का जन्म सन् 563 ईसा पूर्व में हुआ था। महावंश ने ही बुद्ध के समकालीन रहे बिंबिसार और अजातशत्रु जैसे राजाओं के कालखंड को सुनिश्चित किया है. इसी ने मगध के आगामी वंशों शैशुनाग, नंद व मौर्यों के कालखंड को सुनिश्चित किया है। महावंश ही बतलाता है कि पहली बौद्ध संगीति सन् 483 ई.पू. में अजातशत्रु के प्रश्रय में आयोजित की गई थी, दूसरी सन् 383 ई.पू. में कालाशोक के प्रश्रय में और तीसरी सन् 251 ई.पू. में सम्राट अशोक के प्रश्रय में आयोजित की गई थी।
अब यदि आप चाणक्य को नहीं मानते, तो कह दीजिये कि महावंश के उक्त सभी तथ्य मिथ्या हैं। हम भी मान लेंगे कि आचार्य चाणक्य नहीं हुए थे। यह कहने की शक्ति है, तो अवश्य कहिए कि आचार्य चाणक्य हुए ही नहीं थे। अन्यथा व्यर्थ बृहन्नला विलाप मत कीजिए।
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[2] सम्राट अशोक के अस्तित्व को तो आप अवश्य मानते होंगे। मानते ही हैं, इसमें प्रश्न कैसा? वे बिंदुसार के पुत्र और चंद्रगुप्त मौर्य के पौत्र थे, यह भी अवश्य मानते होंगे। नहीं मानते?
अच्छा, तो अब एक कार्य कीजिए। चंद्रगुप्त का अस्तित्व सिद्ध कीजिए, किसी ऐसे स्रोत से जिसमें चाणक्य का वर्णन न हो। समस्त पालि-ग्रंथ-साहित्य को छान लीजिए और खोजिए कोई ऐसा ग्रंथ, जो चंद्रगुप्त को अभिहित करता हो और चाणक्य का विवरण न देता हो। नहीं खोज पायेंगे आप, चूँकि ऐसा कोई दस्तावेज है ही नहीं।
यदि चाणक्य मिथ्या हैं, तो फिर चंद्रगुप्त और बिंदुसार भी मिथ्या हैं। मान लीजिए ऐसा, हम चाणक्य के मिथ पर आपसे सहमत हो जाएँगे।
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अव्वल इन दो प्रमाणों की काट खोजिए, फिर आगे बात होगी।
इति।🙏🏼🍀🍁