सौरभ: क्या सिर्फ़ एक इस्तीफ़े से व्यवस्था बदल जाएगी?
सोनम 🎯: बदलाव की शुरुआत जवाबदेही से होती है। जब जवाबदेही नहीं होती, तब मनमानी हर जगह हावी हो जाती है।
सौरभ: यह मुद्दा सिर्फ़ परीक्षाओं से बड़ा क्यों है?
सोनम ⚠️: क्योंकि आज जो लोग नकल करके आगे बढ़ेंगे, वही कल आपके बच्चों का इलाज करने वाले डॉक्टर और आपके घर बनाने वाले इंजीनियर बन सकते हैं।
सौरभ: क्या सरकार ने आपसे कोई संपर्क किया है?
सोनम 🔥: अभी तक नहीं। अगर हमारी आवाज़ सरकार तक नहीं पहुँची है, तो यह लोगों की भी ज़िम्मेदारी है कि वे इसे ज़्यादा से ज़्यादा फैलाएँ।
"We don't want Phunsukh Wangdu to die."
ऐसे समय में जब ज़्यादातर बड़े फ़िल्मी सितारे और नामचीन सेलिब्रिटी चुप हैं, 3 Idiots में चतुर का किरदार निभाने वाले ओमी वैद्या की यह अपील और भी ज़्यादा मायने रखती है।
जब देश का एक सम्मानित नवप्रवर्तक 17 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठा हो, तब चुप्पी भी एक संदेश देती है। लगता है कि सत्ता के सामने सच बोलने का साहस धीरे-धीरे कम होता जा रहा है।
ऐसे दौर में वही लोग याद रखे जाते हैं जो डर या सुविधा नहीं, बल्कि इंसानियत के साथ खड़े होने का फैसला करते हैं। सोनम वांगचुक के लिए उठी यह आवाज़ सिर्फ़ एक व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संवाद की संस्कृति के लिए भी है।
“हमारी और आपकी तुलना तो हो ही नहीं सकती अटल जी। हम हज़ारों सालों के सताए हुए पहली बार सदन पहुँचे। आप वर्ण व्यवस्था के लाभार्थी है।
आपके लोगों से सदन भरा है, हमारे लोग कहीं नहीं”
~ शरद जी
शत-शत नमन।
BJP, RSS ने “वी पी सिंह कलंक है” के नारे लगाए।
हमने प्रतिकार किया और अपने मंडल मसीहा के लिए नारे लगाए
राजा नहीं फकीर है
देश की तकदीर है
JNU की फिजाओं में भी हमने नारे लगाए
Mandal Arjun VP Singh
We shall fight, we shall win
#वीपी_सिंह_को_भारतरत्न_दो
राजगीर के मदिर में पुजारियों द्वारा जाति पूछकर दो दलित युवकों को बेरहमी से हत्या कर दी गई...
लेकिन इसके लिए कोई ब्राह्मण या सवर्ण नेता न्याय दिलाने नहीं पहुंचा...
जब दलित पिछड़े समुदाय की हत्या होती है ये सवर्ण नेता क्यों चुप्पी साध लेते हैं ??
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बिहार के भोजपुर में एक गुंडे की पुलिस एनकाउंटर में गोली लगने से मौत हो गयी तो लोगों ने उसे क्रांतिकारी बता दिया, पूरे देश में उबाल आ गया
उसी बिहार के राजगीर में दो दलित युवकों पिंटू पासवान व श्रवण पासवान की कुछ लोगों द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गयी, मामले की कोई चर्चा नहीं, किसी ने इसपर बात नहीं की
आखिर यह भेदभाव क्यों? एक हथियार उठाने वाले आदमी की मौत पर नंगा नाच करने वाले लोग इन दो निर्दोषों की निर्मम हत्या पर चुप क्यों हैं...??
UPSC में EWS के नाम पर चल रहा सबसे बड़ा फ्रॉड?
जिस EWS आरक्षण को आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए लाया गया था, उस पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। UPSC से जुड़े हालिया आंकड़ों में सामने आया कि EWS कोटे से चयनित ज़्यादातर उम्मीदवार महंगी कोचिंग, निजी स्कूलों, संपन्न कारोबारी परिवारों और बेहतर सामाजिक संसाधनों से जुड़े रहे हैं।
आरोप यह भी हैं कि आय छिपाकर और फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए पात्रता हासिल की जा रही है। क्या EWS वास्तव में गरीबों का सहारा है, या सामाजिक न्याय के मूल विमर्श को कमजोर करने वाला नया रास्ता? इस पर देशव्यापी बहस जरूरी है।
EWS और UPSC स्कैम।
UPSC 2025 में 104 कैंडिडेट EWS कोटा से चुने गए!
उनमे से 67 ऐसे कोचिंग से पढ़े जिसकी फीस लाखों में थी।
14 कैंडिडेट IIT से ग्रेजुएट थे।
28 के माता-पिता का बिजनेस है।
10 MNCs में नौकरी करते थे।
ग़ज़ब खेल चल रहा है।
“नरेंद्र मोदी वीक है
तभी तो पेपर लीक है"
पेपर लीक और परीक्षाओं में भ्रष्टाचार के खिलाफ विपक्ष सड़क पर है लेकिन गोदी मीडिया की आँख पर पट्टी और मुँह में मेलोडी भरी हुई है.
जिस घपले-घोटाले की सज़ा शिक्षामंत्री को मिलनी चाहिए उसकी सज़ा शिक्षक को क्यों दी जा रही है।
भाजपा अपनी कमियों, कमज़ोरियों और भ्रष्टाचार के लिए हमेशा ही किसी और को निशाना बनाती है। कभी ‘दानाजीवी’ तथाकथित पत्रकारों से मीडियाबाज़ी करवाकर शिक्षा से जुड़े यूट्यूबर्स पर बेबुनियाद आरोप लगवाती है और कभी उनके शैक्षिक संस्थान बंद करवाती है। इसके लिए भाजपा संस्थान के भवनों के अवैध निर्माण का बहाना बनाती है। अगर कोई अवैध निर्माण हुआ है तो हम ‘प्रयागराज विकास प्राधिकरण’ के उन सभी अधिकारियों के निलंबन और उनसे वसूली की माँग करते हैं, जिनके समय में ये निर्माण हुआ या फिर जिन्होंने आज तक उस पर आपत्ति नहीं की। 24 घंटे में इस कार्रवाई की रिपोर्ट जनता के सामने रखी जाए।
भाजपा शिक्षा, शिक्षक और शिक्षार्थियों की विरोधी है। देश के इतिहास में अब ये पहली बार होगा कि शिक्षा के मुद्दे पर चुनाव लड़ा जाएगा। प्राइमरी के सरकारी स्कूलों को बंद करने; यूनिफ़ॉर्म, स्टेशनरी, मिड-डे मील जैसे घोटालों से लेकर कॉपी की हेराफेरी व भ्रष्ट-मूल्यांकन, पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं में आरक्षण की हक़मारी, हर संभव परीक्षा धांधली, रिजल्ट में बेईमानी व कोर्ट में परिणाम फँसाने की भाजपाई चालबाज़ी जैसे विषयों पर चुनाव होगा और जनता भाजपा को हमेशा के लिए बाहर कर देगी।