नारे कम थे। सवाल ज्यादा थे।
यही Youth Bole Toh को सामान्य रैली से अलग बनाता है। पटना में युवा खुलकर बोले—रोजगार चाहिए, परीक्षा साफ हो, स्किल के नए दरवाजे खुलें। चिराग पासवान उन सवालों के सामने डटे रहे और जवाब देते रहे।
GenZ को ये सेशन इसलिए याद रहेगा क्योंकि उन्हें चुप रहने वाला श्रोता नहीं बनाया गया। जब रैली में युवा बोलते हैं तो राजनीति की भाषा बदल जाती है। पटना में वही बदलाव दिखा।
#YouthBoleToh #ChiragPaswan #Bihar #GenZ #YouthPower
@iChiragPaswan@LJP4India
झूठ का कारखाना खुल गया।
जमुई पीड़िता की फोटो बताकर जो तस्वीर वायरल की गई, वो पीड़िता की नहीं — पीड़िता की मां की थी।
लेकिन @yadavtejashwi और RJD ने बिना जांचे “पॉक्सो तोड़ा” का शोर मचा दिया।
न कानून समझा, न फोटो देखी — सिर्फ प्रोपेगंडा चलाना था।
@samrat4bjp के राज्य में पीड़ित परिवार को न्याय का भरोसा मिलता है,
विपक्ष के शिविर में सिर्फ झूठ, स्क्रीनशॉट और सस्ती राजनीति मिलती है।
सम्राट जी के बिहार में ऐसा झूठ नहीं चलेगा।
जो खुद परिवार से मिलकर एक महीने में कठोर सजा का भरोसा दे रहे हैं,
उन्हीं पर कीचड़ उछालना — यही विपक्ष की औकात है।
#Jamui
#SamratChoudhary
#FakeNews
#Bihar
#TejashwiYadav
जमुई कांड पर सियासी घमासान!
पीड़िता के परिवार के साथ CM सम्राट चौधरी की तस्वीर को लेकर तेजस्वी यादव और RJD ने सवाल उठाए। तस्वीर सोशल मीडिया से हटाई गई, लेकिन विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा।
जमुई जैसे संवेदनशील मामले में RJD का राजनीतिक प्रोपेगेंडा बेहद गंभीर सवाल खड़े करता है। RJD ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर पीड़िता की पहचान उजागर करने का आरोप लगाया, जबकि उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक तस्वीर में पीड़िता के साथ उसके परिवार के सदस्य भी मौजूद थे और परिवार ने मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान पुलिस कार्रवाई पर संतोष जताया था।
पीड़ित परिवार के दर्द को राजनीतिक हथियार बनाना बंद कीजिए RJD! जनता को भ्रमित करने से पहले पूरे तथ्य सामने रखिए—जमुई की बेटी को न्याय चाहिए, राजनीतिक नैरेटिव नहीं।
बिना सच जाने सिर्फ भ्रम फैलाना ही विरोधी दल का काम रह गया है।
जिस तस्वीर को लेकर तेजस्वी यादव और RJD ने इतना हंगामा किया, असल में वो जमुई पीड़िता की नहीं बल्कि उसकी माँ की फोटो थी। सच छुपाए नहीं छुपता! 💯
जमुई मामले में राजनीति तेज, लेकिन सवाल तथ्यों का है।
मुख्यमंत्री @SamratChoudhary ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर जल्द न्याय और एक महीने के भीतर स्पीडी ट्रायल से कड़ी सजा का भरोसा दिया। परिवार ने भी पुलिस कार्रवाई पर संतोष जताया।
इसके बाद तस्वीर को लेकर @yadavtejashwi और RJD ने POCSO उल्लंघन का आरोप लगाकर हमला बोला। तस्वीर बाद में हटा दी गई।
मुद्दा साफ है—राजनीतिक आरोपों से ज्यादा जरूरी है पीड़ित परिवार की निजता, दोषियों पर कार्रवाई और पीड़िता को जल्द न्याय।
#Jamui #SamratChoudhary #Bihar #POCSO #TejashwiYadav
जमुई मामले में सोशल मीडिया पर पीड़िता की पहचान उजागर करने को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर गंभीर आरोप लगाए गए। RJD और तेजस्वी यादव की ओर से इसे POCSO कानून का उल्लंघन बताया गया।
लेकिन वायरल पोस्ट में किए गए दावे के अनुसार तस्वीर में नाबालिग पीड़िता नहीं, बल्कि उनकी मां मौजूद थीं और तस्वीर में लोगों के चेहरे पहले से ब्लर किए गए थे।
ऐसे संवेदनशील मामले में राजनीतिक आरोप लगाने से पहले तथ्यों की पूरी जांच जरूरी है। पीड़िता और उसके परिवार की निजता का सम्मान होना चाहिए तथा न्यायिक प्रक्रिया को राजनीतिक दावों से अलग रखना चाहिए।
#Jamui #Bihar #FakeNews #POCSOவீரமணி
9वीं फेल यदमुल्ला और उसके दरबारी पत्रकारों का एक और फेक नैरेटिव ध्वस्त!
जमुई की घटना को लेकर तेजस्वी यादव और RJD की पूरी IT सेल ने झूठ फैलाया कि CM सम्राट चौधरी ने पीड़िता की पहचान उजागर की।
सच्चाई ये है - वायरल फोटो में पीड़िता थी ही नहीं, उसकी माँ थी। चेहरा ब्लर था, परिवार खुद न्याय के लिए CM से मिलने आया था। लेकिन बेटियों की इज्जत से खिलवाड़ करना तो RJD का पुराना संस्कार है।
POCSO का ज्ञान देने वाले टोंटी को ये नहीं पता कि अपनी नाकामी छुपाने के लिए फेक न्यूज फैलाना भी अपराध है।
बिहार की जनता अब तुम्हारे प्रोपेगेंडा में नहीं आएगी।
तेजस्वी यादव और RJD ने CM सम्राट चौधरी पर POCSO उल्लंघन का आरोप लगाते हुए FIR की मांग की। अब सवाल यह है कि आरोप लगाने से पहले तस्वीर की सही पहचान और पूरे तथ्य की जांच क्यों नहीं?
जमुई जैसे संवेदनशील मामले में राजनीति से ज्यादा जरूरी है—सच की पूरी जांच और पीड़ित परिवार को न्याय।
जमुई की घटना को लेकर सोशल मीडिया पर राजेडी द्वारा पीड़िता की पहचान उजागर करने के आरोप लगाए गए। लेकिन उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वायरल तस्वीर में पीड़िता नहीं, बल्कि उसकी माँ थीं और तस्वीर में चेहरा ब्लर था। बताया गया है कि परिवार स्वयं न्याय की मांग को लेकर मुख्यमंत्री से मिलने पहुँचा था।
ऐसे संवेदनशील POCSO मामले में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से पहले तथ्यों की पुष्टि जरूरी है। पीड़िता और उसके परिवार की गरिमा तथा पहचान की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
फेक या भ्रामक जानकारी के जरिए किसी भी पक्ष को बदनाम करने के बजाय, पूरे मामले की निष्पक्ष और तथ्याधारित जानकारी सामने आनी चाहिए।
FACT CHECK: Misinformation Busted! 🚫
Baseless propaganda aimed at misleading the public over a sensitive issue has been exposed.
Opposition leaders and official RJD handles alleged that Deputy CM Samrat Choudhary violated the POCSO Act by revealing the identity of the minor victim from the Jamui incident.
The Reality:
The person seen in the photograph meeting the Deputy CM is the victim's mother, NOT the minor victim herself. The claims being circulated on social media are entirely false and fabricated.
Sensationalizing serious matters for political mileage shows a complete lack of responsibility. Stick to facts, not propaganda!
The Jamui case involves a minor, and turning such a sensitive matter into political ammunition is wrong on either side.
CM Samrat Choudhary’s Ji post showing the family was deleted shortly after it was uploaded.
The key factual question is whether the girl herself was visible reports differ, with some describing the photo as showing the mother/family members.
The photo may still raise legitimate concerns under POCSO, which restricts publishing information that could identify a child.
The CM’s office should have exercised greater caution. The opposition was justified in raising the legal concern, but turning it into a broader political attack was excessive.
The minor’s dignity should have come before politics on both sides.
Shameful RJD @RJDforIndia
जमुई मामले में पीड़िता के परिवार के साथ मुख्यमंत्री की तस्वीर साझा कर RJD ने भ्रम फैलाने की कोशिश की। जिस तस्वीर को पीड़िता की बताया जा रहा था, उसमें पीड़िता नहीं, बल्कि उसकी मां थीं।
संवेदनशील मामले में राजनीति करने से पहले तथ्यों की पुष्टि करना जरूरी है। पीड़िता को न्याय मिले, न कि उसके नाम पर राजनीतिक प्रोपेगेंडा फैलाया जाए।
जमुई मामले पर राजनीति से पहले एक बात साफ होनी चाहिए—नाबालिग पीड़िता की पहचान और निजता की रक्षा सर्वोच्च है।
जमुई मामले में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पीड़िता और उसके परिवार से मुलाकात कर त्वरित न्याय और स्पीडी ट्रायल का भरोसा दिया। इसके बाद उनके सोशल मीडिया हैंडल से मुलाकात की तस्वीर पोस्ट हुई, जिसे बाद में हटा दिया गया। इस तस्वीर को लेकर तेजस्वी यादव और RJD ने POCSO के तहत पहचान उजागर होने का आरोप लगाया है।
ऐसे संवेदनशील मामले में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ज्यादा जरूरी है कि पीड़िता की पहचान सुरक्षित रहे, जांच निष्पक्ष हो और दोषियों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई हो।
पीड़िता की तस्वीर या पहचान को वायरल करना किसी भी पक्ष के लिए उचित नहीं है।
जमुई जैसे संवेदनशील मामले को राजनीतिक हथियार बनाने से पहले RJD को अपनी भाषा और जिम्मेदारी दोनों पर विचार करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर तेज़ न्याय और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया। तस्वीर बाद में हटा दी गई। इसके बाद तेजस्वी यादव ने उस हटाई गई पोस्ट का स्क्रीनशॉट साझा कर मुख्यमंत्री पर POCSO उल्लंघन का आरोप लगाया।
सवाल यह है—अगर नाबालिग की पहचान की रक्षा इतनी महत्वपूर्ण है, तो हटाई गई तस्वीर का स्क्रीनशॉट दोबारा सार्वजनिक करना भी क्या उसी संवेदनशीलता के अनुरूप है?
राजनीति अपनी जगह, लेकिन नाबालिग की निजता और न्याय सबसे ऊपर होना चाहिए।
**RJD को आरोपों से आगे बढ़कर इसी जिम्मेदारी का जवाब देना चाहिए।**
किसी भी संवेदनशील मामले में न्याय की पहली शर्त नाबालिग पीड़िता की सुरक्षा और उसकी पहचान की गोपनीयता है। जमुई घटना में CM सम्राट चौधरी द्वारा परिवार को त्वरित न्याय का भरोसा दिलाना जरूरी था, लेकिन मुलाकात की तस्वीर सार्वजनिक होने के बाद शुरू हुई सियासत बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
RJD का POCSO एक्ट के तहत सवाल उठाना कानूनी बहस का विषय हो सकता है, लेकिन इससे मूल मुद्दा नहीं भटकना चाहिए। तस्वीर चाहे जिसने भी साझा की हो, नाबालिग की निजता को राजनीतिक टकराव का हथियार नहीं बनना चाहिए। प्राथमिकता निष्पक्ष जांच और दोषियों को कानून के तहत सजा दिलाना ही होनी चाहिए।
नाबालिग से जुड़े मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात पीड़िता की पहचान और निजता की सुरक्षा है। साथ ही सोशल मीडिया पर वायरल किसी तस्वीर या दावे को बिना सत्यापन के आगे बढ़ाना भी उचित नहीं है।
जमुई मामले में उपलब्ध समाचार रिपोर्टों में पीड़िता के परिवार की मुख्यमंत्री से मुलाकात और सुरक्षा व शिक्षा के आश्वासन की जानकारी दी गई है। इसलिए आरोपों के साथ तथ्य और पूरा संदर्भ भी सामने रखा जाना चाहिए।
#Jamui #BiharNews #FactCheck #POCSO #ChildProtection #Truth
जमुई मामले में मुख्यमंत्री से पीड़िता और उसके परिजनों की मुलाकात की खबर कई रिपोर्टों में प्रकाशित हुई है। परिवार की ओर से सरकार की कार्रवाई और बेटी की सुरक्षा व पढ़ाई को लेकर मिले आश्वासन का भी उल्लेख किया गया है।
ऐसे संवेदनशील मामले में तस्वीर को लेकर कोई भी दावा करने से पहले यह स्पष्ट करना जरूरी है कि तस्वीर में कौन है और उसका वास्तविक संदर्भ क्या है।
#JamuiCase #Bihar #FactCheck #ChildSafety #POCSO #Justice