वो क्षण जो कि पुरानी यादों से महसूस हो रही भावनाओं और भविष्य में आने वाले क्षणों की बेचैनी के द्वंद्व में वर्तमान का आनंद महसूस करने पर मजबूर कर देते हैं, बहुत आवश्यक हैं जिंदादिली के एहसास के लिए। ज़िंदगी ज़िंदाबाद, मोहब्बत ज़िंदाबाद। 🌔🌷🙏
#पूर्णिमा#चंद्रमा
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..साल का वो वाला समय। रात के लगभग 10 बजे, जब हल्की हल्की ठंडक शरीर के रोम रोम में महसूस होती है, आँगन में लगे रात रानी की महक, मन की सभी चंचलताओं को नया आयाम देती है और चारू चंद्र की चंचल किरणें, मन को शांत करने के सभी जतन कर रही होती हैं।
#Purnima#FullMoon
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कहाँ तो तय था चरागाँ हर एक घर के लिए,
कहाँ चिराग़ मयस्सर नहीं शहर के लिए।
-दुष्यंत
सभी नेता चुनाव के लिए विजिट पे हैं लेकिन टेलीविज़न बनकर। एकतरफा कम्युनिकेशन। बस बोल रहे हैं। सुन नहीं पाते।
#biharflood#bihar#बिहार#बाढ़
करते हैं तन-मन से वंदन, जन-गण-मन की अभिलाषा का,
अभिनंदन अपनी संस्कृति का, आराधन अपनी भाषा का।
हिंदी दिवस की शुभकामनाएँ 🇮🇳🙏
#हिंदीदिवस#हिंदी#Hindi#HindiDiwas
एक पेड़ लगाया गया। एक समय पूरा होने के बाद उस पेड़ ने फल देना भी शुरू किया, हर साल अच्छे फल आ रहे थे उस पेड़ से। एक साल उस पेड़ में कीड़े लगे तो फल नहीं आए। दूसरे गाँव से एक व्यक्ति आया और उसने दवा छिड़क दी और पेड़ ने अगले साल से फिर फल देना शुरू कर दिया। ये क़िस्सा फैल गया कि एक व्यक्ति है जिसके छूने से मुरझाये पेड़ फल देने लगते हैं। जिन जिन गाँवों में पेड़ फल देना बंद करते, वो जाता और दवा छिड़क देता, और अगले साल उसमे फल हो जाते। पूरा समाज मानने लगा कि फल लाने में इसी व्यक्ति का योगदान है। इसे भी यही लगता था। उसके दिमाग़ में ये बात बैठ गई कि मैं जब दवा डालता हूँ, एक साल में फल आ जाता है। तो इसने सोचा कि मैं अपने पेड़ लगाकर उनमे शुरुआत से ही यही दवा डाल दूँगा तो अगले साल फल मिल जाएँगे। उसने ऐसा ही किया, पेड़ लगाया। और दवा छिड़कना शुरू कर दिया। 11 महीने हो गए हैं और पेड़ में अभी बौर तक नहीं आए हैं। लेकिन इस व्यक्ति का मानना है, "देखियेगा, एक महीने बाद फल आ जाएगा। आज तक जहाँ जहाँ दवा छिड़के हैं, हर जगह अगले साल फल आ गया है।"
उम्मीद अच्छी चीज़ है, जीने का हैसला देती है।
वो चाँद है तो, अक्स भी पानी में आएगा,
किरदार ख़ुद उभरकर, कहानी में आएगा।
#Bihar #BiharElections2025 #RJD #BJP #JDU #NDA #JanSuraaj #LJPR #BiharPolitics
लगभग 5-6 साल पुरानी बात है। और उसके पहले ये लगभग रोज़ की बात थी। मलाई-ब्रेड-चीनी।
आज गाँव से दूध आया था, उसी दूध की मलाई थी।गिलास भर दूध पिया तो महसूस हुआ कि मलाई भी मेरा इंतज़ार कर रही है। ब्रेड लिया, मलाई लगाई, खड़ी चीनी डाली। उसके ऊपर ब्रेड रखा, मलाई लगाई, खड़ी चीनी डाली। डालने को पिसी चीनी भी डाली जा सकती है, लेकिन मज़ा सिर्फ मलाई-ब्रेड-चीनी खाने का नहीं है, मज़ा चीनी पुड़पुड़ाने का भी है। जीवन के बहुत से पल जो कुछ समय पहले 'रोज़ की बात' थे, समय के साथ 'एक समय की बात' बन जाते हैं। लेकिन जब कभी मौक़ा लगे, उन्हें फिर से चीनी की तरह पुड़पुड़ा लेना चाहिए। ये पल जीवन में एक्स्ट्रा मज़ा बनाये रखते हैं।
(चीनी पुड़पुड़ाना:- चीनी खाने पर आने वाली आवाज़ की वजह से चीनी खाने को, चीनी पुड़पुड़ाना कहते हैं।) 🌸✌️
भारत के विभिन्न क्षेत्रों में रहने के बाद, लगभग हर जगह पर समोसे खाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। हालांकि कुछ जगहों को लेकर मेरा निजी तौर पे मानना है कि उनको उत्तर प्रदेश में आकर समोसे बनाने की ट्रेनिंग लेकर अपने प्रदेश वापस जाना चाहिए। हमारे यहाँ पे कच्ची मड़ैया वाली दुकान, जिसकी छत घास से बनी होती है, वहाँ से समोसे उठा लो और खा लो, आत्मा तृप्त हो जाएगी। समोसे की ऊपर वाली पापड़ी थोड़ा सा काट के, और उसमे लाल हरी चटनी लबालब भर के जब उसको दाँत से काटा जाये और मुंह में चटनी का फव्वारा स्वाद ग्रंथियों को छुए। अहा ! तन मन आह्लादित हो जाता है। वो सुख कभी कहीं के समोसे में नहीं आया। नाराज मत होइएगा कोई लेकिन समोसे में मूंगफली कौन डालता है भाई ? समोसा देसी घी में तल के कौन खाता है भाई ? समोसा एकदम गोरा चिट्टा कबसे होने लगा ? समोसे को समोसा ही रहने दिया जाये तो अच्छा है। वो स्वयं में एक पकवान है, उसको और अधिक पकवान बनाने की कोशिश में उसकी रेड़ पीट देते हैं लोग। कभी कानपुर आइये, बढ़िया समोसा खिलाएँगे। हालांकि, समोसा तमिलनाडु का भी अच्छा है, प्याज का समोसा। पूर्ण विराम।
#Samosa #समोसा
फिर वही बिहार है, फिर वही चुनाव है, फिर वही, 2-4 लोगों के बीच की लड़ाई; कुछ नए दावेदार भी आए हैं। फिर वही, जनता को भ्रम में डाला जाएगा कि सरकार जनता बनाती है, जनता चलाती है, जनता महामहिम है।
सारे आका अपनी अपनी रस्सी पकड़े हुए हैं, और कुछ लोगों को उस रस्सी से बांध दिया है, जब मन करता है और जैसी जरूरत होती है, वैसा नचाते हैं, और महामहिम जनता ताली मारती है और महसूस करती है कि वही मालिक है। कभी कभी ये आका, उन कठपुतलियों से गुलाटी भी मरवाते हैं और मजा दुगुना हो जाता है, तालियाँ तेज हो जाती हैं।
चुनाव आ रहा है, तो ध्यान रखिए कि किसी ने कहा था, बिहार की फैक्ट्रियाँ शुरू करवा देंगे, तभी बिहार में चाय पियेंगे। हो सकता है चाय न पी हो बिहार की, मगर ख़ून तो पिया है। एक ने कहा था, 10 लाख नौकरी दे देंगे, एक ने कहा था ज़मीन दे देंगे घर बनाने को, एक ने कहा था, ब्लू प्रिंट और कैंडिडेट लिस्ट मार्च में ही जारी कर देंगे। लेकिन इनमे से किसी ने कुछ नहीं किया है।
हाँ !! चमक की व्यवस्था सब ने कर रखी है, इतनी चमक! कि आँखें चौंधिया जायें। योजनाओं पे योजनाएं आ रही हैं, फ्री बिजली आ रही है, आंदोलनो में कोई विश्वास न रखने वाले, आंदोलन के सहारे चमकने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं, मखाना फैक्ट्री लग रही है, रैलियाँ हो रही हैं। सावन खत्म होते ही देसी मुर्गा और दारू भी मिलने लगेगा। कुल मिला कर, एकदम तगड़ा माहौल बना हुआ है।
सारी चमक बस नवंबर तक है, रैलियों के झंडे का डंडा सम्हाल के रखियेगा। नवंबर के बाद कोई भी आए, अगर अपने किए वादे से मुकरे तो उसी का डंडा उसी पर इस्तेमाल कीजिएगा।
#Bihar #BiharElection2025 #BJP #RJD #JDU #LJP #INC #JanSuraaj #RegionalParties
तब तक छात्र लाठी खाते रहें और आंदोलन में गर्मी बनाए रखें, जिससे कि साहेब की फोटो में चार चांद लगने में कोई कमी ना रह जाये।
अंधेर नगरी, चौपट राजा। टके सेर भाजी, टके सेर खाजा।(2/2)
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#BPSC#BPSC70th#BPSC_PAPER_LEAK#BPSCStudentsProtest
@yadavtejashwi अभी ट्रायल मोड में चल रहे हैं।माहौल देख रहे हैं।जब PR टीम कहेगी, "सर अब ट्वीट का मैदान छोड़कर, बैकग्राउंड में छात्रों की उपस्थिति, और सामने मीडिया के 4-5 माइक को रखकर फोटो खिचाने का समय आ गया है", तब उनके अंदर का विपक्षी नेता जागेगा और खूब तेजी से दहाड़ेगा। (1/2)
It's not that Bitches did not exist back then, they did. It's not that darlings do not exist now, they do. However, cases like Nikita and Atul must be addressed swiftly, ensuring justice is served, and strict punishment is imposed on the guilty.
#JusticeForAtulSubhash#MenToo
पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने शुरू की भूख हड़ताल।
कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर जारी क्रमिक अनशन में रेलवे कर्मचारी भी हुए शामिल। देश और प्रदेश भर के कार्यालयों को बंद कर किया जाएगा आंदोलन किया जाएगा: प्रभात मिश्रा,जिला अध्यक्ष,कानपुर नगर।
#कानपुर- पुरानी पेंशन योजना बहाली सयुक्त मंच के तत्वाधान में उर्सला अस्पताल से जिलाधिकारी कार्यालय तक मशाल जुलूस निकाला गया, राज्य कर्मचारी सयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष प्रभात मिश्रा का कहना है- "पुरानी पेंशन जल्द से जल्द बहाल की जाए अन्यथा कर्मचारी सड़क पर उतर कर प्रदर्शन करेंगे"। #kanpur @DMKanpur@PMOIndia@CMOfficeUP@sdPachauri1@UPGovt@sunilbajajbjp
कल मुख्यमंत्री जी आ रहे हैं।वर्षों से बदहाल पड़ी सड़कें, जल नल, खुले कूड़ेदान सब २ दिन में दुरुस्त हो रहे हैं।जहां कूड़ा साफ़ नहीं हो पाया २ दिन में, उस जगह को रंग बिरंगी चादरों से ढक दिया जा रहा है।साहेब लोग जान लगा दिये हैं।
अंधेर नगरी, चौपट राजा।
टके सेर भाजी, टके सेर खाजा।