मैं वाल्मिकियों, मदीगाओं, मजहबियों, रामगढियाओं, रामदासियाओं, मातंग और सभी से अपील करता हूं कि वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ठीक से पढ़ें।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला न केवल अनुसूचित जातियों के भीतर उप-वर्गीकरण की अनुमति देता है बल्कि अनुसूचित जातियों के आरक्षण में क्रीमी लेयर के प्रावधान की भी अनुमति देता है।
सरल शब्दों में, इसका मतलब है कि एक शिक्षित व्यक्ति के परिवार को, चाहे वह अनुसूचित जाति के अंतर्गत किसी भी जाति का हो, आरक्षण नहीं मिलेगा। चाहे वह व्यक्ति चमार हो या वाल्मिकी, क्रीमी लेयर सभी उप-वर्गीकरण जातियों पर लागू होंगी।
एक दलित जिसने जातिवादी समाज के सभी बाधाओं से जूझते हुए, शिक्षा में कम से कम 15 साल और एक अच्छी नौकरी पाने में कम से कम 2 साल का समय लगाया है, उसके परिवार को आगे आरक्षण नहीं मिलेगा। क्योंकि वह क्रीमी लेयर के प्रावधान के अधीन होंगा। एक बार एक दलित कमाने लगा तो अनुसूचित जाति क्रीमी लेयर के प्रावधान के भीतर उसकी जाति कोई मायने नहीं रखेगी।
अनुसूचित जाति में शामिल हर दलित, चाहे वह किसी भी जाति का हो, जिसके पास नौकरी है, वह क्रीमी लेयर में आएगा और उसका परिवार आरक्षण का लाभ नहीं ले पाएगा।
जो परिवार अभी तक आरक्षण का लाभ नहीं उठा पाया है, वह कम से कम 15 साल शिक्षा में और 2 साल नौकरी पाने में लगाएगा। लेकिन कम से कम 15-17 साल तक आरक्षण की नीति निष्क्रिय रहेंगी, क्योंकि तब तक आरक्षण का लाभ न लेने वाले परिवारों को शिक्षा और नौकरी पाने में 15-17 साल निवेश करना पड़ेगा और नौकरी वाले परिवार आरक्षण का लाभ नहीं ले पाएंगे।
तो 15-20 साल तक आरक्षण का लाभ कौन उठाएगा? आरक्षण का उपयोग ही नहीं होगा। शिक्षा और पब्लिक सेक्टर में अनुसूचित जातियों का रिप्रजेंटेशन बिल्कुल नहीं रहेगा।
अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस गवई ने हमें कई मौकों पर हरिजन कहकर संबोधित किया है।
मैं सभी से अपील करता हूं कि वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पीछे की रणनीति को पढ़ें और समझें, जिसका उद्देश्य अनुसूचित जातियों के आरक्षण को धीरे-धीरे खत्म करना है।
आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ SC/ST समाज में काफी गुस्सा है।
फैसले के विरोध में हमारे समाज ने 21 अगस्त को भारत बंद का आह्वान किया है।
हमारा समाज शांतिप्रिय समाज है। हम सबका सहयोग करते हैं। सबके सुख-दुख में हमारा समाज शामिल होता है। लेकिन आज हमारी आजादी पर हमला किया जा रहा है।
21 अगस्त को इसका शांतिपूर्ण तरीक़े से करारा जवाब देना है।
परम् पूज्य बाबा साहब डॉo भीमराव अंबेडकर जी की प्रतिमा के सामने सिर झुकाकर, संविधान को माथे पर लगाने वाले प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार उसी संविधान की किस कदर हत्या करने पर तुली है लेटरल एंट्री का यह नोटिफिकेशन इसका जीता जागता उदाहरण है।
केंद्र सरकार द्वारा अपनी विचारधारा के 45 लोगों को बिना कोई परीक्षा पास किए बैकडोर से मंत्रालयों में बैठाने के लिए एक बार फिर से विज्ञापन निकाल दिया है। जिसमें किसी भी पद पर कोई आरक्षण नहीं है।
लेटरल एंट्री के ज़रिए भरे जाने वाले इन पदों में 𝟒𝟓 जॉइंट सेक्रेटरी, डायरेक्टर और डिप्टी सेक्रेटरी हैं अगर 𝐔𝐏𝐒𝐂 परीक्षा के माध्यम से इन 𝟒𝟓 𝐈𝐀𝐒 की नियुक्ति करती तो उसमें 𝐒𝐂/𝐒𝐓/𝐎𝐁𝐂 वर्गों का आरक्षण होता यानि 𝟒𝟓 में से तकरीबन 𝟐𝟑 अभ्यर्थी दलित, पिछड़ा और आदिवासी वर्गों से चयनित होकर आते लेकिन आरक्षण और संविधान विरोधी केन्द्र की भाजपा सरकार ने चोर दरवाजे यानि बैकडोर से खास जातियों और विचारधारा के चहेतों को मंत्रालयों में बैठाने का प्रबंध कर लिया है।
गौरतलब है की ये पहला मौका नहीं है इससे पहले मोदी सरकार लेटरल एंट्री के नाम पर विभिन्न मंत्रालयों में ज्वाइंट सेक्रेटरी, डिप्टी सेकेट्री व डायरेक्टर के पदों पर 2017 से 2023 के बीच लगभग 52 नियुक्तियां कर चुकी है कोई आरक्षण नहीं दिया गया। बिना परीक्षा सीधे “राजनैतिक सरपरस्ती” के चलते नियुक्ति मिल गई।
अब एक बार फिर से 45 पदों पर विज्ञापन आया है इसलिए ये कहा जा सकता है की इन पदों की अघोषित योग्यता ये है कि अभ्यर्थी संघ से जुड़ा हो और राजनैतिक तौर पर भाजपा की विचारधारा लिए काम करता हो।
OBC/SC/ST में जबरन क्रीमी लेयर खोजने वाले माननीय न्यायमूर्तियों और केंद्र सरकार से सवाल इन पदों पर इन वर्गों का तथाकथित क्रीमीलेयर कहां चला जाता है?
@BhimArmy_BEM और @AzadSamajParty इस संविधान विरोधी बैक डोर एंट्री का संसद से लेकर सड़क तक पुरजोर विरोध करेगी।
मान्यवर साहेब ने ‘चमचा युग’ क्यों लिखी थी आज सबको समझ लेना चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी ने आरक्षण पर जो बयान दिया है वह नेहरू गांधी परिवार की चापलूसी के सिवाय कुछ नहीं है।
एससी-एसटी समाज को इन नेताओं से सावधान रहना चाहिए जो दलितों के नाम पर राजनीति करते हैं और बाबा साहेब के योगदान को भूला देते हैं।
कांग्रेस और पंडित नेहरू जी की आरक्षण और बाबा साहेब से नफरत जग जाहिर है। और खरगे जी वही बोल रहे हैं जो नेहरू जी और राहुल गांधी जी सोचते हैं। यही है ‘कांग्रेस का सच’
इस शंकाराचार्य ने सच बात बोल दी।
ब्राम्हणों का धर्म और ओबीसी (शूद्रो) का धर्म एक नहीं है।
शूद्र कितना ही योग्य हो फिर भी वह शंकराचार्य नहीं बन सकता।
वैदिक धर्म ही आतंकवाद का जनक है।
विदेशी ब्राम्हणों का वर्चस्व कराने वाला धर्म आतंक को जन्म नही दे रहा है तो क्या कर रहा है?
पत्रकार ने पूछा: अगर किसी राज्य का मुख्यमंत्री बने तो उसके बेटे को आरक्षण मिलना कितना सही है?
चंद्रशेखर आजाद का जवाब: जैसे PUBG में सबसे डिफिकल्ट लेवल के खिलाड़ी को हेडशॉट से उड़ा दिया हो! 😂
पिछली लोकसभा में बीएसपी के वोट सपा से बहुत ज्यादा थे. इस बार भी हो सकता है यही हो. पर रवीश पांडे ने अखिलेश यादव और कांग्रेस की साझा रैली लगातार कवर की. बहनजी और आकाश आनंद की कोई रैली कवर नहीं की.
अब ये पूछने की खुजली मची है कि आकाश आनंद को क्यों हटाया. #शर्म_करो_रवीश_पांडे
1. विदित है कि बीएसपी एक पार्टी के साथ ही बाबा साहेब डा भीमराव अम्बेडकर के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान तथा सामाजिक परिवर्तन का भी मूवमेन्ट है जिसके लिए मान्य. श्री कांशीराम जी व मैंने खुद भी अपनी पूरी ज़िन्दगी समर्पित की है और इसे गति देने के लिए नई पीढ़ी को भी तैयार किया जा रहा है।
अभी अभी दिल्ली पुलिस ने @DrRituSingh_ और उनके साथियों को धरना स्थल से जबरन उठा दिया। ये दूसरी बार है, आज सुबह भी धरना ज़बरदस्ती हटाया गया था। पुलिस ऋतु और उनके साथियों को बस में भरकर ले गई।
So Prime Minister @NarendraModi will inaugurate the Ram Mandir in Ayodhya on January 22nd and the BAPS Hindu Temple in Abu Dhabi on February 14th. I expect elections to be called very soon thereafter.
The message is clear. In 2009, Mr Modi was sold to the Indian electorate as the avatar of economic development, the CEO of Gujarat Inc., who would bring development to all Indians. In 2019, with that narrative collapsing in the wake of the disastrous demonetisation, the Pulwama terrorist attack gave Mr Modi the opportunity to convert the general election into a national security election. In 2024, it is clear the BJP will now revert to its core message and offer Narendra Modi to the nation as a Hindu Hriday Samrat.
All of this begs the question: what happened to achhe din? What happened to 2 crore jobs a year? What happened to economic growth that would benefit the lower rungs of the socio-economic ladder? What happened to putting disposable income into the pockets and bank accounts of every Indian? These questions will have to be debated in an election that is shaping up to be Hindutva versus popular welfare.
https://t.co/1WuV4GwJQC
भारत सरकार इस फ़्रॉड को एमबीए चलाने कैसे दे रही है। 10 दिन में ये एमबीए यानी मास्टर्स इन बिज़नेस ऐडमिनिस्ट्रे़न यानी स्नातकोत्तर कराने की बात कर रहा है और @Uppolice और @DelhiPolice चुपचाप युवाओं को ठगे जाते हुए देख रही है।
ये अपना धंधा हिंदी में कर रहा है। तो ठगे कौन जा रहे हैं, समझ लीजिए।
माननीया बहिन मायावती जी, मा0 आकाश आनंद जी तथा मा० अशोक सिध्दार्थ जी मा० धर्मवीर अशोक जी का आभार , माननीय मनोज घुमरिया जी को बहुजन समाज पार्टी, राजस्थान का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए जाने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ ।@Mayawati @AnandAkash_BSP
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@fenestawindows ultimate poor service. After taking 100% advance, no efforts to expedite deliveries. Even commitment of 45 days not adhered to. Lackadaisical approach!! #AnshuMishraIndia
On Constitution Day, let's rededicate ourselves to the constitutional ideals and values enshrined in the Preamble by the respected members of the Constituent Assembly https://t.co/MK3KVJ4xhP #ConstitutionDay