फसल बीमा योजना का यह आंकड़ा हैरान करने वाला है। पिछले दो साल में देशभर के 73 लाख किसानों ने फसल बीमा छोड़ दिया, इनमें से अकेले राजस्थान के 6.79 लाख किसान शामिल हैं। प्रीमियम भरने के बावजूद नुकसान होने पर क्लेम न मिलना और सर्वे-औसत की उलझी गणना में फंसे रहना, यही किसानों की सबसे बड़ी शिकायत है।
नुकसान खेत में होता है, लेकिन मुआवजा क्षेत्र की औसत उपज से तय होता है, यही इस पूरी व्यवस्था की सबसे बड़ी खामी है। कोई किसान पूरी फसल गंवाकर भी सिर्फ 2.30 रुपए का क्लेम पाता है, तो कोई पूरे पौधे खराब होने पर भी बीमा से वंचित रह जाता है। इसी साल का ही राजस्थान में 205.52 करोड़ रुपए का बीमा क्लेम अटका हुआ है। इससे पहले के सालों की स्थिति भी अच्छी नहीं है।
किसान शुरू से ही यह आरोप लगाते रहे हैं कि यह योजना किसानों से ज्यादा बीमा कंपनियों के फायदे की योजना है, आज के ये आंकड़े उनकी उस आशंका को सही साबित कर रहे हैं। अगर योजना में कोई कमी रह गई है तो सरकार को उसे ठीक करने में क्या परेशानी है?
भाजपा सरकार को तुरंत फसल बीमा की गणना पद्धति में सुधार करना चाहिए, ताकि किसान का असली नुकसान असली मुआवजे में बदले, कागजी औसत में नहीं।
@MeenasSugrive@IncomeTaxIndia Taxation of Agriculture Income In India In India, as per the Income Tax Act, 1961, agriculture income is exempt from income tax. This means that if a person earns income solely from agricultural activities, they do not have to pay income tax on that income
सरकार को अधिगम कोचिंग में पढ़ रहे बच्चों की ₹ 70-70 हजार की फीस लौटाने के लिए सुरेश ढाका की संपत्ति नीलाम करनी चाहिए, क्योंकि एडमिशन लेने वाले बच्चों का कोई दोष नहीं है। गांव से आने वाले इन बच्चों ने तो जैसे-तैसे फीस का इंतज़ाम किया था।@ashokgehlot51
बताया जा रहा है कि इस लड़की का एसआई भर्ती में चयन हुआ है l
इस इंटरव्यू को देखने के बाद चयन पर सवाल उठ रहे हैं
इसीलिए कल के आंदोलन में SI और स्कूल व्याख्याता भर्ती में कई फर्जी अभ्यर्थियों को चयनित होने की संभावना जताई थी और ऐसे संदिग्ध अभ्यर्थियों की जांच की मांग उठाई थी
@RajCMO
प्रदेश की बेटी श्रीमती मनीष जाट को न्याय दिलाने के लिए अभी मैं पीड़िता के स्थानीय विधायक एवं मंत्री राजेंद्र गुड्डा जी के आवास पर धरने पर बैठा हुआ हूँ।
मेरी सिर्फ यहीं मांग है की पीड़िता को न्याय मिले, न्याय नही मिलने तक मैं धरने पर बैठा रहूँगा... आश्वासन नही, न्याय चाहिए"
प्रदेश की बेटी श्रीमती मनीष जाट को न्याय दिलाने के लिए अभी मैं पीड़िता के स्थानीय विधायक एवं मंत्री राजेंद्र गुड्डा जी के आवास पर धरने पर बैठा हूँ।
"आश्वासन नही, न्याय चाहिए"। प्रकाशित खवर..
यह कैसी अंधेरगर्दी है कि पति को खो चुकी एक बेबस महिला राजधानी जयपुर में मंत्री-आवास पर न्याय की गुहार लगा रही है पर निष्ठुर सरकार के कान पर जूं नहीं रेंग रही है। श्रीमती मनीष जाट, उनकी 80 साल की वृद्धा माता व 12 साल के पितृहीन बालक को जब तक न्याय नहीं मिलेगा, मैं धरने पर रहूंगा।