1800's और 1900's की सदी में नीदरलैंड की सड़कों पर आवारा कुत्ते आतंक बन चुके थे.
उस वक़्त के डच अखबारों में खबर आम थी, बच्चों और बूढ़ों को कुत्ते ने काट लिया. उनकी रेबीज से मौत हो गयी.
बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए नीदरलैंड सरकार ने 1962 में आवारा कुत्तों को शेल्टर में होम में बंद कर दिया.
1980 में ठीक इसी प्रकार की समस्या से जापान जूझ रहा था. जापानी सरकार ने भी बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए सड़कों पर से आवारा कुत्तों को हटा दिया.
यूरोप, अमेरिका, चीन, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया ने भी जापान और नीदरलैंड का अनुसरण किया.
भारत में आवारा कुत्ते बच्चों पर हमला कर मार रहे हैं. कुत्तों के काटने से लोग रेबीज से मर रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य है.