नितिन नवीन जी लगातार हर जगह जाकर मोदी जी का जन्मदिन मना रहे हैं। कोई सुने या न सुने, आदमी लगा हुआ है, यह तो मानना पड़ेगा!
मोदी जी भी कभी नीले बैकग्राउंड में, कभी लाल बैकग्राउंड में, लगातार भाषण दिए जा रहे हैं।
क्योंकि वीपी सिंह की सरकार ने, भाजपा के (लोकसभा और राज्यसभा) समर्थन के साथ बौद्धों को 1990 की मई में दलित का दर्जा दिया था। अतः, वो दलित में गिने जाते हैं।
भाजपा का जातिवाद और आरक्षण प्रेम अनन्य है। तब से है जबसे ये सत्ता में थे नहीं। बाहरी समर्थन की सरकार में बाजपेयी से ले कर कई नेताओं ने डिबेट किए बौद्धों के पक्ष में।
It was an absolute joy and privilege to celebrate the auspicious occasion of Mahalaya at the iconic Eden Gardens yesterday, officially welcoming the festive spirit of Durga Puja with unmatched splendour. The entire stadium was filled with electrifying energy, capturing the cultural heritage, warmth and soul of West Bengal.
From the evocative beats of the 'dhak' and traditional dance recitals to soul-stirring musical performances and the auspicious lighting of the lamp, the evening resonated with the divine spirit of Agomoni.
A proud highlight of the event was West Bengal receiving a Guinness World Record certificate, marking another historic milestone for our State. The night sky over Kolkata was truly mesmerising, lit up by an extraordinary drone light show depicting Maa Durga, followed by a dazzling fireworks display.
As we welcome Maa Durga home, let this festive season fill every household with peace, good health, unity and boundless happiness.
Joy Maa Durga 🚩
बंगाल में दुर्गा पूजा का भव्य 'पुनरारंभ' बताता है कि जितने शुंभ-निशुंभ, मधु-कैटव, चंड-मुंड आते हैं, वो निपटा भी दिए जाते हैं। सनातन सभ्यता निरंतर प्रवाह में चलती रहती है। वह ना तो मुगलों से हारी, ना अंग्रेजों से, और इन भीतरघाती नेताओं से तो घंटा कुछ नहीं उखड़ने वाला है।
इसलिए, इसे सनातन के विशाल कालखंड की अविरल धारा में एक सड़े हुए बहते नाले की तरह देखिए जो नदी में कोई डंप कर रहा है।
जो भी समाज का शत्रु होगा, जो भी स्वयं को भगवान समझेगा, जो भी राष्ट्र को तोड़ने-बाँटने का प्रत्यक्ष (या परोक्ष) संकल्प ले कर उतरेगा, उसको निपटा दिया जाएगा।
वो या तो ऐसे निपटेंगे, या वैसे। आप सबको माता दुर्गा स्वस्थ रखें, समृद्धि दें, शक्ति दें और देश के लिए लड़ने का सामर्थ्य भी।
आदरणीय मोदी जी करेंगे। घिसट-घिसट कर करेंगे। अपनी राजनीति के लिए उनसे जो बन पड़ेगा वो करेंगे। भाजपा सरकार वकील के माध्यम से इन्हीं ‘दिमागी नक्सलियों’ को सड़क पर छोड़ेगी।
भावुकता बेचना बंद करो।
भारत और हिंदुओं को बुरा बताकर हिंदू और सिखों को अलग साबित करने की कोशिश हो रही है। गुरुओं की वाणी के संदर्भ सामने आने के बाद भी रेफरेंस माँगा जा रहा है, बस स्वीकार्यता के लिए किसी भी सीमा तक गिरने की कोशिश है।
बंगाल में जब भाजपा के कार्यकर्ता मारे जा रहे थे, उस समय तक 135 लोग मारे जा चुके थे। मैं तभी से आलोचना कर रहा था कि आप लोग आखिर कर क्या रहे हैं? उनकी कोई सूची तक नहीं थी। मैं एक दिन में बीस-बीस लोगों से मिला हूँ, आठ-दस लोगों के इंटरव्यू किए हैं। वे इंटरव्यू आपको आराम से मिल जाएंगे if not deleted.
मुझे उसी समय भागवत की नीचता भी दिख गई थी, जब उन्होंने मुझसे कहा था कि संघ ने हिंदुओं का ठेका ले रखा है क्या?
भाई, उन लोगों का नाम लेकर आपने क्या किया? आप डराते रहे कि कोई और मर जाएगा, इसको मार दिया, उसको मार दिया। लेकिन उनके लिए किया क्या? उनसे मिलने के लिए 26 जनवरी को बुला लिया, बस यही सब करते रहे। क्या भाजपा का कार्यकर्ता नहीं मर रहा था? क्या एक पत्रकार के तौर पर हम इस पर चुप रह जाते? नहीं रह सकते, हमारी आत्मा कचोटती है।
मैं उस पत्नी से मिला हूँ, जिसके पति की गर्दन काटकर धड़ फेंक दिया गया और सिर को एक टोपी में रखकर किसी अनजान ट्रेन में छोड़ दिया गया। सिर्फ इसलिए, क्योंकि वह भाजपा का कार्यकर्ता था।
इसलिए मुझे देशभक्ति और राष्ट्रवाद का ज्ञान मत दीजिए। इतने वर्षों से घास नहीं छील रहा हूँ। मैं किसी घटिया कॉलेज का बीटेक इंजीनियर नहीं था, जो फेल होकर पत्रकारिता में आ गया। मैं जो करता हूँ, पूरे कन्विक्शन के साथ करता हूँ। और उसकी एक पूरी प्रक्रिया है। मैं जिस विषय को पकड़ता हूँ, उसके लिए पूरी दुनिया एक तरफ हो जाए, तब भी मैं पीछे हटने वाला नहीं हूँ।
ट्रोल से हमको घंटा फर्क नहीं पड़ता। नौ-दस महीने से ट्रोल झेल रहे हैं, क्या उखाड़ लिया मेरा? YouTube और Twitter पर मेरी इंगेजमेंट बढ़ी है, लोग अधिक जुड़ रहे हैं। तुम्हारी रैलियों में लोगों की संख्या घट रही है, तुम्हारी थू-थू हो रही है।
एक मिनट को मान लेता हूँ कि योगी जी 350 सीटों के साथ वापसी करेंगे, जैसा बहुत सारे लोग कह रहे हैं। ठीक है, जीत भी जाएँ, तब भी UGC उचित नहीं हो जाएगा। दोनों अलग चीजें हैं। हो सकता है लोगों को UGC से फर्क नहीं पड़ता हो, लेकिन एक व्यक्ति और पत्रकार के तौर पर मुझे तो फर्क पड़ेगा।
मान लीजिए, राजनीतिक रूप से मैं गलत साबित हो जाऊँ। दिल्ली यूनिवर्सिटी में ABVP जीत गई, तो क्या इसका मतलब यह है कि वहाँ के विद्यार्थियों को UGC याद नहीं है या वे इसे मुद्दा नहीं मानते? यह तो हमारे मुँह पर सबसे बड़ा तमाचा है। मानेंगे या नहीं? लेकिन उस तमाचे के बाद भी मेरा प्रश्न वही है, क्या UGC के प्रावधान उचित हैं? इस बिंदु पर सोचिए।
IT सेल वालों का जीवन दूसरों पर लांछन लगाने में निकल गया और ये हमें ज्ञान देंगे!
“मैं भी असमंजस में हूँ। मोदी जी को हारते नहीं देखना चाहता। मैं चाहता हूँ कि स्थिति बदले।”
यही भाव मेरे भी थे। लेकिन हम अपनी बात ठीक करवाने के लिए दबाव किस पर बनाएँ?
तिलचट्टे बीस-तीस दिन बैठे, सरकार झुक गई और ठीक उसी माँग को माना, जिसे मैं फरवरी से उठा रहा था। मैं अपनी बात छोड़ दूँ? बाकी लोग भी प्रधान के इस्तीफे की माँग कर रहे थे। वह सांकेतिक माँग थी, उसे मान लेते, लेकिन वह भी नहीं हुआ।
हम तो लगातार वही बात उठा रहे हैं। UGC पर आज भी स्टे लगा हुआ है। हम जानते हैं कि स्टे क्यों लगा हुआ है। सात महीने में दूसरी तारीख मिलती है। वामपंथियों को राहत दिलानी हो तो तीन दिन में तीन बार तारीख मिल जाएगी, लेकिन जिस UGC का करोड़ों विद्यार्थियों पर असर पड़ना है, उस पर सरकार सात महीने में दूसरी तारीख लेती है?
और उसमें भी दो लाइन बोलकर भूल जाएँ कि हम रीकंसिडर कर रहे हैं, it can go both ways। आप चाहते हैं कि फिर एक तारीख आए, उसके बाद कोई और तारीख मिले, फिर मार्च के बाद की कोई तारीख आ जाए। तब तक हम यही बोलते रहें कि स्टे लगा हुआ है।
फिर मोहन भागवत से बुलवा लेंगे कि कोई कानून है ही नहीं, जैसे हमें पता ही नहीं कि कानून क्या है और नियमावली क्या है। गिरिराज सिंह से बुलवाया जा रहा है, तो…
जब ये सब कुछ चल रहा था, सबको दिख रहा था कि जो गलत है, सो गलत है, लेकिन किसी बड़े हैंडल ने नहीं लिखा।
चाटुकारों ने कहा, दो दिन बोल लो अजीत भारती, लेकिन तीसरे-चौथे दिन भी बोल रहे हो? तुम्हारी माँ की चिता की आग भी ठंडी नहीं हुई।
दाह संस्कार के बाद मैं चार-पाँच दिन घर में था। संभवतः मैंने फोन तक नहीं देखा, किसी पर प्रतिक्रिया नहीं दी। आकाश ने मुझे रोते-रोते बताया कि क्या-क्या लिखा जा रहा था। वह कह रहा था कि मैंने सब रखा हुआ है, और यह बताते-बताते रो रहा था। मैंने आज तक नहीं देखा कि किसने क्या लिखा था। मुझे लगता है, क्यों देखना? ईश्वर सबका हिसाब करेगा। ईश्वर नहीं, तो समय करेगा, और उनका हिसाब हो भी रहा है।
लेकिन उसके बाद भी आप कहाँ रुक गए, भाई? देश में हर दिन 42 बच्चे आत्महत्या करते हैं। NEET के कारण इतने बच्चे मरे, पेपर लीक के कारण इतना कुछ हुआ। सरकार ने क्या किया? स्कूलों और कॉलेजों में काउंसलर लगाए? नहीं लगाए। कोई नीति देखी आपने?
यह एक तरह की महामारी है। सोचिए, देश में हर दिन 40-42 बच्चे आत्महत्या कर रहे हों, क्या यह पैनिक की स्थिति नहीं है? बच्चे आत्महत्या क्यों करते हैं? मार्गदर्शन की कमी भी इसकी एक वजह हो सकती है।
साहिल वाकोड़े क्यों चला गया? यार, नकल किसने नहीं की अपने जीवन में? अधिकांश लोगों ने की है, 5% को छोड़ दीजिए। कोई कम करता है, कोई ज्यादा, कोई बहुत ज्यादा। बच्चे आपस में हँसी-मजाक में बताते भी हैं कि कैसे फोन निकालकर देख लिया और टीचर पकड़ने ही वाले थे। पकड़ भी लिया तो हँसकर बात खत्म कर दी, मुर्गा बन गए, जो भी सजा मिली, भुगत ली।
लेकिन वह बच्चा मानसिक रूप से कितना अशक्त रहा होगा, अगर इस घटना के बाद उसने आत्महत्या कर ली? उसे काउंसलिंग मिलती, उसे समझाया जाता कि यार, ये सब जीवन के कुछ उतार-चढ़ाव हैं। आगे तुम्हारे जीवन में बहुत कुछ है। अगले सेमेस्टर में सारे पेपर दे देना, ऑड का ऑड में, इवन का इवन। कोई उसे यह समझा देता, तो शायद उस बच्चे का जीवन बच सकता था।
लेकिन आपने देखा, सरकार ने इस पर दो लाइन बोलीं। मैं NEET वाले मामले की बात कर रहा हूँ, साहिल वाकोड़े की आत्महत्या से पहले की। कह दिया, मेरी जिम्मेदारी नहीं है। कोई समाधान दिया आपने? नहीं दिया।
People are looking for a remedy. लोग समाधान चाहते हैं, इलाज चाहते हैं। क्या आपने कभी सोचा कि शिक्षाविदों को बैठाकर इस पर चर्चा की जाए? प्रधानमंत्री को इस पर विचार करना चाहिए।
मैं जिन बातों के लिए प्रधानमंत्री की तारीफ किया करता था कि वे बच्चों से सीधे संवाद करते हैं, अब मुझे लगता है कि कहीं यह सब सिर्फ दिखावा तो नहीं है? बच्चों से बात करने की छवि बननी चाहिए, लेकिन क्या वास्तव में उनकी समस्याओं को समझा भी जा रहा है?
अगर आप बच्चों को लेकर गंभीर हैं, तो इस आँकड़े को कैसे अनदेखा कर सकते हैं? आपके देश में हर दिन 42 बच्चे मर रहे हैं, आधी लड़कियाँ, आधे लड़के। इसके लिए कोई नीति होनी चाहिए या नहीं?
स्टूडेंट काउंसलर होने चाहिए। शिक्षकों को काउंसलिंग की ट्रेनिंग मिलनी चाहिए। हर 100-50 बच्चों पर एक मनोवैज्ञानिक जैसा विशेषज्ञ होना चाहिए, जो बच्चों से संवाद करे, उनकी समस्याएँ समझे और समय रहते उनकी मदद करे। लेकिन आपने यह पूरा क्षेत्र ही छोड़ रखा है।
यही मैं कह रहा हूँ, कहने को मेरे पास बहुत कुछ है। इस विषय पर मैं लगातार, हर दिन बोल सकता हूँ, लिख सकता हूँ, और आप बोर भी नहीं होंगे।
मध्यप्रदेश सरकार का 73% आरक्षण वाला केस आज निरस्त हो गया। यह भाजपा सरकार द्वारा अपील किया गया था। पहले ही हायकोर्ट निरस्त कर चुकी थी। पर ओबीसी प्रेम में अंधी भाजपा भगवान राम को जातिवादी हत्यारा बताने के एफिडेविट को आधार बना कर ओबीसी को ऐतिहासिक प्रताड़ना का शिकार बता रही थी।
बहुत बढ़िया कार्य YFE द्वारा! देते रहो गाली! लोग समाज के लिए लड़ते रहेंगे।
भाजपा का कहना है कि आरक्षण की सीमा कोई ऐसी सीमा नहीं कि उसे तोड़ा न जा सके। मराठा समाज को तीन बार आरक्षण देने और तीनों बार कोर्ट से रोकने के बाद पुनः भाजपा कोर्ट में उसे डिफेंड कर रही है।
मध्यप्रदेश (73%), महाराष्ट्र (72%), बिहार (75%), छत्तीसगढ़ (68%) या राजस्थान (64%), भाजपा सरकार हर राज्य में 50% से आगे जा चुकी है और हर कोर्ट में उसे डिफेंड कर रही है।
अतः, जब आपको चटआ गिरोह कहे कि राहुल गाँधी आरक्षण बढ़ा देगा, उसके मुँह पर तथ्य मारिए। भाजपा शीघ्र ही निजी क्षेत्र के चतुर्थ श्रेणी से प्राइवेट में आरक्षण आरंभ करेगी। चटुए उसे भी मास्टरस्ट्रोक कहेंगे।
नीलेन्द्र जी अपने पीआर की जूस का एक-एक बूँद निचोड़ लेना चाहते हैं। जब आशीर्वाद का दीया, बाइक यात्रा, सेवा सप्ताह आदि चलते ही फ्लॉप हो गया तो सोचे कि मंदिर में चला जाता हूँ, हिन्दू नाचने लगेगा।
हिन्दू ने कहा कि बंद करो ये नौटंकी। फिर सोचे कि आडवाणी जी का तो आज भी जलवा है, पुष्पगुच्छ दे आता हूँ, फोटो देख कर राष्ट्रवादी जनता पगला जाएगी। नहीं पगलाया कोई। आडवाणी जी भी सोच रहे होंगे कि न तो कोई बर्थ डे है उनका, फिर महामानव उनके द्वार क्यों?
नीलेन्द्र जी अपने पीआर के निम्नतम स्तर पर हैं। पिछले दस महीनों में तीन बार वायरल हुए हैं, जिसमें एक बार झालमूढ़ी है, एक बार असम की चाय बगान और एक बार तो चटुआ गिरोह ‘हैलो फ्रेन्स’ की L क्रिंज को W मान कर नाच उठा।
ऐसे में ये सब करना होता है कि जन्मदिन का माह बनाया जाए। पब्लिक फंड से दीये जलाए जाएँ, पूरे सरकारी तंत्र को घुसा कर रंगारंग कार्यक्रम बना कर, ‘नया राम’ बनाया जाए कि अब दीपावली ऐसे मनेगी।
फिर भी, नीतियों में सुधार नहीं। दस महीनों से समाज का एक बड़ा हिस्सा बिलबिला रहा है मोदी एक्ट से, UGC से, आरक्षण पर चर्चा की अनुपस्थिति से, पर महामानव भगवा बंडी और खंजरी निकाल कर स्वयं को कृष्ण और सवर्णों को गोपियाँ बनाने पर तुला हुआ है।
लोग अब बंडी के भीतर के व्यक्ति को पहचान चुके हैं, जिसकी चमड़ी नीली है।
हिन्दुओं के नाम पर फंड एकत्र करने वालों से मेरा एक प्रश्न है: आप में से कितने लोग मेरे ऊपर बार-बार हुए FIR पर वकील की फीस देना तो छोड़ो, कॉल कर के परिस्थिति समझने की भी चेष्टा की?
उत्तर है: शून्य!
पूरी कहानी बताऊँगा कि ये फंड मैनेज कैसे होता है, कौन यह तय करता है कि उसका उचित पात्र कौन है तो बहुत कुछ बिखर जाएगा। इसलिए मुझे न तो राष्ट्रवाद का ज्ञान दो, न मुझे यह बताओ कि किससे हेट करते-करते कौन क्या बन गया है।
तुम सब साले नंगे हो। समाज को ठगना और ब्लैकमेल करना बंद करो। तुमने जब समाज के विषयों को त्याग कर, नेता का अंडकोश पकड़ लिया है, तो फिर तुम ज्ञान देने वाले होते कौन हो?
आप पढ़े लिखे आदमी हैं, सांसद हैं, आपको पता होना चाहिए कि भारत के राजपत्र में नोटिफाई होते ही कोई भी कानून लागू हो जाता है, इसलिए UGC लागू है, लेकिन इस पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अंतरिम रोक लगा रखी है, कृपया झूठ ना बोलिए 🙏
माननीय प्रधानमंत्री जी,
फर्जी केस और तारीख पर तारीख के कारण प्रतिवर्ष 02 लाख अकाल मौत होती है।
झूठी शिकायत, झूठी FIR, झूठी जांच, झूठी गवाही और झूठा हलफनामा को गंभीर अपराध घोषित करने तथा 10 वर्ष की सजा और 10 लाख जुर्माना के लिए कानून कब बनेगा?
@narendramodi@AmitShah
देश की वैज्ञानिक क्षमता को बर्बाद करने के लिए 2022 में मोदी ने साइंटिफिक और तकनीकी क्षेत्रों में आरक्षण की व्यवस्था बनाई। किसी से पूछा नहीं, चुपके से लागू किया जैसा कि इस समाजविभाजक प्रधानमंत्री ने अपने भीम प्रेम में पहले भी किया है।
यह व्यक्ति यही कार्य प्राइवेट क्षेत्रों में भी आरक्षण के लिए 2028 के बजट सत्र में या उससे पूर्व ग्रुप डी से आरंभ करेगा। जबकि सत्य यह है कि जिसके लिए यह इतना झुक रहा है, वो इसे कहीं नहीं वोट करते।
@narendramodi इसी कारण 2047 का लक्ष्य रखा है कि तब किसको याद रहेगा?
एक ही दिल है मोदी जी! पत्नी केस करे मोदी एक्ट का, पति गवाही दे दे, दलाल बात करे और प्रति केस ₹2.5 लाख की कमाई!
ओ हो हो हो, ओ हो हो हो, ओ हो हो, हो हो
इक्स तेरा तड़पाबे…