छिंदवाड़ा के कद्दावर नेता नकुल नाथ ने ट्वीट किया है, प्रदेश के ऊर्जावान अध्यक्ष श्री जीतू पटवारी जी का स्वागत है।
जीतू पटवारी देख रहे है, सीख रहे है, वो पंजाब जैसे गलती मध्य प्रदेश में दोहराना नहीं चाहेंगे।
एक मध्य प्रदेश - एक कांग्रेस।
जब राहुल गांधी इरफ़ान से मिलने उसके घर गए तो वहाँ लल्लनटॉप के रिपोर्टर रजत भी मौजूद थे, जाहिर तौर पर राहुल की सिक्योरिटी टीम रजत को कमरे के बाहर रोक रही थी क्योंकि राहुल को इरफ़ान से कमरे के अंदर मिलना था, वहाँ इरफ़ान के घर के लोग और राहुल की टीम को होना था लेकिन इरफ़ान अड़ गया कि रजत भी अंदर आएँगे और रजत को अंदर बुला भी लिया गया।
दरअसल एक ग़रीब आदमी जिसे कल तक कोई नहीं जानता था, उसे रजत ने दुनिया के सामने लाया, इरफ़ान कोई चालाक या धूर्त आदमी नहीं है जो किसी के एहसान भूल जाए, उसने कहा कि रजत के बिना मैं अधूरा हूँ।
देश के अधिकतर ग़रीब लोग ऐसे ही होते हैं, जिसे अपना मान लिया, कुछ भी हो जाए उसका साथ नहीं छोड़ते।
गांधी जी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचार हैं। आज के इस दौर में, जहाँ चारों ओर तनाव और संघर्ष है, उनकी अहिंसा की सीख पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है।
Mohammed Irfan’s interview is all over. I first heard it a few days back, and it was hard to find sleep that night. In a follow up video, Rajat went to his ‘house’. Irfan says:
“Aap aa rahe hain, koi mehek na aaye kisi tarah ki isliye itr ki ek sheeshi chidak di thi…”
मिलिए उस मोहम्मद इरफ़ान से, जो जंतर-मंतर के उस वायरल वीडियो से पूरे देश में पहचाना जा रहा है, जिसमें वह संविधान की प्रस्तावना को जिस आत्मविश्वास, लय और भाव के साथ सुनाता है, वह आसपास खड़े हर व्यक्ति को कुछ पल के लिए ठहरकर सुनने पर मजबूर कर देता है।
एक टूटे-फूटे घर में रहने वाला यह युवा लोकतांत्रिक मूल्यों को केवल पढ़ता नहीं, बल्कि उन्हें अपने जीवन में जीने की कोशिश करता है। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उसने अपने सपनों का साथ नहीं छोड़ा है।
इरफ़ान को केवल उसकी प्रतिभा के अनुरूप सही अवसर, उचित मार्गदर्शन और मंच मिलने की देर है। उसके भीतर सीखने की भूख, बोलने की क्षमता और आगे बढ़ने का जज़्बा है। यक़ीन मानिए, एक बार उसे अवसर मिल गया तो वह अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर अपनी मंज़िल खुद बना लेगा।
देश की असली ताकत ऐसे ही युवाओं में छिपी है। ज़रूरत सिर्फ़ उन्हें पहचानने, उन पर भरोसा करने और उनका हाथ थामने की है।
मिलिए उस मोहम्मद इरफ़ान से जो अपने जंतर मंतर के उस video से viral हो रहा है, जिसमे वह संविधान की प्रस्तावना को जिस लय में सुना रहा है, वो आसपास वालों को बांध लेती है l
एक टूटे हुए से घर में लोकतांत्रिक मूल्यों को हृदय से लगाकर रखने वाला इरफ़ान संघर्ष कर रहा है l इरफ़ान को बस उसकी प्रतिभा के अनुरूप सही अवसर मिलने की देर है , उसके बाद वह अपना रास्ता बना लेगा l
21 मिनिटांचा हा व्हिडिओ वेळ काढून नक्की बघा.
इरफान फक्त अंगणवाडीपर्यंत शिकला. त्यानंतरचं त्याचं विद्यापीठ म्हणजे Google, YouTube आणि स्वतःची जिज्ञासा.
त्याच्या बोलण्यातला अभ्यास, समाज-राजकारणाची समज, भाषेवरची पकड आणि कष्टकरी माणसांविषयीची संवेदनशीलता पाहिली की एक गोष्ट स्पष्ट होते—प्रतिभेला महागड्या पदवीची गरज नसते; संधीची गरज असते.
आणि लल्लनटॉपचा पत्रकार रजत पांडे… त्याने घेतलेली ही मुलाखत म्हणजे केवळ प्रश्नोत्तर नाही, तर एका दुर्लक्षित भारताला आवाज देण्याचा प्रयत्न आहे.
देशाच्या झोपडपट्ट्यांमध्ये, छोट्या गावांत आणि दुर्लक्षित वस्त्यांमध्ये असे कितीतरी इरफान आजही आहेत. प्रश्न त्यांच्या क्षमतेचा नाही, तर त्यांना व्यासपीठ मिळतं का याचा आहे.
I have been watching this man's videos, I am so glad he was at the protest and added his voice. He may not have much but he is more educated than our P M. Breaks my heart these people not only deal with poverty but also discrimination. Being born poor in India is a crime. 💔💔💔