यूपी बस्ती जिले के 5 दोस्त,
एकसाथ यूपी पुलिस में कांस्टेबल बने है
1.अंकेश सत्यम दुबे 2.आदर्श द्विवेदी 3.दीपक दुबे
4.आदित्यनाथ दुबे 5.रोहित प्रजापति
सभी को बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं। 🚩
@dvvnlhq@UPPCLLKO आपने बस पता पूछा अभी तक कुछ भी नही हुआ पता नही कब बिजली बनेगी , पुरा गाँव पानी और बिजल��� कि किल्लत से कई दिन से झुझ रहा है पता नहीं आप कुछ करेंगे या नहीं
हमारे गाँव निवाइच, जिला बांदा में आँधी के कारण कई बिजली के खंभे उखड़ गए हैं। पिछले 5 दिनों से बिजली और पानी की समस्या है। कृपया शीघ्र समाधान करें।
@UPPCLLKO@UPGovt
#राज_ठाकरे का सारा ज़ोर हिंदुओ पर ही चलता है।
जिहादियों को टच करने की इस व्यक्ति के अन्दर
हिम्मत नहीं है। बोलते तो वो भी नहीं है मराठी।
#RajThackeray तो ख़ुद शून्य (0) है, हिम्मत है तो
#Bollywood में मराठी ला के दिखा। निहत्तों पर
अत्याचार करने वाला बहादुर नहीं होता।
जब कोई धर्म, जाती या भाषा के आधार पर किसी को म|रता हैं जान से म|रता है तो आतंकवादि हैं
जैसे राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे इन गरीब हिंदू को मरता हैं ताकत हैं तो अंबानी को कहो मारो की हिंदी में बात मत करो मराठी बोलो |
बड़ा दुःख हो रहा है की मै भारत की हु, जहाँ सिर्फ घटिया से घटिया लोग रहते हैं कभी जात के नाम पर कभी भाषा के नाम पर, कभी किसी और नाम पर, 4000+ से ज्यादा भाषा हैं और हर कोई अगर अपनी भाषा को लेकर दूसरे को मरने लगे तो
बड़ा दुःख हो रहा है की मै भारत की हु, जहाँ सिर्फ घटिया से घटिया लोग रहते हैं कभी जात के नाम पर कभी भाषा के नाम पर, कभी किसी और नाम पर, 4000+ से ज्यादा भाषा हैं और हर कोई अगर अपनी भाषा को लेकर दूसरे को मरने लगे तो
बड़ा दुःख हो रहा है की मै भारत की हु, जहाँ सिर्फ घटिया से घटिया लोग रहते हैं कभी जात के नाम पर कभी भाषा के नाम पर, कभी किसी और नाम पर, 4000+ से ज्यादा भाषा हैं और हर कोई अगर अपनी भाषा को लेकर दूसरे को मरने लगे तो
बड़ा दुःख हो रहा है की मै भारत की हु, जहाँ सिर्फ घटिया से घटिया लोग रहते हैं कभी जात के नाम पर कभी भाषा के नाम पर, कभी किसी और नाम पर, 4000+ से ज्यादा भाषा हैं और हर कोई अगर अपनी भाषा को लेकर दूसरे को मरने लगे तो
बड़ा दुःख हो रहा है की मै भारत की हु, जहाँ सिर्फ घटिया से घटिया लोग रहते हैं कभी जात के नाम पर कभी भाषा के नाम पर, कभी किसी और नाम पर, 4000+ से ज्यादा भाषा हैं और हर कोई अगर अपनी भाषा को लेकर दूसरे को मरने लगे तो
बड़ा दुःख हो रहा है की मै भारत की हु, जहाँ सिर्फ घटिया से घटिया लोग रहते हैं कभी जात के नाम पर कभी भाषा के नाम पर, कभी किसी और नाम पर, 4000+ से ज्यादा भाषा हैं और हर कोई अगर अपनी भाषा को लेकर दूसरे को मरने लगे तो
बड़ा दुःख हो रहा है की मै भारत की हु, जहाँ सिर्फ घटिया से घटिया लोग रहते हैं कभी जात के नाम पर कभी भाषा के नाम पर, कभी किसी और नाम पर, 4000+ से ज्यादा भाषा हैं और हर कोई अगर अपनी भाषा को लेकर दूसरे को मरने लगे तो
बड़ा दुःख हो रहा है की मै भारत की हु, जहाँ सिर्फ घटिया से घटिया लोग रहते हैं कभी जात के नाम पर कभी भाषा के नाम पर, कभी किसी और नाम पर, 4000+ से ज्यादा भाषा हैं और हर कोई अगर अपनी भाषा को लेकर दूसरे को मरने लगे तो