बिहार के शिक्षकों के साथ भेदभाव क्यों?
क्या हम सरकार के गोद लिए हुए बच्चे हैं?
जिसे पाल तो रहे हैं, काम भी ले रहे हैं, जिम्मेदारि���ां भी दे रहे हैं… लेकिन बराबरी का सम्मान और अधिकार देने में पीछे हट रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल है—वेतनमान का।
एक ही राज्य में शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी उठाने वाले शिक्षकों के साथ वेतनमान के म���मले में आखिर यह असमानता कब तक?
शिक्षक से अपेक्षा है कि वह पूरी ईमानदारी से पढ़ाए, हर सरकारी दायित्व निभाए, चुनाव से लेकर जनगणना तक जिम्मेदारी उठाए, विभाग के हर आदेश का पालन करे…
लेकिन जब शिक्षक अपने सम्मानजनक वेतनमान की बात करता है, तो उसकी आवाज क्यों अनसुनी कर दी जाती है?
हमें कोई विशेष कृपा नहीं चाहिए।
हमें किसी पर एहसान नहीं चाहिए।
हमें चाहिए तो सिर्फ न्यायपूर्ण वेतनमान।
वेतनमान केवल वेतन की बढ़ोतरी नहीं है।
यह शिक्षक के सम्मान, सामाजिक प्रतिष्ठा और भविष्य का सवाल है।
सरकार से हमारी स्पष्ट मांग है—
शिक्षकों को सातवें वेतनमान के अनुरूप उचित Pay Level दिया जाए और वेतनमान की मांग पर अब स्पष्ट एवं सकारात्मक निर्णय लिया जाए।
हम सरकार के विरोधी नहीं हैं,
लेकिन अपने अधिकार ��ी आवाज उठाने से पीछे भी नहीं हटेंगे।
सरकार सुने, शिक्षक की बात समझे और वेतनमान पर न्याय करे।
क्योंकि—
**“शिक्षक सम्मान चाहता है,
और सम्मान की शुरुआत सम्मानजनक वेतनमान से होती है।”**
वेतनमान चाहिए — सम्मान के साथ, अधिकार के साथ।
#वेतनमान #शिक्षकसम्मान #सातवाँवेतनमान #शिक्षकएकता #BiharTeachers
@Teacher_Point
@Team_BRVAS
@btetctet
@STET_QUALIFIED
@Bihartet19
@BRVAS_Official
@brvas_wc
“शिक्षक की सैलरी बहुत ज्यादा है, 8 घंटे स्कूल में नहीं रहते, 6 घंटे पढ़ाते हैं और छुट्टियाँ भी बहुत हैं…”
😂
भाई साहब, अगर शिक्षक की नौकरी इतनी ही आसान है तो अगली भर्ती में आप भी फॉर्म भर देना… लेकिन पहले उसकी तैयारी करके दिखाना। 😄
शिक्षक बनने के लिए सालों पढ़ाई करनी पड़ती है, प्रतियोगी पर��क्षाओं की तैयारी करनी पड़ती है, चयन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है और नौकरी लगने के बाद भी पढ़ाई खत्म नहीं होती।
और स्कूल के उन “6 घंटों” में सिर्फ किताब खोलकर पढ़ाना नहीं होता—
बच्चों को पढ़ाना, उनकी कॉपियाँ जाँचना, परीक्षा और मूल्यांकन, रिकॉर्ड तैयार करना, ऑनलाइन काम, सरकारी योजनाओं की जिम्मेदारी, विभागीय रिपोर्ट, मीटिंग, प्रशिक्षण, अभिभावकों से संपर्क, स्कूल की गतिविधियाँ और न जाने कितने ���से काम होते हैं ��ो बाहर से दिखाई ही नहीं देते।
मजेदार बात ये है कि जब बच्चे अच्छे नंबर लाएँ तो श्रेय ट्यूशन को, बच्चे बिगड़ें तो जिम्मेदारी शिक्षक की, सरकारी स्कूल में बच्चा पढ़े तो शिक्षक कम काम करता है और निजी स्कूल में फीस जाए तो शिक्षा शानदार! 😂
रविवार और सरकारी छुट्टियाँ शिक्षक ने अपने घर से घोषित नहीं की हैं।
जिस व्यवस्था में बाकी कर्मचारियों को अवकाश मिलता है, उसी व्यवस्था में शिक्षक भी कर्मचारी है��
और हाँ…
शिक्षक की सैलरी देखकर हिसाब लगाने से पहले शिक्षक बनने की कीमत—मेहनत, योग्यता, परीक्षा, जिम्मेदारी और मानसिक दबाव—का भी हिसाब लगा लीजिए।
क्योंकि बाहर से देखने पर हर नौकरी आसान लगती है,
मुश्किल तब समझ आती है जब खुद जिम्मेदारी उठानी पड़ती है। 🙏
और अगर फिर भी लगता है कि शिक्षक की नौकरी “बहुत आराम की” है…
तो अगली भर्ती में स्वागत है।
कुर्सी वही होगी, छुट्टियाँ वही होंगी… बस जिम्मेद���री भी आपकी है
सवाल:-
आज की शिक्ष�� व्यवस्था और शिक्षक कार्य के बारे में आपके क्या विचार है
मुझे लगता है #राष्ट्रनिर्माणऔरबच्चोंकेभविष्य को संवारने वाले #शिक्षकों को भी उनके सेवाकाल और काम के अनुरूप उचित #वेतनमान मिलनी चाहिए।जिस तरह आपने स्वास्थ्य क्षेत्र के योगदान को सम्मान दिया है,उम्मीद कि शिक्षा विभाग भी शिक्षकों के हित में ऐसा ही न्यायसंगत निर्णय जल्द करे। #7thPay
मुझे लगता है #राष्ट्रनिर्माणऔरबच्चोंकेभविष्य को संवारने वाले #शिक्षकों को भी उनके सेवाकाल और काम के अनुरूप उचित #वेतनमान मिलनी चाहिए।जिस तरह आपने स्वास्थ्य क्षेत्र के योगदान को सम्मान दिया है,उम्मीद कि शिक्षा विभाग भी शिक्षकों के हित में ऐसा ही न्या���संगत निर्णय जल्द करे। #7thPay
राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पतालों में संविदा पर कार्यरत प्राध्यापक, सह-प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक, सीनियर रेजिडेंट/ट्यूटर एवं जूनियर रेजिडेंट के मानदेय में बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने वृद्��ि का निर्णय लिया है।
अब प्राध्यापक को ₹2.07 लाख, सह-प्राध्यापक को ₹1.55 लाख, सहायक प्राध्यापक को ₹1.25 लाख, सीनियर रेजिडेंट/ट्यूटर को ₹1.15 लाख और जूनियर रेजिडेंट को ₹75 हजार प्रतिमाह मानदेय मिलेगा।
संशोधित मानदेय 1 सितंबर 2026 से प्रभावी होगा।
हमारे चिकित्सा शिक्षक और रेजिडेंट डॉक्टर स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ चिकित्सा शिक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके योगदान को सम्मान ���र प्रोत्साहन देना हमारी प्राथमिकता है।
राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पतालों में संविदा पर कार्यरत प्राध्यापक, सह-प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक, सीनियर रेजिडेंट/ट्यूटर एवं जूनियर रेजिडेंट के मानदेय में बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने वृद्धि का निर्णय लिया है।
अब प्राध्यापक को ₹2.07 लाख, सह-प्राध्यापक को ₹1.55 लाख, सहायक प्राध्यापक को ₹1.25 लाख, सीनियर रेजिडेंट/ट्यूटर को ₹1.15 लाख और जूनियर रेजिडेंट को ₹75 हजार प्रतिमाह मानदेय मिलेगा।
संशोधित मानदेय 1 सितंबर 2026 से प्रभावी होगा।
हमारे चिकित्सा शिक्षक और रेजिडेंट डॉक्टर स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ चिकित्सा शिक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके योगदान को सम्मान और प्रोत्साहन देना हमारी प्राथमिकता है।
मैं @BiharEducation_ के शिक्षा मंत्री @mkrtiwari_bjp से निवेदन करना चाहता हूं कि BRC स्तर पर लगभग सभी कर्मी का स्थानांतरण हो गया है लेकिन मुख्य रूप से अकाउंटेंट का ट्रांसफर होना बहुत ही आवश्यक है
सभी अकाउंटेंट ��तना अहंकार से पुष्ट हो चुका है एक प्रखंड में जमकर कि उन्हें शिक्षक के मान मर्यादा से कोई मतलब ही नहीं है
सभी शिक्षक से तुम ताम में बात करना उनका संस्कार बन चुका है
ऐसे में उनका स्थानांतरण होना बहुत ही आवश्यक है।।
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित दोनों महिला शिक्षकों श्रीमती पुष्पा प्रसाद और श्रीमती खुशबू कुमारी को मंगलवार को माननीय शिक्षा मंत्री श्री मिथिलेश तिवारी जी ने विकास भवन स्थित कार्यालय कक्ष में सम्मानित किया।#BiharEducationDept
समान कार्य, समान सम्मान; शिक्षकों का हक है ये 7वां वेतनमान!"
ये कोई भीख नहीं है,न है कोई अनुचित मांग, केवल अपने सम्मान की हो ��ही हाहाकार!
#biharteacher7thpay
#BiharTeachersNeed7thPay
समान कार्य, समान सम्मान; शिक्षकों का हक है ये 7वां वेतनमान!"
ये कोई भीख नहीं है,न है कोई अनुचित मांग, केवल अपने सम्मान की हो रही हाहाकार!
#biharteacher7thpay#BiharTeachersNeed7thPay
आज शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों के साथ विभागीय योजना��ं के क्रियान्वयन की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। योजनाओं की प्रगति का जायजा लेते हुए समयबद्ध एवं प्रभावी संचालन हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
हमारा संकल्प—बिहार के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों तक हर योजना का लाभ समय पर पहुंचे।
"शिक्षक एक हो चुके हैं,मांग एक हो चुकी है,
अब संगठनों की एकता की बारी है।"यह समय आपसी मतभेद, व्यक्तिगत एजेंडे या अलग-अलग दिशाओं में प्रयास करने का नहीं है। यह समय एक मंच पर आने का है, एक रणनीति बनाने का है और एक मांग को मजबूती से आगे बढ़ाने का है।
#BiharTeachersNeed7thPay#BRVAS