आप नफ़रत, या बग़ावत की एक अंधेर लिये बैठे हैं।
और हम आपके लिये एक शे'र लिये बैठे हैं।।
अज़ अजल ता अबद, दुनिया है, चलेगी यूँ ही!
आप क्यों बेवज़ह की फेर लिये बैठे हैं??
तूफान से लड़ते हुए बुझते दियों को देख!
सतरें बहुत पढ़ीं, अब ज़रा हाशियों को देख!!
कठपुतलियों के खेल से थोड़ी नज़र हटा!
धागे बँधें हैं जिनमें, तू उन उँगलियों को देख!!
जब राम कहा था अयोध्या में,
सरयू का पानी लाल हुआ।
मुंगेर में जय दुर्गा कहना
दुर्गा - भक्तों का काल हुआ।।
आखिर हम कब ये सोचेंगे,
हममें आखिर वह क्या है कमी।
जिस कारण हम जीते हैं ले,
सीने में जलन, आंखों में नमी।।
चलो समर्थ रामदासों! कुछ
वीर शिवाजी फिर गढ़ डालो!
चाणक्यों! फिर करो प्रतिज्ञा!
अपनी बँधी शिखायें खोलो!!
जनमेजयों! करो आयोजन
फिर से क्रमिक नागसत्रों की!
खींच-खींच करके सर्पों को
हवन कुण्ड तक लाना होगा।।
#संतों_हमें_विराथू_दो#भय_बिनु_होई_न_प्रीत
@Mintu_M83 मैंने कहाँ रीट्वीट किया एक ही ट्वीट?
और कोई मेरे ट्वीट रीट्वीट करता है तो उसका हाथ तो मैं पकड़ नहीं सकता कि ना भाई, न कर रीट्वीट।
तो,
तो तो तो..
#न_भूलेंगे_न_माफ_करेंगे
हम यह शपथ उठाते हैं।
बिना लिये प्रतिशोध मरें जो,
मुक्ति नहीं वे पाते हैं।।
एक बूँद भी रक्त शेष है,
जब तक नश्वर काया में।
प्रतिकारों का यज्ञ चलेगा,
इस भगवा की छाया में।।
#भगवा_तो_लहराएगा
इसी रंग ने अंतरमन से
पाला हाड़ी रानी को।
इसने सींचा छत्रसाल के
तलवारों के पानी को।।
इसी रंग ने ऊर्जा दी थी
राजसिंह से वीरों को।
इसी रंग ने अमर कर दिया
कितने हठी हम्मीरों को।।
#भगवा_तो_लहराएगा