अलविदा...
मैं अब भी नहीं समझ पा रही, जाना है या रुकना है।
रुकने में भी तकलीफ़ है, और जाने में भी कहाँ सुकून है।
दिल कहता है, थोड़ा और ठहर जाऊँ...
शायद कुछ बदल जाए
पर जब पता है कि एक दिन जाना ही पड़ेगा, तो शायद आज ही चले जाना बेहतर है।
कुछ रिश्ते ख़त्म नहीं होते, बस उन्हें छोड़ना पड़ता है।
अलविदा...
तुमसे नहीं, उस उम्मीद से जो हमें रोकती रही