आज लखनऊ में अपने कैंट विधानसभा क्षेत्र के "करेहटा" में प्रिय स्नेहीजनों के साथ "जनसंवाद" करते हुए।
इस अवसर पर श्री सुमित शर्मा जी, श्री संतोष वर्मा जी, श्री रामगोपाल गौतम जी, पंडित सच्चिदानंद द्विवेदी जी एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।
@BJP4India@BJP4UP
यूपी की योगी आदित्यनाथ एवं संदीप लोधी की रहनुमाई वाली सरकार का बेसिक शिक्षा विभाग उजड़ रहा है ,
आज ये दिन देखने पद रहे हैं कि स्कूल बंद हो रहे हैं बच्चे दर ब दर हो रहे हैं ,
शराब के ठेके बढ़ रहे हैं पर विद्यालय बंद हो रहे हैं ..
#मधुशाला_नहीं_पाठशाला_दो
https://t.co/cc75S16Mi7
"ये यूपी की राजधानी लखनऊ का एक प्राथमिक विद्यालय है।"
किसी भी प्राइवेट स्कूल की स्थिति ऐसी हो सकती है, क्या?
फ़िर कहते हैं, सरकारी स्कूलों में नामांकन क्यों घट रहा है!
#मधुशाला_नहीं_पाठशाला_दो https://t.co/APDSzvFPcR
बिना संवाद, बिना विचार,
कर दिया गया शिक्षा पर प्रहार।
छोटा स्कूल था गाँव की शान,
अब बच्चों को तय करनी है,
जान की जान।
कहाँ जाएँ वो मासूम चेहरे?
बस पकड़ें या पैदल फेरे?
पेयरिंग नहीं, यह विघटन है
भविष्य की नींव में दरारन है
#JusticeForSchoolChildren@UPGovt@CMOfficeUP@PMOIndia
बिना संवाद, बिना विचार,
कर दिया गया शिक्षा पर प्रहार।
छोटा स्कूल था गाँव की शान,
अब बच्चों को तय करनी है,
जान की जान।
कहाँ जाएँ वो मासूम चेहरे?
बस पकड़ें या पैदल फेरे?
पेयरिंग नहीं, यह विघटन है
भविष्य की नींव में दरारन है
#JusticeForSchoolChildren@UPGovt@CMOfficeUP@PMOIndia
इतिहास के पन्नो में दर्ज होगा कि जब हम शिक्षक थे उसी साल ग्रामीण बच्चो को शिक्षा से वंचित किया जा रहा था
विरोध करते है बच्चो के अधिकार के हनन का🎯
इस बच्ची की भी सुने,मर्जर बन्द करे
#JusticeForSchoolsChildren
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राज्य के 27,965 प्राथमिक विद्यालयों को मर्ज करने का निर्णय न सिर्फ शिक्षा विरो��ी है, बल्कि यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 21A, शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act 2009) और नीति-निर्देशक तत्वों के अनुच्छेद 46, सामाजिक न्याय की मूल भावना का स्पष्ट अवहेलना है।
सरकार की इस नीति से 1,40,000 शिक्षकों, 56,000 शिक्षा मित्रों और 56,000 रसोइयों के पद अप्रासंगिक हो जाएंगे।
यह केवल शिक्षा नहीं, लाखों परिवारों की आजीविका पर सीधा प्रहार है।
इस फैसले से सबसे बड़ा नुकसान गाँवों के बच्चों, विशेषकर दलित, आदिवासी, पिछड़े और गरीब तबकों को होगा। जिन स्कूलों को "छोटा" कहकर बंद किया जा रहा है, वे ही ��ाँवों के बच्चों के लिए आत्मविश्वास, सामुदायिक जुड़ाव और जीवन की बुनियादी पहचान हैं।
जब सरकार कहती है कि "नजदीकी विद्यालय में मर्जर होगा", तो इसका अर्थ यह होता है कि अब बच्चों को 3 से 5 किलोमीटर दूर तक जाना पड़ेगा। इसका सीधा असर यह होगा कि स्कूल ड्रॉपआउट दर बढ़ेगी, विशेष रूप से बेटियाँ बड़ी संख्या में स्कूल छोड़ने को मजबूर होंगी। इसके परिणामस्वरूप बाल श्रम और बाल विवाह जैसी कुप्रथाएँ फिर से सिर उठाएँगी, और बच्चों की शिक्षा की निरंतरता टूट जाएगी।
अनुच्छेद 21A सभी बच्चों को 6 से 14 वर्ष की आयु में नि:शुल्क व अनिवार्य शिक्षा का अधिकार देता है, जिसे RTE Act 2009 की धारा 6 में स्पष्ट किया गया है कि हर बस्ती के पास स्कूल होना राज्य की जिम्मेदारी है।
इसके साथ ही, अन���च्छेद 46 राज्य को निर्देश देता है कि वह शिक्षा और आर्थिक हितों में अनुसूचित जातियों, जनजातियों और समाज के कमजोर वर्गों का विशेष संरक्षण करें परन्तु यह मर्जर नीति तो उन्हें और अधिक हाशिए पर धकेलने वाली साबित होगी।
मैं मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी से कहना चाहता हूँ कि स्कूल बंद नहीं हो रहे, बच्चों का भविष्य बंद किया जा रहा है। याद रखिए मुख्यमंत्री जी, स्कूल दूर तो ब���टियाँ मजबूर!
हम @UPGovt से माँग करते हैं:
1. इस मर्जर नीति को तत्काल प्रभाव से रोका जाए।
2. हर गाँव में संविधान व RTE Act के अनुसार स्थानीय स्कूल की गारंटी दी जाए।
3.शिक्षा में निजीकरण और केंद्रीकरण के बजाय जन-भागीदारी और विकेंद्रीकरण को बढ़ावा दिया जाए।
"शिक्षा कोई spreadsheet नहीं, यह जीवन का पहला अधिकार है।*
*जिसे मर्ज नहीं किया जा सकता — और न संविधान को मूक दर्शक बनाया जा सकता है।"
#SaveVillageSchools