भोपाल-
मंत्रालय में 85% प्रोमोशन SC/ST वर्ग से हुए हैं!
मंत्रालय में कार्यरत 15 अंडर सेक्रेटरी में से 14 SC/ST हैं!
सच्चाई दरअसल ये है, लेकिन तब भी कम प्रतिनिधित्व और भेदभाव का नैरेटिव चल रहा है!👇
कुछ ज़ख्म शरीर पर नहीं, भविष्य पर लगते हैं।
कुछ दर्द शब्दों में नहीं समाते, बस आँखों से बह निकलते हैं।
please listen- लाखों सपनों की चीख है, टूटते हुए सपनों की गवाही है,एक पीढ़ी की पीड़ा है।
दलित पिछड़ों का शोषण उन्ही के समाज के लोग कर रहे है,
जो एक बार आरक्षित कोटे से प्रधान, विधायक, सांसद बन गया वही हर बार प्रधान, विधायक, सांसद बन रहा है,
तो बताइये शोषण ‘सवर्णों’ ने कैसे कर लिया ?
भरत तिवारी एनकाउंटर के बाद अब उनके घर पहुंचे खेसारी लाल यादव।
खेसारी लाल यादव ने मांगा परिवार के लिए न्याय। भरत तिवारी के न्याय के लिए आवाज उठाते रहें…..!
जीतन राम माँझी जैसे जितने भी लोग भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर का समर्थन कर रहे हैं वो सिर्फ़ मेरे 5 सवालों का जवाब दे दें मैं मुँह में टेप लगा लूंगा:-
- पहला क्या भरत भूषण तिवारी हिस्ट्रीशीटर थे? उन पर हत्या/लूट के केस दर्ज थे?
- दूसरा क्या भरत तिवारी ने किसी पुलिस वाले को गोली मारी, जिससे पुलिसकर्मी घायल हुआ हो?
- तीसरा सवाल क्या भरत भूषण तिवारी ने पिस्टल फेक कर सरेंडर नहीं किया था?
- चौथा सवाल क्या CM और पुलिस प्रशासन ने ये नहीं बताया था कि वो मानसिक विक्षिप्त है
- पांचवा सवाल 80 साल के बुजुर्ग क्या केंद्रीय मंत्री हो तुम जब तुम्हें ये नहीं पता कि कानून-नियम-संविधान क्या है? एनकाउंटर सरेंडर के बाद नहीं किया जाता
आदरणीय माझी जी, आप प्रतिनिधि हैं.. तथाकथित चुने हुए। ऊपर से सरकार में हैं, और इसमें नया कुछ नहीं, आप हमेशा सरकार में हीं रहते हैं।
पुरा कुनबा दिल्ली में मोज काट रहा, चानी काट रहा.
मगर मांझी जी, इतना तो ज्ञात होगा कि जिसे आप शाबासी दे रहें हैं, उन्हें ससपेंड किया जा चुका है।
फिर या तो आप गलत शाबासी दे रहें हैं या फिर ससपेंशन गलत है.
क्योंकि काम बहादुरी का होता तो अवार्ड मिलता, रिवॉर्ड मिलता, कैश मिलता, ये ससपेंशन ना मिलता ..
दरअसल माझी जी आप जैसे लोग वोट पगलू होते हैं, आपको लगा कि तिवारी है तो उसके मरने पर मैं भी खुश हो जाऊँगा तो हमारे वोटर भी खुश हो जाएंगे।
यहीं बात है न मांझी जी. अब पूछियेगा शाहपुर के विधायक राकेश ओझा जी से, सर का पसीना किस दर्रे से होकर गुजर रहा इस भीषण गरमी में..
धिक्कार है आप जैसे जनप्रतिनिधियों को चुनने वाले जनता पर.
भरत तिवारी का वीडियो है जिसमें वह जवानियां गांव के लोगों के लिए आवाज उठा रहा है।बिहार पुलिस ये बताए कि ये कहा से पागल दिख रहा है?पहनावे से पागल दिख रहा है या बोलने की शैली से पागल दिख रहा है?
बिहार पुलिस को बिनाकोई साक्ष्य के किसी को पागलघोषित करके काउंटर करने का अधिकारकिसनेदिया?
इस घटना के बारे में कोई मीडिया कवरेज नहीं, कोई हो हल्ला नहीं???
अगर आरोपी सवर्ण होता तो human rights से UN तक, सब जगह से रिपोर्ट आ गयी होती कि कैसे भारत में जातिवाद की वजह से हत्याएं होती हैं!!!
है कि नहीं??
ये भरत भूषण तिवारी हैं। कोविड के समय पूरे क्षेत्र में समाजसेवा किया।
अभी इनका एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें ये अपने गांव में सुधार के लिए पुलिस पर ही बन्दूक तान दिए थे। ये पूर्णतः ग़लत था। पुलिस के द्वारा घेरे जाने पर इन्होंने बंदूक फेकने आत्मसमर्पण कर दिया।
पुलिस प्रशासन और CM का स्टेटमेंट आया कि ये मानसिक विक्षिप्त थे। इनका इलाज करवाया जाएगा। लेकिन आज खबर मिली कि कल इनका एनकाउंटर किया गया जिसमें 4 गोली लगी और आज इनकी मौत हो गई।
इस पर TV मीडिया चुप है। नेता मौन है। गरीब परिवार का रो रोकर बुरा हाल है।
भरत भूषण तिवारी कोई बड़ा अपराधी नहीं थे , हिस्ट्रीशीटर नहीं थे फिर भी इनका एनकाउंटर कर दिया गया। आज उनकी मौत हो गई।
पुलिस ने ख़ुद उनको मानसिक विक्षिप्त बताया, भारत तिवारी ने सरेंडर कर दिया था, फिर भी उन्हें 4 गोली मार दी गई……क्यों? आख़िर क्यों?
किसी बाप के बुढ़ापे की लाठी छीन लिए, किसी माँ के जिगर का टुकड़ा उससे अलग कर दिया। किसने हक दिया तुम्हें? कौन हो तुम? भगवान हो?
मीडिया को चुप करा देना, पत्रकारों के मुँह ठूँस देना, लेकिन इस ग़रीब के एनकाउंटर को अब पूरा देश जानेगा।
पूरी मशीनरी लगा दो लेकिन नहीं दबा पाओगे इस केस को। मामला बिहार के भोजपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र का।