बड़ी बड़ी आयु की लड़कियाँ घर में कुंवारी बैठी हैं, यदि अभी भी माँ-बाप नहीं जागे तो स्थितियाँ और भी विस्फो'टक हो सकती हैं...!
समाज में आज 27-28-32 आयु तक की बहुत सी कुँवारी लडकियाँ घर बैठी हैं क्योंकि इनके सपने हैसियत से भी बहुत अधिक हैं ! अपने चारों ओर दृष्टि डालिए इस प्रकार के अनेक उदाहरण हैं।
ऐसे लोगों के कारण समाज की छवि बहुत खराब हो रही है।
सबसे बडा मानव सुख, सुखी वैवाहिक जीवन होता है।
पैसा भी आवश्यक है, लेकिन कुछ सीमा तक !
पैसे की वजह से अच्छे रिश्ते ठुकराना गलत है। पहली प्राथमिकता सुखी संसार व अच्छा घर-परिवार होना चाहिये!
अधिक धन संपदा के चक्कर में अच्छे रिश्तों को नजर-अंदाज करना गलत है। ध्यान रखें "धन कमाया जा सकता है, संपत्ति खरीदी जा सकती है लेकिन गुण नहीं।"
मेरा मानना है कि घर-परिवार और लडका अच्छा देखें, लेकिन अधिकतम के चक्कर में अच्छे रिश्ते हाथ से न जाने दें।
सुखी वैवाहिक जीवन जियें।
30 की आयु के बाद विवाह विवाह नहीं होता... समझौता होता है और इसके बाद स्वास्थ्य परिस्थितियों की दृष्टि से भी देखा जाए तो बहुत सी समस्याएँ उत्पन्न होने लगती हैं।
समाज में आज उससे भी बुरी स्थिति कुंडली मिलान के कारण हो गई है।
आप सोचिए जिनके साथ कुंडली मिलती है लेकिन घर और लड़का अच्छा नहीं और जहाँ लड़के में सभी गुण हैं वहां कुण्डली नहीं मिलती और हम सब कुछ अच्छा मिलने की आस में मात्र कुण्डली की वजह से रिश्ता छोड़ देते हैं।
आप सोच के देखें कि जिन लोगों के 36 में से 20 या फिर 36/36 गुण भी मिल गए फिर भी उनके जीवन में समस्याएं हो रही हैं, क्योंकि हमने लडके के गुण नहीं देखे...!
कुण्डली मिलान की इस परंपरा ने सभ्य, संस्कारी, शिक्षित और कथित आधुनिक समाज तक को एक सदी और पीछे धकेल दिया ! इस कुंडली मिलान के चक्कर में अच्छे रिश्ते नहीं हो पा रहे हैं।
आजकल समाज में लोग बेटी के रिश्ते के लिए (लड़के में) चौबीस टंच का सोना खरीदने जाते हैं, देखते-देखते चार पांच वर्ष यूं ही व्यतीत हो जाते हैं।
उच्च "शिक्षा" , "जॉब" या "लाईफ सेटल" होने पर विवाह करने के नाम पर भी लोग विवाह योग्य समय को व्यतीत कर देते हैं। लड़के देखने का अंदाज भी समय व्यतीत होने का अनोखा उदाहरण हो गया है?
स्वयं का मकान है कि नहीं ?
अगर है तो फर्नीचर कैसा है ?
घर में कमरे कितने हैं ?
गाडी है कि नहीं ?
है तो कौन सी है ?
खेती की जमीन है कि नहीं..?
है तो कितनी है..?
लड़का शहर में रहेगा या गांव में..?
रहन-सहन, खान-पान कैसा है ?
कितने भाई-बहन हैं ?
बंटवारे में माँ-बाप किनके गले पड़ने हैं या पड़े हैं ?
बहन कितनी हैं, उनकी शादी हुई है कि नहीं ?
माँ-बाप का स्वभाव कैसा है ?
घर वाले, नाते-रिश्तेदार आधुनिक ख्यालात के हैं कि नहीं ?
बच्चे का कद क्या है ?
रंग-रूप कैसा है ?
शिक्षा, कमाई, बैंक बैलेंस कितना है ? लड़का-लड़की सोशल मीडिया पर एक्टिव है कि नहीं ?
उसके कितने दोस्त हैं ?
सब बातों पर पूछताछ पूरी होने के बाद भी कुछ प्रश्न पूछने में और सोशल मीडिया पर वार्तालाप करने में और समय व्यतीत हो जाता है..!
इन्हीं जांच परख और देख भाल के हालातों से गुजरते हुए माँ-बाप की नींद ही खुलती है बच्चों की आयु 30 पार होने के बाद...!
चार-पाँच वर्ष की यह दौड़-धूप बच्चों की जवानी को बर्बाद करने के लिए काफी है। इस वजह से अच्छे रिश्ते हाथ से निकल जाते हैं और माँ-बाप अपने ही बच्चों के सपनों को चूर चूर-चूर कर देते हैं ।
एक समय था जब केवल घर खानदान देख कर रिश्ते होते थे। वो लम्बे भी निभते थे। समधी-समधन में मान मनुहार थी। सुख-दु:ख में साथ था। रिश्ते-नाते की अहमियत का अहसास था।
चाहे धन-माया कम थी पर खुशियाँ घर-आँगन में झलकती थीं। कभी कोई ऊँची-नीची बात हो जाती थी तो आपस में घर परिवार के बड़े-बुजुर्ग संभाल लेते थे। तलाक शब्द रिश्तों में था ही नहीं !
दाम्पत्य जीवन खट्टे-मीठे अनुभव में बीत जाया करता था। दोनों एक-दूसरे के बुढ़ापे की लाठी बनते थे और पोते-पोतियों में संस्कारों के बीज भरते थे।
अब कहां हैं वो संस्कार ?
आँख की शर्म तो इतिहास हो गई। नौबत आ जाती है रिश्तों में समझौता करने की।
लड़का-लड़की अपने समाज के नही होंगे तो भी चलेगा, ऐसी बातें भी सामने आ रही हैं।
आज समाज की लडकियाँ और लड़के खुले आम विजातीय संबंधों की ओर जा रहे हैं और दलील दे रहे हैं कि अपने समाज में अच्छे लड़के या लड़कियाँ मेरे लायक नहीं हैं। कारण है कि पश्चिमी अंधानुकरण में लडकियाँ आधुनिकता की पराकाष्ठा पार कर गई हैं।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि जब ये लड़के-लड़कियाँ अपने मन से अर्थात् विजातीय मैरिज करते हैं तब ये कुंडली मिलान का क्या होता है ?
Courtesy sukhbeer Singh dadwal fb post
कट्टर इस्लामी जिहादी मीडिया अल जजीरा पर अभी ये खबर पढ़ी
इस्लामिक देश मलेशिया पहले फेज में 1500 रोहिंग्या शरणार्थियों को डीपोर्ट कर रहा है
क्योंकि मलेशिया का कहना है यह रोहिंग्या मुस्लिम हमारे देश के लिए खतरा बन चुके हैं
मलेशिया में भारत जैसा सुप्रीम कोर्ट नहीं है वरना वहां के जज लोग भी चाकू छुरी लेकर खड़े हो जाते यह सरकार कौन होती है रोहिंग्या मुसलमानो को देश से निकलने का आदेश देने वाली
प्रशांत भूषण प्रकाश राज राहुल गांधी कपिल सिब्बल आरफा खानम शेरवानी लोग जैसे दोगले उनके लिए आंसू बहने लगते
🚨 रविंद्र पासवान आज आग उगल रहे हैं!
झारखंड सरकार ने हाईकोर्ट में छात्रों के साथ धोखा किया।
“झारखंड सरकार ने लाखों छात्रों को ठगा” “राहुल गांधी ध्यान रखना, तुम्हारा फर्जी लव लेटर एक्सपोज हो गया” “कल हम हेमंत सोरेन का पुतला जलाएंगे सभी 24 जिलों में” “आज एक नई लड़ाई का जन्म हुआ है”
कोई इनके वीडियो शेयर नहीं कर रहा क्योंकि ये सौरव दास जैसी एस्थेटिक्स में फिट नहीं बैठते।
झारखंड के छात्रों की मदद आज कोई नहीं कर रहा… CJP, दीपके, रांका, दास कहाँ हैं अब?
एक मक्कार आदमी ने राजनीतिक दल बनाया और उसमे बहुत सारे ठगों को भर्ती किया।
वही दल आज आम आदमी पार्टी के नाम से जाना जाता है।
एक से बड़ा एक फ्रॉड आदमी इस दल में है।
यह एक ऐसा मंच है जिसने धीरे-धीरे राष्ट्रीय विमर्श को सशक्त बनाने में अच्छा कार्य किया है @Pamphlet_in में #GenZ की भी खूब भागीदारी है और लड़कियों की भी। प्रशंसा कीजिए
🚨 सरकार से वार्ता करने जा रहे डेलिगेशन साथी ध्यान दें 🚨
सरकार 1-2 JPSC में CBI का EXAMPLE देकर CBI से जाँच की बात को DIVERT करना चाहती है .....
लेकिन ध्यान देने की बात ये है...
*1st JPSC का आयोजन - 2003 में हुआ..*
*2nd JPSC का आयोजन - 2005 - 06 में हुआ*
*CBI को जाँच के लिए जून - 2012 ( झारखण्ड में BJP सरकार )*
जाँच के लिए CBI केस दर्ज की *जुलाई - 2012 में ( केंद्र में सरकार कॉंग्रेस की )*
CBI को 7 साल बाद जाँच की जिम्मेवारी मिली..
तब तक काफी *सारे साक्ष्य को मिटा* दिया गया.. *कॉपी को जला* दिया गया.. फिर भी CBI तह तक गयी और आरोपियों को पकड़ निकाली...
CBI अपनी *जाँच रिपोर्ट अक्टूबर - 2024 में सौंप चुकी है* जिसमें *70* से अधिक अधिकारी दोषी पाए गए हैं....
फिर *हेमंत सरकार दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है..?*
सब कुछ जानते हुए CBI पर हीं दोष क्यों मढ़ा जा रहा है..?
जब साक्ष्य को *मिटा* दिया जाएगा तो *CBI हो या CIA..* जाँच करने में समय तो लगेगा हीं ना..!
जब *केंद्र में कॉंग्रेस सरकार* थी तो CBI से *जल्दी जाँच* पूरी कर लेनी चाहिए थी ना...!
वर्तमान में *JMM और कॉंग्रेस* की गठबंधन सरकार है फिर दोषियों पर *कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है...?
ऐसा प्रतीत होता है कि... प्रथम और द्वितीय JPSC के दोषी अधिकारी सारे JMM और कॉंग्रेस के हैं....
तब तो कार्रवाई नहीं हो रही है...* जबकि कार्मिक विभाग मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पास है...
जरा सोचिये कैसे narrative फैलाया जा रहा है...?
#Jharkhand #Ranchi
@JPSCreformanch@kunalpratap86@WeAreRanchi@prakashpoddarjh
कोडरमा में JPSC-JSSC घोटाले के विरोध में छात्रों का आक्रोश फूटा।
झंडा चौक पर पुतला दहन कर छात्रों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके बाद मशाल जुलूस निकालकर भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया।
छात्रों का साफ संदेश—भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा।
तिरंगा फहराने की इच्छा, कमरे के बाहर पुलिस का पहरा
रांची। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 13 दिनों से अनशन पर हैं और सदर अस्पताल में भर्ती हैं। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उन्होंने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में तिरंगा फहराने और तिरंगा यात्रा में शामिल होने की इच्छा जताई। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने उनके कमरे के बाहर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया।
#Ranchi #जेपीएससी #जेएसएससी #Jharkhand
छात्रों का आंदोलन अब जनांदोलन बनता जा रहा है।
आज राँची में आंदोलनरत छात्रों ने शहीद अल्बर्ट एक्का चौक पर छात्र आंदोलन को बदनाम करने और लाठीचार्ज के विरोध में हेमंत सरकार में मंत्री इरफान अंसारी, सुदिव्य सोनू, दीपिका पांडेय, शिल्पी नेहा तिर्की और JSSC के अध्यक्ष सुधीर गुप्ता का पुतला दहन।
पंजाब में 16 मेडिकल कॉलेज चोरी हो गए
जी हां आप यह वीडियो देखिए आपको पता चल जाएगा कि पंजाब में 16 मेडिकल कॉलेज चोरी हो गए
अब आते हैं दो भाजपा शासित राज्यों में उत्तर प्रदेश और गुजरात पर।।।
उत्तर प्रदेश में मात्र 10 सालों में योगी जी ने 42 सरकारी मेडिकल कॉलेज 18 सेमी गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज और दो एम्स बनवाई और मैं प्राइवेट मेडिकल कॉलेज की बात नहीं कर रहा हूं
गुजरात में बीजेपी सरकार ने सूरत और राजकोट में दो नए सरकारी मेडिकल कॉलेज राजकोट में एक एम्स और इसके अलावा 13 सेमी गवर्नमेंट GMERS मेडिकल कॉलेज बनवाये
और इसके अलावा दो म्युनिसिपल कॉरपोरेशन मेडिकल कॉलेज बनवाएं
पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार लगभग 4.5 सालों से है एक भी नया मेडिकल कॉलेज नहीं बना और यह पार्टी शिक्षा के नाम पर सत्ता में आई थी
मूसलाधार बारिश में भी झारखंड के छात्रों का हौसला नहीं टूटा…
आसमान से पानी बरसता रहा, कपड़े भीगते रहे, रास्ते मुश्किल होते रहे… लेकिन अपने हक़ और भविष्य की आवाज़ बुलंद कर रहे झारखंड के छात्रों के कदम नहीं रुके।
किसी के हाथ में छाता था, किसी के पास सिर्फ हौसला…
लेकिन सबके दिल में एक ही उम्मीद थी—न्याय मिलेगा, व्यवस्था सुधरेगी और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होगा।
ये तस्वीर सिर्फ बारिश में बैठे कुछ छात्रों की नहीं है।
ये उस पीढ़ी की तस्वीर है, जो वर्षों की मेहनत, उम्मीद और सपनों को लेकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही है।
मौसम की मार सहकर भी जो अपने हक़ के लिए डटा रहे, उसके जज़्बे को सलाम।
आज बारिश उन्हें भिगो सकती है, लेकिन उनके हौसले को नहीं।
झारखंड के इन युवाओं की आवाज़ को सुना जाना चाहिए, समझा जाना चाहिए और सम्मान दिया जाना चाहिए।
क्योंकि ये सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के लिए भी खड़े हैं।
सलाम है इस जज़्बे को…
सलाम है इस संघर्ष को…
और सलाम है उन सभी छात्रों को, जो विपरीत परिस्थितियों में भी डटे हुए हैं। ✊🌧️
#JharkhandStudents #jpsc #jssc #studentprotest #jharkhandprotest