अच्छा सुनो....
कशमकश में कभी दिखूँ मैं,
तो, मेरे हाथों को कस के थाम लेना....
कभी धूल पड़ जाए उन यदों में,
तो, अपने इश्क़ की हल्की सी फुंक से...
तुम वो धूल हटा देना....
~त्वरिता💫
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आज सवालों के कशमकश में फिर घिर गई हूँ मैं..
सामने मेरे कई सवाल है,
पर आज फिर शून्य हूँ मैं..
सवाल है उन सपनों का
जिनको पुरा करने की ठानी थी..
सवाल है उन आपनों का
जिनसे किए गए वादे निभाने थे..
सालों बित गए इनको पूछे गए?
पर आज भी शून्य हूँ मैं।।
~त्वरिता💫
#poetry#love