सावित्रीचा संघर्ष अजूनही सुरूच आहे..!
जवळपास १८० वर्षांपूर्वी क्रांतीज्योती सावित्रीमाई फुले यांना ज्ञानदानाचा यज्ञ सुरू करण्यासाठी शेणगोळ्यांचा मारा सहन करावा लागला. "सावित्रीबाई जोतीराव फुले" मालिकेच्या माध्यमातून हा संघर्ष घराघरात पोहोचतोय.
दुर्दैवाने त्याकाळी सावित्रीबाईंनी केलेला संघर्ष आजही एका सावित्रीला सहन करावा लागतोय. शेणगोळ्यांची जागा अंड्यांनी घेतली, पण मारा करणारे हात आजही तेच आहेत, सावित्रीला रोखणारी प्रवृत्ती आजही तीच आहे.
पण.. सावित्री तेव्हाही थांबली नव्हती, आजही थांबणार नाही !
Wait For End 🤣🤣
ट्रेन में टिकट मांगने पर मोहतरमा ने अपने कपड़े फाड़ लिए और उल्टा टीटी पर ही छेड़छाड़ का आरोप लगाने लगी
वो तो शुक्र है कि टीटी साहब के दूसरे फोन में थर्ड आई कैमरा चालू था 😄😃
#indianrailways#virelvideo
रामदेव नकली खाद्य पदार्थों के सम्राट हैं. कोई आदमी 2 हजार में घी नहीं बेच सकता है.
रामदेव की गाय कहां पाली गई हैं? काई भी वीडियो बनाकर दिखा दे कि ये रामदेव की गाय हैं.
- बृजभूषण शरण सिंह
Yesterday’s diya campaign was terribly rejected by the people of India. And rightly so!
People need answers on unemployment, job creation, paper leaks, education reforms, food adulteration, petrol adulteration, air pollution, corrupt judges, etc. Not be lighting diyas on a politician’s birthday like megalomaniacs! Not to forget, it was also an insult to Hinduism. No Hindu or any religious devotee of any faith for that matter should offer such sacred diyas and aartis to a human being, only to their god.
In the lust for eternal power, this government and its andhbhakts have attempted to immortalise a mere mortal. In other words, attempted to equate him to god.
March 2026: PM Modi urges Indian to reduce cooking oil consumption
Sep 2026: BJP asks everyone to light up diya for PM Modi's birthday
Masterstroke of madness. 🫡
अगर प्रधानमंत्री मोदी आत्ममुग्धता के हिमालय पर खड़े न होते तो अपने जन्मदिन के मौके पर देश भर में इतना तमाशा नहीं कराते. ख़ुद ही शर्मिंदा होकर कहते ये सब इतना मत करो यार. बीजेपी के शीर्ष नेताओं और मुख्यमंत्रियों को रोकते और कहते कि जन्मदिन पर इतना खर्च और इतना तामझाम करके करोड़ों की बर्बादी मत करो. जनता के लिए जरुरी दूसरी चीजों पर फ़ोकस करो. अपने मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों से कहते कि सरकारी खर्चे पर लाखों-करोड़ों दीए जलाकर इतने आयोजन करके वक्त बर्बाद करो. कहते कि मेरे प्रधानमंत्री रहते मेरे जन्मदिन पर अखबारोंं में इतना विज्ञापन देकर पैसे मत बर्बाद करो. कहते कि बीजेपी शासित राज्यों के स्कूलों के बच्चों और शिक्षकों के लिए इस तरह के फरमान जारी करके मेरा जन्मदिन मनाने को उन्हे मजबूर न करो.
कहते कि तमाम सरकारी विभागों को काम धाम छोड़कर मेरे जन्मदिन की तैयारियों में मत झोकों. सरकारी आदेश जारी करके तमाम महकमों को मेरे नाम के दीये जलाने का टास्क मत दो. कहते कि देश की जनता को अगर मेरा जन्मदिन मनाना होगा तो अपने हिसाब से मना लेगी. पार्टी के कार्यकर्ताओं को कुछ आयोजन करना होगा तो कर लेंगे, लेकिन ये सब इतना तमाशा मत करो, सरकारी खर्चे पर देश भर में भजन आरती, यज्ञ और इतना पूजा पाठ मत करो लेकिन मोदी जी को तो अपने जन्मदिन को राष्ट्रीय उत्सव की तरह मनाना है. पूरे देश से उत्सव मनवाना है. जन्मोत्सव का रिकार्ड बनवाना है तो वो रोकेंगे क्यों ? वरना पीएम मोदी अपने इस मंत्री गिरिराज सिंह को दीप जलाने का नाटक करने से रोकते और कहते कि यार तुम्हारे बिहार में बाढ़ में पचास लाख लोग पीड़ित हैं, कोहराम मचा है और तुम ये सब मेरे नाम पर क्या कर रहे हो ?
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Tax के बदले क्या? UPI वसूली करने वाली सरकार बताए शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं मिल रहीं?
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ये है इनका रामराज... देख लो भाइयों बहनों ये है इनके राज में महिलाओं का सम्मान.. गुंडों, बदमाशों से छोड़िये सत्ता से ही डरी सहमी है महिलाएं..बस बातें संस्कार, महिला सम्मान एवं सुरक्सा की करवा लो...
मात्र एक फेसबुक पोस्ट से ठाकुर इतना उद्वेलित हो गए कि उन्होंने एक निषाद को जान से ही मार डाला
ये दर्शाता है कि यूपी में किस कदर जंगलराज, गुंडाराज जारी है
ये सब सत्ता के संरक्षण का दुष्परिणाम है
समाजवादी पार्टी के नेता कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और सबने मिलकर विनोद साहनी के परिवार के लिए न्याय, मुआवजे और परिवार की मांगों को मानने की आवाज उठाई
तत्काल निलंबन हो, बर्ख़ास्तगी हो और ऐसा दंड मिले कि कोई दूसरा अधिकारी फिर कभी ऐसी हिम्मत और दुस्साहस न कर सके।
‘नारी वंदन’ का ढोंग करनेवाली भाजपा सरकार है भी या नहीं।
और कुछ नहीं कहना है।
दलितों–पिछड़ों से वोट लेते समय भाजपा को उनकी याद रहती है, उनकी सुरक्षा और न्याय के सवाल पर सरकार कहाँ चली जाती है?
उत्तर प्रदेश में कहीं हत्या, कहीं यौन हिंसा, कहीं सामाजिक बहिष्कार। कई मामलों में पुलिस पर भी गंभीर आरोप हैं। गोंडा में विनोद साहनी की हत्या के बाद न्याय माँगने के लिए मंत्री संजय निषाद को अपनी ही सरकार के सामने धरने पर बैठना पड़ा। जिस व्यवस्था में मंत्री की सुनवाई के लिए धरना ज़रूरी हो, वहाँ साधारण नागरिक न्याय तक कैसे पहुँचेगा?
1 अगस्त से 11 सितंबर 2026 के बीच सामने आए ये मामले पढ़िए:
गोंडा — विनोद साहनी/निषाद की हत्या | 9–10 सितंबर
मुजफ्फरनगर — दलित परिवार के सामाजिक बहिष्कार का आरोप | 10 सितंबर की रिपोर्ट
शाहजहांपुर — दलित युवती से यौन उत्पीड़न | 9 सितंबर
हापुड़ — गोलीबारी में घायल दलित युवक दीपक की मौत | 4–5 सितंबर
बदायूं — राजेश कुमार की पुलिस हिरासत के बाद मौत; पिटाई का आरोप | 28–29 अगस्त
फिरोजाबाद — दलित युवती से दुष्कर्म और हत्या का मामला | 26–28 अगस्त
मेरठ — मोहित जाटव और दिग्विजय भाटी से कथित पुलिस मारपीट | 19 अगस्त
मुजफ्फरनगर — दलित किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म का मामला | 18 अगस्त को पुलिस को सूचना
बलरामपुर — दलित युवक राम सनेही की पीटकर हत्या | 11 अगस्त
कौशाम्बी — केसई सरोज के दलित परिवार पर हमले का आरोप | 8 अगस्त
अमेठी — अंकित कश्यप की हत्या | अगस्त का पहला सप्ताह
यह समाचारों में सामने आए मामलों की सूची है; पूरे प्रदेश का कुल आँकड़ा नहीं। हर मामले की परिस्थितियाँ अलग हैं, मगर नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और न्याय दिलाने की सरकारी ज़िम्मेदारी एक है।
योगी सरकार कानून-व्यवस्था के अपने दावों को इन परिवारों के सामने रखकर देखे। सत्ता के मंच से अपनी पीठ थपथपाना आसान है; उस परिवार को जवाब देना कठिन, जिसका अपना मारा गया हो या जिसकी शिकायत अनसुनी रह गई हो।
दलितों–पिछड़ों को पद देकर तस्वीरों में जगह देना पर्याप्त नहीं। बराबरी की असली परीक्षा थाने के दरवाज़े पर होती है - क्या उनकी शिकायत सुनी जाती है, क्या उन्हें सुरक्षा मिलती है, क्या प्रभावशाली आरोपी के विरुद्ध भी कानून चलता है?
जब प्रदेश की सरकार में शामिल कैबिनेट मंत्री ही अपनी पुलिस से न्याय के लिए KGMU के पोस्टमार्टम हाउस के बाहर धरने पर बैठने को मजबूर हों, तो आम जनता की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा?
गोंडा में व्यापारी विनोद साहनी की बेरहमी से हत्या और पुलिस-प्रशासन द्वारा आरोपियों को शह देने के गंभीर आरोप उत्तर प्रदेश में 'जंगलराज' और ध्वस्त हो चुकी कानून-व्यवस्था का खुला प्रमाण हैं।
जब सत्ता के सहयोगी ही पुलिसकर्मियों को बर्खास्त करने की मांग कर रहे हैं, तो साफ है कि 'जीरो टॉलरेंस' का नारा पूरी तरह खोखला हो चुका है।
अराजकता और अपराधी तत्वों को संरक्षण देने वाली यह सरकार जवाब दे- आखिर उत्तर प्रदेश के व्यापारियों और आम नागरिकों की जान की कीमत क्या रह गई है?
यूपी के गोंडा में हुई हत्या का पूरा प्रकरण समझिए:-
कुछ दिन पहले शुभम सिंह ने निषाद समाज और विनोद साहनी के खिलाफ जातिसूचक और अपमानजनक टिप्पणी सोशल मीडिया पर लिखी थी
इस पर विनोद ने इस पोस्ट का विरोध किया और सम्बंधित थाना परसपुर में इसकी लिखित शिकायत भी दी
जिसके बाद भी थाना प्रभारी कमला शंकर चतुर्वेदी और चौकी इंचार्ज अंकित सिंह ने मामले पर आरोपियो के खिलाफ कोई कार्यवाही नही की
पुलिस की इसी लापरवाही के कारण बेखौफ शुभ सिंह, आकाश सिंह, और सुभाष सिंह ने मिलकर बीते बुधवार की रात...
धारदार हथियार और भाले से विनोद साहनी पल हमला कर उसकी हत्या कर दी !!
फिलहाल आरीपियो का न ही हाफ इन्काउंटर हुआ, न मुठभेड मे गोली मारी गई, न तो इनके घर फर बाबा का बल्डोजर पहुचा
बस साधारण तरीके से इनको गिरफ्तार कर जेल भेज दिया !!
भाजपा राज ‘अत्याचार, अन्याय, अहंकार’ का पर्यायवाची बन गया है, जिसके निशाने पर ‘पीडीए’ है।
अगर कहीं कोई भी ‘धर्म-न्याय’ में विश्वास करनेवाला है तो इस क्रूर हत्या का संज्ञान ले अन्यथा पीडीए समाज मिलजुलकर अपनी लड़ाई ख़ुद लड़ लेगा।
भाजपा में ‘निषाद’ को ‘विषाद‘ के सिवा कुछ नहीं मिलेगा।