झाड़ू मटकी का या 5000 साल से पानी नहीं पीने दिया का कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं!
प्रमाण है तो वो ये कि गुरुकुलों में 70% शूद्र पढ़ते थे!
प्रमाण है तो वो ये कि 75 साल में एक भी आरक्षित जाति अगड़ी नहीं बनी!
-अजीत भारती🔥
@pushkardhami बस ऐसे ही निर्णय देखने के लिए पिछले कई वर्षों से मैं (उत्तर प्रदेश का निवासी होने पर भी) आपके लगभग प्रत्येक ट्वीट को लाइक करता हूँ श्रीमन
जय श्री राम🙏
सर मत छापिए सर.. प्लीज़ सर। मार दीजिए जान से, पर पेपर में मत लीजिए सर। शादी तय है मेरी, लाइफ बर्बाद हो जाएगा सर!
ये रोना-धोना शुभम अग्रवाल का कल था, जो धनबाद में नमक का फैक्ट्री चलाता था।
पूरे स्टेट के लोगों के जान के साथ खिलवाड़ कर रहा था।
सिर्फ झारखंड ही नहीं, बंगाल में भी इसका नकली नमक धड़ल्ले से सप्लाई होता था।
फैक्ट्री में टाटा और पतंजलि नमक का बहुत सारा रैपर मिला नकली नमक मिलता था।
5 रुपए का नमक 30 रुपए में बेचता था।
सरकारी टीम को भनक लग गई।
इन्वेस्टिगेट किया तो पता चला कि नकली नमक का खेल चल रहा है।
जब फैक्ट्री में छापा मारने वाली टीम आई चेक करने,
शुभम ने उन्हें मुंह ही नहीं लगने दिया।
बकवास करने लगा कि मेरा माल एकदम ओरिजिनल है, कैसे साबित करेंगे कि नकली है? पूरा रौब झाड़ रहा था।
लेकिन जब सच बाहर आ गया, पुलिस ने घेर लिया तो रोने लगा और पैर पकड़ के गिड़गिड़ाने लगा।
शुभम की शादी फिक्स है।
पड़ोस के लोगों ने बताया कि इसने लड़की वाले को कहा था कि लड़का एक बहुत बड़ी फैक्ट्री का मालिक है।
मालिक तो निकला पर नकली नमक का! अब तो शादी भी गई और लाइफ भी।
एक आदमी ने ₹25 लाख का सुंदर प्लॉट देखा। दिल फँस गया। लोकेशन अच्छी थी, सड़क किनारे था।
सेलर ने तुरंत दबाव बनाना शुरू कर दिया
“भाई, जल्दी एडवांस दे दो। कल ही दूसरा खरीदार आ रहा है, ₹50 हज़ार ज्यादा देने को तैयार है।”
आदमी ने सोचा जमीन तो आँखों के सामने है, बस पैसे दे दो।
तभी उसके दोस्त ने टोका।
पहले कागजात तो चेक कर ले भाई
आदमी हँसा, “अरे यार, जमीन सामने खड़ी है, कागजों में क्या रखा है?”
दोस्त गंभीर होकर बोला..
असली जमीन मैदान में नहीं, कागजों में होती है
फिर शुरू हुई असली जाँच
1. Mother Deed माँगा पता चला जमीन का पूरा इतिहास, पहले कौन मालिक था, कैसे-कैसे हाथ बदला।
2. Sale Deed चेक किया यही दस्तावेज साबित करता है कि जमीन वाकई किसके नाम है।
3. Encumbrance Certificate निकाला कोई लोन, मुकदमा, या गिरवी तो नहीं?
4. Khata Certificate देखा भविष्य में टैक्स, मकान बनाने के लिए ज़रूरी।
5. Record of Rights (ROR) निकलवाया असली मालिक और रिकॉर्ड की पुष्टि।
कुल खर्च का हिसाब लगाया..
प्लॉट की कीमत = ₹25,00,000
रजिस्ट्री + स्टाम्प ड्यूटी ≈ ₹2,25,000
कुल निवेश = ₹27,25,000
दोस्त ने कहा, एक भी कागज गलत निकला तो सारा पैसा फँस जाएगा
फिर असली धमाका हुआ...
जिस शख्स से प्लॉट खरीद रहे थे, वो असली मालिक नहीं था, सिर्फ़ रिश्तेदार था।
बिना Power of Attorney (POA) के वो बेच ही नहीं सकता था।
फिर Survey Sketch करवाया सर्वे विभाग से।
सेलर 100 गज बता रहा था।
रिकॉर्ड में सिर्फ 92 गज निकला!
8 गज × ₹25,000 प्रति गज = ₹2,00,000 का नुकसान बच गया।
आदमी स्तब्ध रह गया।
उसने दोस्त से कहा, भाई, अगर तू न होता तो आज मैं ₹27 लाख का घाटा उठा बैठता
सीख..
प्लॉट खरीदते समय सिर्फ़ लोकेशन और कीमत नहीं देखनी चाहिए।
सबसे पहले कागजात देखो फिर एडवांस दो
क्योंकि जमीन खरीदना आसान है, लेकिन कानूनी लड़ाई से बचना बहुत मुश्किल।
एक और लैंड जिहाद !!
देवरिया ओवरब्रिज के बाद अब लैंड जिहाद का एक और खुलासा, बैतालपुर ब्लाक के भंडा गांव में जिहादियों ने सरकारी स्कूल की बेशक़ीमती ज़मीन हथिया कर यहाँ मदरसा बना दिया है, सरकारी स्कूल में जाने वाले बच्चों को मदरसे में आने के लिए प्रेरित/ मजबूर किया जाता है, गाँव के हिंदुओं के पर्वों आदि पर माहौल खराब करने की कोशिश की जाती है, जानकारी मिलते ही प्रशासन को कार्रवाई के करके इस अवैध मदरसे को तत्काल ध्वस्त करने और लैंड जिहाद करने वालों के विरुद्ध भूमाफ़िया की कार्रवाई करने को कहा है, आवश्यकता पड़ी तो गांव में शीघ्र सनातनी पंचायत भी बुलाई जाएगी।
हैरानी की बात ये है कि राजस्व विभाग के अधिकारियों की नजर अभी तक इस अवैध मदरसे पर क्यूँ नहीं पड़ी, राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से हुए इसी तरह के लैंड जिहाद का नतीजा है कि देवरिया जिला अस्पताल के लिए जरूरी सात एकड़ जमीन नहीं मिल पा रही।