ये कोई एक अस्पताल नहीं हैं। हर गांव में 15-20 महिलाएं ऐसी मिल जाती हैं।जिनका बच्चादानी निकाला जा चुका हैं (बड़ा ऑपरेशन बोलती है महिलाएं) । एक प्रकार का फ्रॉड चल रहा हैं,थोड़ा भी समस्या होता है कोई अल्ट्रासाउंड वाला Bulky Uterus लिख देता हैं। और मरीज़ को बच्चादानी में गांठ बता कर ऑपरेशन कर दिया जाता है। गांवों शहर में TAH और D and C का गोरखधंधा बहुत चल रहा हैं।
#Patna
1985 में नीतीश कुमार पहली बार MLA बने : Promotion
1989 में नीतीश कुमार पहली बार MP बने : Promotion
1990 में नीतीश कुमार पहली बार मंत्री बने : Promotion
2000 में नीतीश कुमार पहली बार CM बने : Promotion
2026 में नीतीश कुमार पहली बार Rajya Sabha में MP बन रहे हैं : Demotion
MODI जी CM के बाद PM बने थे. 2014 और 2019 में नीतीश कुमार PM मटेरियल थे. CM के बाद MP(RS) बनना डिमोशन ही कहा जाएगा.
BJP ने नीतीश कुमार को किनारे लगाकर बिहार में बहुजन लीडरशिप को कमजोर किया है.
नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए नामांकन पत्र पर दस्तखत नही किया है, बल्कि
नीतीश कुमार ने अपने राजनीतिक करियर को सरेंडर करने के लिए कागज पर दस्तखत किया है.
बिहार का CM रहते हुए नीतीश कुमार DM IAS IPS को उठाकर इधर उधर फेंक सकते हैं. गरीबों के लिए योजना लागू कर सकते हैं. बिहार का पत्ता भी नीतीश कुमार को पूछ कर हिलेगा.
राज्यसभा MP बनकर नीतीश कुमार केवल बोल सकते हैं,
अध्यक्ष महोदय.. अध्यक्ष महोदय.. हम कहें थे न.. अध्यक्ष महोदय दो मिनिट और लूंगा.. अध्यक्ष महोदय तो कह रहे थे MODI जी महान नेता हैं.
नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना केवल उनके राजनीतिक कैरियर का पतन नही बल्कि बिहार में सामाजिक न्याय की राजनीति का भी पतन है.
हम बिहार से हैं... बिहार की बेटी हैं... बिहार में काम करते हैं... एक हैं मेरे वर्कप्लेस वाला जिला, एक है मेरा गृह जिला और एक है राजधानी पटना... जहां हम चक्कर काटते रहते हैं... 2-1 महीने में घर जाते हैं ट्रेन से... जो पहुँचती है 10:30 - 11:00 बजे रात... ज्यादा दूर नहीं स्टेशन से घर... बिना बताए सरप्राइज कर देते हैं घर वालों को सीधा रात को दरवाजा खटखटा कर... और बाकी के हर वीकेंड को हम सड़क मार्ग से खुद गाड़ी चला कर पटना आते हैं... शनिवार शाम को ऑफिस के बाद निकलते हैं और 3 घंटे में पहुंच जाते हैं... अंधेरा होता है,अकेले होते हैं पर डर नहीं लगता... कहीं भी नहीं... मुख्यमंत्री चाहे कोई भी बने... हमको अपने इस रूटीन में कोई तब्दीली नहीं चाहिए... हमको अब बिहार में डरने की इच्छा नहीं है... जैसे निडर होकर रहते आएं हैं... वैसे ही माहौल की कामना मेरे जैसी तमाम लड़कियों को है...
#Bihar #BiharPolitics #BiharNews #NitishKumar
सभी लोग होली मनाते रह गए और राघव चड्ढा ने बीजेपी के सभी नेताओं की निंद उड़ा दी।
राघव चड्ढा ने आवाज उठाया है कि
आम आदमी जब अपने परिवार के लिए हर महीने राशन लेने जाता है तो उसका फिंगरप्रिंट लगाना पड़ता है, जब किसान खेत के लिए यूरिया लेने जाता है तो फिंगरप्रिंट लगाना पड़ता है तो जब फिंगरप्रिंट
इतना ही जरूरी है तो चुनाव में वोट के समय भी फिंगरप्रिंट लगाना जरूरी करना चाहिए।
आपकी ईमानदारी और निष्ठा के लिए नमन रहेगा। हमारी जेनरेशन को आपने एक अच्छे बिहार की अनुभूति दी। आने वाले CM से उम्मीदें बढ़ा दी है आपने। भगवान आपको स्वस्थ्य रखें।
प्राईवेट कॉलेज नेताओं का ही होता हैं, उनको क्या मतलब हैं कि कैसे डॉक्टर्स बनेंगे। उनके ख़ुद के बच्चे दूसरे देश में रहते हैं। उनका एक ही लक्ष्य हैं जैसे भी हो सीट्स खाली नहीं जानी चाहिए।
बिहार के छपरा में एक लड़का और लड़की साथ में बैठे हुए थे , तभी पुलिस की 112 वाली गाड़ी पहुंच गई !
लड़की को तो जाने दिया लेकिन लड़के को अपनी गाड़ी में बैठा लिया !
वायरल वीडियो में महिला पुलिसकर्मी लड़के को करियर खराब करने की धमकी देकर 5000 रूपये की रिश्वत मांग रही हैं !
लड़का गुहार लगा रहा हैं कि वो कमाता नहीं हैं इतना भी दे सकता , तब महिला पुलिसकर्मी कहती हैं कि ऐसी गलती करोगे तो देना ही पड़ेगा !
एक लड़का और लड़की अगर कही साथ बैठे हैं तो ये गलती कैसे हो गई ?
महिला सशक्तिकरण का गलत नमूना पेश कर रही हैं पुलिसकर्मी !
@bihar_police ऐसे पुलिसकर्मियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई करें , आमजन में भय पैदा कर रहे हैं ये लोग !
ये भारत है, यहाँ जान यूँ ही सस्ती है।
हमारे यहाँ ऐसा ही होता है,
हमें ऐसे ही मरने की आदत है।
कभी भीड़ में फँसकर कुचल जाने से,
कभी सड़क चलते गड्ढों में गिर जाने से,
कभी सड़क किनारे जमा पानी में करंट आने से,
कभी मेले में भगदड़ मच जाने से,
कभी बेसमेंट में पानी भर जाने से,
कभी फ्लाईओवर गिरने से,
कभी पुल टूट जाने से,
कभी ट्रेन के टकराने से,
कभी दवाओं की कमी से।
पर हमें बोलना नहीं है।
क्योंकि अगर हम बंगाल में मरे तो हम भक्त हैं,
और महाराष्ट्र में मरे तो चमचे हैं।
अगर उत्तर प्रदेश में मरे तो कांग्रेसी हैं,
और बैंगलोर में मरे तो भाजपाई हैं।
क्योंकि अगर हम सड़क किनारे नमाज़ पढ़ने से लगे जाम में फँस कर मरे तो मुस्लिम विरोधी हैं,
और रामनवमी के जुलूस में फँसकर मरे तो हिंदू विरोधी हैं।
दरअसल हम इनमें से कोई नहीं हैं —
हम सभी कबीले में बँटे मूर्ख लोग हैं,
जो बस अपनी-अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे हैं…
#NoidaAccident
Uff -grok ने ट्रोल्स को ट्रोल कर दिया लगता है. मुझे लोगों की हैरानी पर अफ़सोस है कि वे मानने को तैयार नहीं कि एल्गोरिदम बायस जैसी चीज एक्जिस्ट करती है. गूगल कीजिए इस पर हज़ारों रिसर्च पेपर हैं - दो तो मेरे ही हैं. सवाल के लिए शुक्रिया @DineshKumarR951
भारत के सबसे प्रसिद्ध प्रोफेसर और विद्वान आदरणीय विजेंद्र चौहान सर ने बिल्कुल सही कहा है,
ChatGPT वही जवाब देता जो सवर्णों के विचारधारा को सूट करता है. इस AI के पास वही परंपरागत जानकारी है जो सवर्ण अक्सर सोशल मीडिया पर बोलते लिखते रहते हैं.
विजेंद्र चौहान का आरोप गलत नही है, ChatGPT सवर्ण बायस वाला AI है इसमें कोई दो राय नही है.
नए शोध में पता चला है बौद्ध सभ्यता 5,000 साल पुरानी सभ्यता है. प्राकृत भाषा सबसे प्राचीन है. संस्कृत भाषा का विकास 500 AD के आसपास हुआ. लेकिन GhatGPT वही घिसापिटा पुराना जवाब देगा.
विजेंद्र चौहान सर ने देश के सभी युवाओं को यह संदेश देना चाहा कि कोई भी AI इंसान ने बनाया है, ChatGPT AI निष्पक्ष नही है. उसे निष्पक्ष बनाया जाना चाहिए. लेकिन जातिवादियों ने विजेंद्र चौहान सर को अपमानित करने लगे.
@dranuj_k Emergency care का मतलब होता है first treatment, then paperwork.
अगर मरीज को छुए बिना ₹20,000 का बिल बन रहा है,
तो यह चिकित्सा नहीं, सिस्टम फेल्योर है।
कल्पना कीजिए कि आपके घर में किसी को अचानक रात में पेट दर्द हो जाये। आप इमरजेंसी में ज़िला सदर अस्पताल में ले कर मरीज़ को जाते हैं जहाँ पे डॉक्टर उसे तुरंत किसी बड़े मेडिकल कॉलेज में रेफेर कर देते हैं।
एंबुलेंस से तुरंत आप वहाँ से निकलते हैं। चूँकि आपको पता है कि मेडिकल कॉलेज में पता नहीं कितनी भीड़ होगी इसलिए आप एंबुलेंस से किसी निजी अस्पताल में उतरते हैं।
और अस्पताल में मरीज़ जैसे ही बेड पर लेटा, अभी कुछ इलाज शुरू भी नहीं हुआ है, डॉ ने देखा भी नहीं और आपका बिल हो गया 20,000 रुपए।
मार्केटिंग के नाम पर कमीशन के खेल ने तथा सरकारी अस्पताल के कर्मियों / डॉक्टरों , एंबुलेंस और निजी अस्पताल के गठजोड़ ने यही स्तिथि बना कर रखी है।
और ये प्राइवेट एम्बुलेंस ही नहीं बल्कि 108 एम्बुलेंस की हालत है ।
और इतनी भयावह स्थिति के बावजूद कोई इसके विरोध में कुछ लिखना तो छोड़िए, बात नहीं करना चाहता।
@JharkhandCMO@IrfanAnsariMLA
@KraantiKumar मैं ट्राई कर चुका हूं। चूंकि मुझे समझ है कि @grok क्या गलत बता रहा हैं, इसलिए मैं उसको सही कर देता हूं। आम लोग इसके चक्कर में ना पड़े, और grok की बताई हुई बात तो अपने डॉक्टर्स से बिल्कुल न कहें। अभी बहुत काम होना बाकी है इसमें।
अरावली न हो तो पाकिस्तान में बरसेगा राजस्थान का मानसून: 1.50 लाख से ज्यादा पहाड़ियों पर खनन का खतरा, अब तक 25% चोटियां खत्म
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