भागते हुए भी अपना झोला उठाकर ले जाना नहीं भूलेगा!?
भगोड़ा आज उस कुर्सी पर बैठ गया है जहां कभी देश के लिए जान कुर्बान करने का ज़ज्बा रखने वाले लोग बैठते थे!
क्या ये बात सही है कि गांधीजी की हत्या के बाद RSS के कार्यकर्ताओं ने मिठाई बांटी थी?
अगर सच है तो प्रधानमंत्री जी RSS का गुणगान क्यों करते हैं?
और अगर उन्हें RSS का गुणगान करना है तो महात्मा गांधी के सामने सिर क्यों झुकाते हैं?
FIR मत करवाइएगा, बस ऐसे ही पूछ रही हूँ.
@narendramodi
Do you know how the Muslim community of Kerala came forward to defer the scheduled execution of Nimisha Priya, a Hindu nurse from Kerala convicted in Yemen? Where the GoI gave up, the Gand Mufti has succeeded in opening a window of hope to save Nimisha. https://t.co/x4q4vUQrOu
Lady Constable : सर इनकी नाबालिग लड़की लापता है.
Fariyadi : नमस्कार साहब 🙏🏼
Daroga : क्या भाई क्या नाम है तेरा
Fariyadi : राम पिप्पल
Daroga : कौन जात हो
Fariyadi : जी साहब चमार हैं
Daroga : कितने दिनों से लड़की लापता है
Fariyadi : साहब दो दिन से
Daroga : खेतों में देखा, टट्टी पेशाब करने गयी होगी
Fariyadi : हमारे घर में लैटरीन है
Daroga ; हाहाहा देखा, और लोग कहते हैं सरकार काम नही करती. इसके घर में लैटरीन है.
भारत में इंसान कितना भी पढ़ लिख ले, पत्रकार, वकील या दरोगा बन जाए या डॉ इंजीनियर बन जाए, इनके अंदर से जाति का कीड़ा कभी मरता नही.
📍 21वीं सदी में आज़ाद भारत का एक पुलिस स्टेशन. (फ़िल्म संतोष)
दावा बनाम हकीकत !
दावा तो यह दशक उत्तराखंड का दशक बनाने का है पर हकीकत यह है कि पहाड़ के गांव सड़क से वंचित हैं, अस्पताल में इलाज नहीं, शिक्षा नहीं , जंगली जानवरों का आतंक, रोजगार के अवसर नहीं !
इसलिए अदम गोंडवी की ये पंक्तियां हकीकत जान पड़ती हैं :
तुम्हारी फाइलों में गाँव का मौसम गुलाबी है
मगर ये आंकड़े झूठे हैं ये दावा किताबी है
फ्रांस की लिबरल महिलाएं ट्रम्प, पुतिन और मस्क को उखाड़ फेंकने के लिए सड़को पर हैं..!!
मोदी को अगर यहां से उखाड़ना है तो आरिफ, बरखा और शैला राशिद को भी ऐसा ही कुछ सोचना पड़ेगा..!!
दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ में लोगों का मारा जाना बेहद अफसोसजनक है. मृतकों को श्रद्धांजलि और घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना है.
यह दुर्घटना एक बार फिर दर्शाती है कि सरकारें प्रचार के मोर्चे पर अव्वल हैं लेकिन इंतजाम के मोर्चे पर फिस्सडी हैं और आपात हालात से निपटने के इंतजाम करने का तो ख्याल तक उनके दिमाग में नहीं आता.
(वीडियो से स्थिति की विकटता और बदइंतजामी को समझा जा सकता है)
सवाल तो अब भी वही है कि सिलक्यारा दुर्घटना के लिए जिम्मेदार नवयुग इंजीनियरिंग कंपनी पर कार्यवाही क्यों नहीं, उसे कौन बचा रहा है?
(इंडिया टी वी की चर्चा में)
मणिपुर हिंसा के 100 दिन पूरे होने पर कुकी-जो आदिवासियों ने न्याय व शांति के लिए मार्च निकाला। जहां पिछले 3माह में 160 से अधिक मौत हो गई। 5 हजार घर जला दिए गए। 60 हजार लोग बेघर हो गए। जिसमें आदिवासियों को सबसे अधिक जान माल की अपूर्णीय क्षति हुई है। लेकिन सरकार मूकदर्शक बनी हुई है।