महंगू ने महंगाई में
पैसे फूंके टाई में,
फिर भी मिली न नौकरी
औंधे पड़े चटाई में
गिटपिट करके हार गए
टाई ले बाज़ार गए
दस रूपये की टाई उनकी
बिकी नहीं दो पाई में
~ सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
एक दिन मन हुआ
खानाबदोश हो जाने का
बर्बर हो जाने का
जब समझा जीवन की भीषण अनिश्चितता को
इतिहास की चादरों में दबे गुमनाम कंकाल को
समझ आया
अधिकारों की मांग
पुराकाल घटित एक अनावृत कहानी है
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वे लोग जो नहीं डरते
सड़को पर उतर पड़ते हैं
मुट्ठियों को खींचकर, जबड़ों को भींचकर
आत्महननकारी है,ख़ानाबदोशों की आत्माएं है
वे एक दिन मुठ्ठियों को लहराकर, तानाशाही को हराकर
सिंहावलोकन कर डालेंगे कालखंड का
•आदित्य चंद्रा'सुभाष'
@Aditya729194
जाने क्या-क्या है यहाँ
बे-सिर-पैर के हज़ारों किस्से
बे-पर की उड़ानें
गुमशुदा दोस्ती की महक
बदग़ुमानी का मजा
अनचाहे प्यार की सज��
अचानक मिली खुशियों की गुदगुदी
ख़ुद ही ख़ुद में बेख़ुदी
और तो और
बेहूदगी की बेहद हद़ें
बेतुकी बातों की जद़ें
11वीं की NCERT में आप सब ने इन्हें अवश्य पढ़ा होगा। बेबी हालदार दीदी का जीवन संघर्ष से सदैव भरा हुआ रहा।
BESTSELLER लेखिका बनने पर सब संस्थाओं ने इन्हें बहुत सराहा, पर आज जब दीदी गंभीर रूप से अस्वस्थ ��ैं तो कोई सहायता के लिए नहीं आया।
उनका PHONEPAY नंबर
9088861892
9818741897
"सभी व्यक्ति प्राकृतिक रूप से सामान हैं, एक ही मिटटी से एक ही कर्मकार द्वारा बनाये गए;और भले ही हम खुद को कितना भी धोखें में रख लें पर भगवान को जितना प्रिय एक शसक्त राजकुमार है उतना ही एक गरीब किसान।"
~ प्लेटो
इस स��के बावजूद पिक्चर की रिपोर्ट बहुत अच्छी रही. रिव्यूज तो सभी टाप क्लासमिले.
सीपी बरार में भी रिलीज हो गयी. वहां भी एकदम बढ़िया रिपोर्ट है. कल सीआई ��ाजस्थान में हो जायेगी.
कमसेकम बम्बई रिलीज पर तो आपको अवश्य बुला सकेंगा. पत्र दीजियेगा. लतिकाजी को मेरा नमस्कार दीजिएगा.
मुझे अपनी फिल्म का प्रीमियर देखना भी नसीब नहीं हुआ. यह तो उन सरदार फायनेन्सर्स का ही दम था कि चित्र प्रदर्शित हो सका, अन्यथा यहां से दिल्ली सपरिवार गये हुए राज साहब अपमानित लौटते. मुझे यहां आपने इस बार देखा है, कल्पना कर सकते हैं क्या हालत हुई है.
गीतकार शैलेंद्र का आख़िरी पत्र:
प्रिय भाई रेणु जी,
सप्रेम नमस्कार. फिल्म आखिर रिलीज हो गई, मालूम ही होगा. जो नहीं मालूम वह बताता हूं. दिल्ली, यूपी के डिस्ट्रिब्यूटर और उसके सरदार फायनेंसर्स का आपसी झगड़ा-छः अदालतों में, मेरे ऊपर वारन्ट-कोई पब्लिसिटी न होते हुए भी फिल्म लगी.