यह हमारे राज्य के शिक्षा मंत्री है। जो तूता धरना स्थल पर बैठे नियुक्ति के इंतजार में डीएड अभ्यर्थियों को न सुन पा रहे हैं, न ही उनकी पीड़ा समझ पा रहे है और न ही उनको नियुक्ति दिलवा पा रहे है।
सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार छात्रों को इन्होंने यह कहा कि आपके कार्य को मैं करना चाहता हूँ लेकिन ऊपर परमिशन नहीं मिल रहा। आख़िर वह कौन है जो ऊपर से इनको काम करने नहीं दे रहा है? जब ऊपर से कोई कुछ करने नहीं दे रहा तो फिर शिक्षा मंत्री बनने का क्या फायदा?
छत्तीसगढ़ प्रदेश में कहने को सुशासन की सरकार है, लेकिन इनकी सुशासन से राज्य के युवा इतना खुश हैं कि दिल्ली के जंतर- मंतर छात्र आंदोलन में शामिल होकर बात रखनी पड़ रही है।
देखिए, सुनिए और समझिए।
@GajendraYdvBJP हम डीएड अभ्यर्थी भी पिछले 7महीने से अनशन पर बैठे है अपने नियुक्ति की जायज मांगो को लेकर आपको भी हमें हमारा हक़ देकर हमारा अनशन समाप्त करना चाहिए। 🙏🙏🙏
*नौकरी की आस में 210 दिन से डीएड अभ्यर्थियों का आंदोलन जारी: अब नियुक्ति की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर से भरी हुंकार, केंद्र और राज्य के शिक्षा मंत्रियों से मांगा इस्तीफा*
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#cjp_पार्टी#AcilKademeŞart#AcilKademeŞart#dhrmendrprdhan
मैं एक महिला हूँ शादी के बाद मैंने 2023 शिक्षक भर्ती का एग्जाम दिया जो मेरे लिए कठिन था लेकिन मैंने परिश्रम से परीक्षा पास किया।
सुशासन तिहार में हम भाजपा सरकार से अनुरोध करते हैं कि हमारी पीड़ा को समझें और हम सभी डीएड अभ्यर्थियों को नियुक्ति दें।
-छत्तीसगढ़ में नौकरी के लिए आस लगाए डीएड अभ्यर्थी।
हमें 170 दिन हो गए, हम यहाँ पे मर रहें है लेकिन सरकार हमारी सुध लेने नहीं आ रही है।
हम अपनी जायज़ माँग को लेकर बैठे है, हम नियुक्ति लिए बिना घर भी नहीं जा सकते।
-छत्तीसगढ़ के डीएड अभ्यर्थी।
छत्तीसगढ़ में जांजगीर-चांपा के पोड़ी राछा में जो हुआ, वह कई गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि डीएड अभ्यर्थी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद भी नियुक्ति की मांग कर रहे हैं, तो उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें हिरासत में लेने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या लोकतंत्र में अपनी मांग का पोस्टर दिखाना भी अपराध है? यदि राजनीतिक कार्यकर्ताओं और समर्थकों को मुख्यमंत्री तक पहुंचने की छूट थी, तो बेरोजगार युवाओं के लिए अलग नियम क्यों?
जिन युवाओं ने वर्षों पढ़ाई की कानूनी लड़ाई लड़ी और न्यायालय से राहत हासिल की उन्हें नौकरी के बजाय थाने का रास्ता क्यों दिखाया गया? क्या प्रशासन का काम संवाद स्थापित करना है या असहमति को दबाना? और यदि अभ्यर्थियों ने कोई अपराध नहीं किया था तो उनसे शपथ पत्र लिखवाने की आवश्यकता क्या थी? सरकार और प्रशासन को इन सवालों का जवाब देना चाहिए, क्योंकि यह मामला केवल 2300 पदों का नहीं, बल्कि युवाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों और व्यवस्था पर उनके भरोसे का भी है।
VIDEO | When asked about Cockroach Janta Party, AAP leader Sanjay Singh (@SanjayAzadSln) says, "Whenever youths have been muzzled, revolutions happened around the world, the regime changed. Now they are playing with them... but the youths will not stop. Five students have committed suicide, a total 93 paper leaks have happened, I think this is like playing with their lives, they are protesting in their own way, Cockroach Janta Party is an example of it, and in the coming days, the BJP will have to suffer."
#CockroachJantaParty
राजधानी @RaipurDistrict के तूता धरना स्थल पर डीएड अभ्यर्थियों का आमरण अनशन 166 दिनों से जारी है। भीषण गर्मी, आर्थिक संकट और भविष्य की चिंता के बीच युवा अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसे में राज्यसभा सांसद @SanjayAzadSln धरना स्थल पहुंचकर समर्थन देते हैं और संसद में मुद्दा उठाने का आश्वासन देते हैं। लेकिन इससे एक बड़ा सवाल खड़ा होता है। छत्तीसगढ़ के सत्ताधारी और विपक्षी दलों के बड़े नेता आखिर कहां हैं? चुनाव के दौरान युवाओं के घर-घर जाकर समर्थन मांगने वाले नेता क्या 166 दिनों से चल रहे इस आंदोलन से अनजान हैं?
यह सवाल केवल डीएड अभ्यर्थियों का नहीं, बल्कि प्रदेश के उन हजारों युवाओं का है जो रोजगार की उम्मीद लगाए बैठे हैं। क्या नेताओं के लिए युवाओं का महत्व सिर्फ वोट देने तक सीमित है, या फिर उनकी समस्याओं का समाधान भी राजनीति की प्राथमिकता बनेगा? जनता जवाब चाहती है।
हम सरकार से मिलने जाते हैं तो मिलते नहीं और ना ही हमारे पास मिलने आते है,
हम जितने भी डीएड अभ्यर्थी हैं हमारे पास एक ही विकल्प है एक तो कलम पकड़ेंगे या हथियार उठायेंगे।
अब यह सरकार के ऊपर निर्भर है कि वे हमें कलम पकड़ायेंगे या हथियार उठाने मजबूर करेंगे।
-नियुक्ति की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ के डीएड अभ्यर्थी।
छत्तीसगढ़ विधानसभा शीतकालीन सत्र में शिक्षामंत्री ने 1300 पद खाली की जानकारी दी थी
लेकिन अब वे बोल रहे है कि इन पदों की भर्ती प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है, तो सवाल यह है कि ढाई महीने में ही 1300 पोस्ट कहा गया उसे जमीन निगल गई या आसमान खा गया?
-छत्तीसगढ़ की डीएड अभ्यर्थी।
नियुक्ति को लेकर हम 158 दिन से धरने पर बैठे हुए है, हम हर प्रकार के प्रदर्शन कर चुके है सरकार को मनाने।
कोर्ट से हमे न्याय मिल चुका है, लेकिन सरकार से नहीं मिल रहा। हमारी बातों को अनसुना किया जा रहा।
-छत्तीसगढ़ की युवा।