आज देश के हर नागरिक को एक बड़ा सवाल पूछने की ज़रूरत है।
क्या आज के दौर में हमारी न्यायपालिका
सचमुच पूरी तरह स्वतंत्र होकर काम कर रही है,
या फिर वह अदृश्य ताकतों के भारी दबाव में है ?
एक तरफ ऐसे बेबाक फैसले आते हैं जो संविधान पर भरोसा जगाते हैं,
तो दूसरी तरफ कई मामलों में महीनों तक बेगुनाह जेलों में सड़ते रहते हैं और कोर्ट की तारीखें खत्म नहीं होतीं।
आम जनता न्याय की उम्मीद में अपनी
ज़िंदगी कोर्ट के चक्कर काटने में गुज़ार देती है,
जबकि रसूखदारों को तुरंत राहत मिल जाती है।
न्याय का तराजू सबके लिए बराबर होना चाहिए, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है।
इस गंभीर विषय पर आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि आज भी अदालतें बिना किसी डर या प्रभाव के निष्पक्ष न्याय दे पा रही ?
सुबह की ये शुरुआत सिर्फ इंसानों के चेहरे पर नहीं, बेज़ुबानों की आँखों में भी खुशी ले आई...❤️
कई दिनों के इंतज़ार के बाद मौसम ने ऐसा रंग दिखाया कि हर कोई झूम उठा।
आज इन्हें देखकर समझ आया कि खुशियाँ सिर्फ शब्दों से नहीं, एहसासों से भी होती हैं।
@khurapatibalak3 घबराने की बात नहीं है! नए प्लास्टिक (पॉलिमर) नोट आने के बाद भी पुराने कागजी नोट धीरे-धीरे चलन से बाहर किए जाएंगे, अचानक बंद नहीं होंगे।
जिस तरह से लोग इस्तीफा मांगने के लिए सोशल मिडिया पर अकाउंट बना रहे है
तो हमने भी एक शुरुआत की है
X HEAD NIKITA BEAR के रिजाइन के लिए GMP पार्टी बनाने की सोच रहा हूँ
क्या बोलते हो शुरू किया जाये
GMP : गधा मजदूर पार्टी जिंदाबाद ✊✊
Nikita bear Must resign