सवर्णों को भारत त्याग कर अंटार्कटिका आदि जाने की सोचना चाहिए। मध्यप्रदेश (73%), महाराष्ट्र (72%), बिहार (75%), छत्तीसगढ़ (68%) या राजस्थान (64%) आदि के साथ भाजपा सरकार जहाँ भी है 50% से कहीं अधिक आरक्षण के लिए लगातार प्रयासरत है।
महाराष्ट्र में तो इन्होंने ४ बार कोर्ट हारे, पर इनका दिल ही कुछ ऐसा है कि नया अध्यादेश ला कर, कोई फ़र्ज़ी रिपोर्ट बनवा कर, फिर से वही आरक्षण ले आते हैं, ताकि वोट बैंक बना रहे।
सवर्णों का क्या है वो घास छीलना सीख सकते हैं, वैसे भी विकसित भारत पर जब पार्टी अध्यक्ष कैप्स लॉक मार के ‘वी विल डू इट’ लिख दे तो समझ लेना चाहिए कि अपने एंड से तो हो गया विकसित, बस ब्रह्मा जी समय की गति तीव्र कर दें।
मोदी जी ने कहा है तो सोच समझ कर ही कहा होगा।
हरियाणा, भिवानी 📍
सवर्ण समाज द्वारा UGC रोलबैक और आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया गया।
करणी सेना और ब्राह्मण समाज के सभी संगठन एक मंच पर नज़र आए, इसलिए इसे महासम्मेलन का नाम दिया गया है। आगे क्या होगा, यह तो वक्त ही बताएगा।
पिछले कुछ दिनों से बिकाऊ और चाटुकार यूट्यूबर्स की एक नई जमात GC एक्टिविस्ट्स और आरक्षण हटाओ आंदोलन (RHA) के समर्थकों पर हमलावर हो गई है, क्योंकि वे प्रधानमंत्री मोदी से प्रश्न कर रहे हैं। अजीत भारती जी ब्रो उनकी औकात याद दिलाते हुए स्पष्ट करते हैं कि किसी नेता या सरकार की आलोचना करना भारत या राष्ट्र का विरोध करना नहीं होता।
बिकाऊ भाजपाई ढोंगी यूट्यूबर्स मुझे ज्ञान न दें: ब्रो ने GC विरोधियों की बोलती बंद की!
जब आपको पता ही नहीं कि UGC कानून है या नियमावली, तो आप इसमें कूद क्यों रहे हैं, गिरिराज सिंह जी? UGC के मामले में मोदी जी को डिफेंड करने क्यों आ रहे हैं?
प्रिय @DrMohanYadav51 जी, @BJP4MP से मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश,
समाचार सुना कि आप लोग तीन बार कोर्ट में OBC पर हारने के उपरांत भी, सामान्य वर्ग (और प्रतिभा) को राज्य से भगाने के लिए, अब फिर 73% आरक्षण के विषय पर सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में हैं।
भाजपा संभवतः 2018 भूल गई है जब सवर्णों ने उन्हें तमाचा मारा था तीन राज्यों में। यदि 2028 में आपको वही परिणाम चाहिए तो आप यह असंवैधानिक बकलोली करते रहिए।
मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि जिस तन्मयता से मैंने इस पूरे वर्ष को सामान्य वर्ग और सवर्णों के अधिकार पर लिखने-बोलने पर केन्द्रित कर रखा है, 2027 और 28 में यह राजनैतिक हो चुका होगा। यूपी भाजपा की क्या स्थिति है, फोन कर के पता कर लीजिएगा।
आपने यह चुनाव 73% आरक्षण के दम पर नहीं जीता है। लाडली बहना के कारण आपकी आर्थिक स्थिति का पता है ही। लोगों को पुनः व्यक्तिगत छवि पर आक्षेप करने को विवश मत कीजिए। यूपी यदि 190-210 के रेंज में आता है तो आप सोचिए मध्यप्रदेश का क्या होगा।
हठ छोड़िए और राज्य पर ध्यान दीजिए। भारी उद्योग पर फोकस कीजिए। शिक्षा में अच्छा निवेश कीजिए। अच्छे नेता बनिए जिसकी लेगेसी रहे। 73% आरक्षण पूरे राज्य को बर्बाद कर देगा। आपको मिलेगा नहीं, पर आपकी छवि बर्बाद हो जाएगी, यह निश्चित है।
नाम: अभिषेक पांडेय
काम: सड़क किनारे चाऊमीन बेचना
लेकिन सरकार की नजर में ये 'जन्मजात अत्याचारी करोड़पति ब्राह्मण' हैं। इसलिए इनके बच्चे को पढ़ाई के लिए एक रुपये की भी स्कॉलरशिप नहीं मिलेगी। सरकार को ये समझना चाहिए कि गरीबी हर जाति में होती है।
हमारे समाज के नेताओं से तो भला @hanumanbeniwal है, जो बोल रहा है आरक्षण आर्थिक आधार पर होना चाहिए, हमारे वालों के तो मुंह में बवासीर हो रखा है....
#ReservationReform
बिहार में द्वितीय श्रेणी से भी पास होने के पर सरकार ₹8,000 देगी। क्योंकि यह पैसा सम्राट चौधरी और मोदी जी के पारिवारिक ट्रस्ट से रिलीज किया जाता है। टैक्सदाता इसमें क्यों बिलबिला रहा है!
Why are you silent when Hindu minorities face violence and killings in Pakistan and Bangladesh? Why is there so little outrage over the persecution of Uyghur Muslims in China? Human rights must not be selective. Every innocent life matters, regardless of religion or nationality.
सम्राट सरकार द्वारा मुख्यमंत्री उद्धमी योजना
अनुसूचित जाती जनजाति के लिए राशि 1,086.54
अति पिछड़ा वर्ग की लिए राशि 808.87
अल्पसंख्यकों के लिए राशि 176.26
सामान्य वर्ग के लिए राशि 0………….. हिंदू राष्ट्र विकसित भारत का चूरन
‘प्रोटेस्ट में कितने लोग आएँगे’ की परिस्थिति से बचने का सबसे उत्तम मार्ग है स्वयं को डिटेन करवा लेना। बैंग्लोर और मुंबई में दो-दो हजार की भीड़ देख कर तिलचट्टों को अपनी लोकप्रियता का अंदाजा था। बहुत आते तो भी 5000 भी न होते। हर राज्य में डिटेंशन की संख्या जोड़ लीजिए, उसमें दो सौ और जोड़ दीजिए जो दिल्ली से आते।
यही कारण है कि इनके नेताओं ने ऐसा एक भी कार्य नहीं किया कि ये हीरो बन कर सीधे जंतर मंतर पर पहुँचते और वहीं से पुलिस द्वारा घसीटे जाते। इसके उलट, दिपके-रंका-दास-राठी आदि ने न केवल अपनी यात्रा और गतिविधि सार्वजनिक की, बल्कि पकड़े जाने से बचने के लिए किसी भी प्रकार का कोई उपाय नहीं किया।
ये चारों ही बहुत उच्च कोटि के फट्टू हैं। 20 जुलाई को भी रंका-दास सोच-समझकर कर नड्डा के घर ही बैठे रहे ताकि वो प्रोटेस्ट की लाठी न खाएँ। दिपके ट्रक पर बैठ कर भागा और ठिगना दहिया बर्गर खाने की कोशिश करता दिखा।
इसीलिए, पुलिस द्वारा फ्लाइट में ही पकड़े जाने से डंडे खाने का, बैरिकेड से घसीटे जाने का कोई झंझट उत्पन्न ही नहीं होता। वैसे तो सरकार से मुझे अधिक आशाएँ हैं नहीं, पर ढंग से कार्य करने दें पुलिस को तो महीने भर में राठी जैसों का ‘देशप्रेम’ बह कर बराबर हो जाएगा।