शिक्षा से जागृति, ज्ञान से मुक्ति, सामाजिक न्याय से समता।
शिक्षाविद् • ग्राम प्रधान • समाजसेवी
बहुजन विचारधारा | बाबासाहेब • ज्योतिबा फुले • सावित्रीबाई फुले
पापा कहते थे- बड़ा नाम करेगा
बेटा हमारा ऐसा काम करेगा
बेटा कंधों पर स्टार लगाकर, देश सेवा की शपथ लेकर,मां बाप का नाम रौशन करने चला था।
अब ऐसा काम करना पड़ रहा है, कि शर्म के मारे, वर्दी से नाम का बैज निकाल फेंकना पड़ा है।
•
हिंदुस्तान के बेटों को इस सरकार ने क्या बना दिया है!
@Ritesh_hisss इससे साबित होता है कि इनको सत्ता संरक्षण किस कदर प्राप्त है।
एनडीए नीत सरकार भी यही चाहती है कि इस तरह की घटनाएं घटती रहे शायद इसीलिए नालंदा वाली घटना पर कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई!
@INCIndia सिर्फ X पर लिखकर ही काम चला लेंगे या फिर धरातल पर भी कुछ करेंगे... सत्ता निरंकुश इसलिए है क्योंकि विपक्ष सोया हुआ है... और जनता अंधभक्ति में लीन!
@BhimArmyChief जितनी भर्त्सना की जाए कम है...सवाल यह है कि कानून व्यवस्था कैसी है जो इन गुंडों से निपट भाई पा रही... पर छात्रों पर AK 47 भी चला सकती है।
@yadavtejashwi हर नेता समय काल और परिस्थिति के अनुसार अपनी प्रायोरिटी तय करता है, सम्राट चौधरी जी के लिए जाति सम्मेलन ज्यादा जरूरी है बजाय जमुई की इस घटना के।
@ajitanjum मुख्यमंत्री महोदय सिर्फ भाषण बाजी ही करेंगे या ऐसे लोगों पर कार्यवाही, आपने मुख्यमंत्री बनते ही बुलडोजर को खड़ा कर लिया है आप बता रहे थे, लेकिन आज वह बुलडोजर कहां है जनता पूछ रही है।
@SomuAnand_ मंत्री महोदय को जरा सोच कर बोलना चाहिए ऐसा मुझे लगता है थोड़ी देर के लिए मान लीजिए की यही घटना उनकी बिटिया के साथ हुई होती या उनके परिवार के किसी दूसरे सदस्य के साथ हुई होती तब क्या इनका यही वक्तव्य होता?
ये हेडलाइन अधूरी है, पूरी कहानी ये है 👇
मोदी के चेतावनी देते ही - जिनपिंग कांपने लगे थे. गला सूख गया था.
डर के मारे जिनपिंग ने हाथ जोड़ लिए और कहा - मोदी जी, मुझे घर वापस जाने दो प्लीज.
ये न्यूज वाले भी... पूरी बात नहीं बताते.
संबंधित वीडियो मोदी जी के ड्रीम प्रोजेक्ट नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के हैं। ऊंचे-ऊंचे दावों के साथ बड़े जोर शोर के साथ उद्घाटन किया गय��� था। लेकिन ��हली बारिश में ही सांस फूल गई मोदीजी के ड्रीम प्रोजेक्ट की।
मोदी जी और योगी जी का कोई भी निर्माण एक सीजन से ज्यादा क्यों नहीं चल पाता। वैसे एक सीजन चल जाय तो बड़ी उपलब्धि समझिए। ज्यादातर निर्माण एक महीने में, या एक सप्ताह में और कई तो एक दिन में ही उखड़ जाते हैं। यह गम्भीर शोध का विषय है। सरकार को विशेषज्ञों की एक समिति का गठन कर इस पर
शोध कराना चाहिए।
वैसे इसके लिए कोई खास विशेषज्ञता की जरूरत नहीं है। कोई भी साधारण व्यक्ति यह बता सकता है कि मोदी-योगी सरक���र के ज्यादातर निर्माण कार्य आरएसएस-बीजेपी के लोगों को दिये जाते हैं। उनमें मोटा कमीशन खाया जाता है । और लागत पूरी नही लगाई जाती।
मेरा उद्देश्य किसी को जगाना नहीं, बल्कि जागने का कारण देना है।
अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक समाज ही सशक्त समाज बनता है।
मैं अपनी भूमिका निभाता रहूँगा—जागना या सोते रहना आपका निर्णय है।