अब एक समाचार 'सूत्रों' के नहीं, 'उच्च पदस्थ सूत्रों' के हिसाब से फैलाया जा रहा है कि सरकार UGC रोलबैक नवंबर के मध्य में करेगी। यह कोई समाचार नहीं है, यह वही धूर्तता है जो इनके प्रवक्ताओं के मुँह में माइक देने पर ये कहते हैं कि 'विषय कोर्ट में है'।
ध्यान रहे हमारी तीन माँगें हैं:
1. UGC रोलबैक
2. मोदी एक्ट में समुचित संशोधन
3. वर्तमान आरक्षण में समीक्षा
कोई एक माँग से कुछ नहीं होने वाला। संघर्ष चलता रहेगा। 5 महीना लगे, 2 साल लगे, 10 साल लगे।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज मोदी एक्ट की धारा 18 और 18ए(2) के अंतर्गत वैधानिक रोक को देखते हुए मेरी अग्रिम जमानत याचिका को निरस्त कर दिया। हायकोर्ट का यह निर्णय अपनी जगह है, पर मैं इस से सम्मानपूर्वक असहमत हूँ।
साथ ही, यह भी स्पष्ट है कि न्यायालय ने कहा है कि इसकी टिप्पणियाँ केवल जमानत आवेदन तक सीमित हैं और मेरी आपराधिकता इससे सिद्ध नहीं हो जाती। इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चुनौती दूँगा और आशा करता हूँ कि देश की न्यायिक व्यवस्था में सर्वोच्च विश्वास बना रहे।
मुझे एक नीच, अधम, पतित ट्रोल के विरुद्ध अपने परिवार के सम्मान की रक्षा करने के लिए, इस घटिया और दमनकारी मोदी एक्ट (जिसे SC/ST एक्ट भी कहा जाता है) के प्रावधानों के तहत एक आपराधिक मामले में झूठा फँसाया गया है।
मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा है जो किसी व्यक्ति या समुदाय का जाति के आधार पर जानबूझकर अपमान या अपमानजनक व्यवहार माना जा सके। मैं उन किसी भी निहित स्वार्थ वाली ताकतों से लड़ने के लिए तैयार हूँ जो इस देश में स्वतंत्र अभिव्यक्ति और सत्य कथन को दंडित करना चाहती हैं, भले ही इसके लिए मुझे जेल जाना पड़े।
एक नेता द्वारा अपनी राजनैतिक वोटबैंक को साधने के लिए, सामान्य जनता से बिना किसी सोच-विचार के, संशोधित किए गए इस पूरे कानून और इसके संशोधित नियमों का मैं तब तक विरोध करूँगा जब तक इसे पूरी तरह से निरस्त न किया जाए।
और हाँ, पुनः कहूँगा कि हमारी की माँ-बहनें सड़कों पर चलती-फिरती वस्तु नहीं है जिस पर कोई भी टिप्पणी करे और बच जाए। उनके सम्मान की रक्षा हेतु, सौ बार जेल जाना पड़े जाऊँगा और 101वीं बार वही करूँगा जो मैंने किया है।
PS: जो भी इस निरस्तीकरण पर स्खलित हो रहे हैं, तुम्हारी माँ-बहन पर भी हर दिन ऐसी टिप्पणी होती है। उस पर भी मैं ही स्टैंड लूँगा क्योंकि तुम अपनी कायरता में दो शब्द नहीं लिख पाओगे।
निशु आजाद के एक-एक ट्वीट पर हर जिले में ईशनिंदा कानून के तहत BNS 299/IPC 295A में केस होना चाहिए। ‘हिन्दू लीगल फंड’ को इसमें मोबिलाइज किया जाए।
इसके बाप पर काउंटर FIR होनी चाहिए। उसको बहुत ‘दो मिनट पुलिस नहीं आती’ करना है न, क्या @DelhiPolice इतनी नकारी है कि कोई भी गुंडा प्रवृत्ति का व्यक्ति खुलेआम वीडियो बना कर धमकी देगा?
जब इनको FIR-FIR ही खेलना है, तो यही सही। फिर देखते हैं कि रावण और राहुल कितने थाने घेर लेता है। नरेन्द्र मोदी ने जो बवासीर बना दिया है, वह अब हिन्दू समाज हर दिन झेल रहा है। दुर्भाग्य यह है कि जो इसका प्रयोग कर रहे हैं वो मोदी के वोटर हैं ही नहीं।
हरदोई में टीचर राजेंद्र कुमार ने छात्रा छमा दीक्षित को इतना मारा कि उसकी मृत्य हो गई उसकी गलती इतनी थी कि वो टीचर से अपने साथी की शिकायत करने गई थी बजाय समझाने के टीचर ने छमा दीक्षित को ही बुरी तरह से डंडों से मारा।
और एक बात बता दूं शिक्षक मोदी जी के पिछड़े वर्ग से आते हैं और क्षमा दीक्षित ब्राह्मण थी छमा के परिजन बहुत गरीब हैं पर सरकार के अनुसार तो टीचर ही गरीब और दबा कुचला माना जाएगा अतः मेरा मोदी जी से निवेदन है कि बच्ची के परिवार पर भी SC ST केस लगवा कर जेल में डलवा दो इन साले ब्राह्मणों को जीने का कोई अधिकार नहीं है।
इति 🙏
She is Dashodri Pandey of Madhya Pradesh. She's crying because her house got drowned in the rain. She has become homeless.
According to the BJP, She is privileged. She is an oppressor. People like Chirag Paswan will get reservations but not this poor lady.
मेरे ऊपर SC/ST एक्ट में FIR पर कुछ बातें सवर्ण समाज से
कोई मेरी माँ या बहन पर सीधे बलात्कारी मानसिकता के साथ यह कहे कि उसका विवाह मैं चंद्रशेखर के साथ करा दूँ, और मैं चुप रह जाऊँ तो आप बताइए कि मैं कैसा पुत्र या भाई हूँ?
इतने पर भी चंद्रशेखर को ले कर मैंने कोई जातिसूचक शब्द नहीं बोला, जो उक्त वीडियो में है। जब स्टेज से ब्राह्मणों की बेटियों को खींचने की बातें होती हैं और किसी SC नेता का चेला सोच-समझ कर उकसाने के लिए ऐसी बात करेगा, तो मैं चुप कैसे रहूँगा?
आज व्यक्ति अपने मौलिक अधिकारों को समझे या न समझे, वह यह अवश्य जानता है कि SC/ST एक्ट क्या है। तो मैं जब बोलता हूँ तो मुझे अपनी सीमाएँ (चाहे वह कितनी ही अनुचित क्यों न हों) पता हैं कि क्या बोलना है, क्या नहीं।
मैं जानता हूँ कि दिल्ली पुलिस के नॉर्थ अवेन्यू स्टेशन में आजाद समाज पार्टी वालों ने कितना दवाब दे कर रात के बारह बजे यह FIR लिखवाया है जो कोर्ट में दो मिनट नहीं टिकेगा। एक भी धारा ऐसी नहीं है जो होल्ड करेगी।
मैं सैनिक स्कूल का छात्र हूँ और इतनी रैगिंग झेल चुका हूँ कि मेरा मनोबल तोड़ने के लिए दिल्ली पुलिस को कस्टडी में मेरी हत्या करनी पड़ेगी, दो-चार डंडों से मेरा मनोबल नहीं टूटने वाला। और यदि मैं जीवित बच गया तो इसी स्थिति में जंतर मंतर जाऊँगा और अपने समाज से कहूँगा कि बताओ, तुम्हारी बहन और माँ को ले कर कोई ऐसी टिप्पणी करे तो क्या करोगे?
यदि ऐसा कमेंट फिर मेरे वीडियो पर आया तो मैं पुनः उसी तरीके से उत्तर दूँगा जो मैंने दिया। कानून जब तक है, संशोधन नहीं होता, मैं उसका सम्मान करूँगा और दिल्ली पुलिस के साथ पूर्ण सहयोग करूँगा। 92% ऐसे केस केवल प्रताड़ित करने के लिए होते हैं।
अंत में, सवर्ण समाज से यह पूछना चाहता हूँ कि क्या इस तरह की टिप्पणी पर मुझे सह लेनी चाहिए थी क्योंकि किसी पार्टी के लोग नाराज हो जाएँगे? क्या ब्राह्मणों की माँ और बहनें इन रेप मैंटिलिटी से संचालित गुंडों के शाब्दिक बलात्कार के लिए जन्म लेती हैं?
@jcrajan00 Reasons for Less textile input is our strong labour and environment laws. A factory employing 20+ workmen is required to follow various Compliance including maternity. along with this you need Certificate under Air and Water act. Also from state Pollution board.
🚨 #ExpressInvestigation | The Union Minister of State for Agriculture Bhagirath Choudhary received a ₹99.03 lakh subsidy for a commercial cucumber farming project under a scheme run by the ministry he serves in.
While the final approval was granted by an NHB project approval committee that does not include the minister, Choudhary is the ex-officio Vice-President of the NHB board that oversees its functioning.
The project, worth ₹1.99 crore, was among 467 approved under the scheme in 2025.
Express Investigation by: Harikishan Sharma
मोदी से समस्या उनके द्वारा किए जा रहे तुष्टिकरण से नहीं है। वो तो हम बारह वर्षों से झेल रहे हैं। मोदी से जो समस्या है, वह आज और कल में @narendramodi हैंडल से किए गए पोस्ट में दिखता है।
ज्योतिबा फूले पर सात पोस्ट हुए हैं आज, पर मंगल पांडे के बलिदान दिवस को बिलकुल नकार दिया गया।
फुले स्वघोषित रूप से हिन्दू-घृणा करने वाला व्यक्ति था जो उसकी पुस्तक गुलामगीरी के पन्नों पर दिखती है। 1857 की क्रांति को ले कर उसके विचार क्या हैं, वह क्या PM को नहीं पता?
और मंगल पांडे का 1857 में योगदान, क्या नरेन्द्र मोदी केवल इस कारण से नकार गए क्योंकि उनके हिन्दू-विरोधी दलित नायकों की शृंखला में एक ब्राह्मण फिट नहीं होता?
हमारी समस्या यही है कि सवर्णों का योगदान मिटाया जा रहा है, ब्राह्मण विरोधियों को सरकारी प्लेटफॉर्म से वह सब बनाया जा रहा था जो वो कभी थे ही नहीं। ब्राह्मण यूनिवर्सिटी की दीवारों पर गाली सुनता है, नारों में लिंच होता है और सरकारी योजनाओं को फायनेंस करने में पिसता रहता है।
@PMOIndia@BJP4India और @RSSorg स्पष्ट तौर पर राष्ट्र में विभाजनकारी नीतियों को बढ़ा रहे हैं। आलोचना की डींगे मारने वाले नरेन्द्र का सत्य यह है कि वो पत्रकारों को हाउस अरेस्ट करवाते हैं। उनके निर्देश पर उन्मुक्त सोशल मीडिया को बाँधने के लिए मूर्खों से भरी संसदीय समिति अपनी अनभिज्ञता की विष्ठा सार्वजनिक करती है।
नरेन्द्र मोदी को निशिकांत दूबे जैसे चाटुकार ही चाहिए। वही उनको उचित उन्माद देते हैं। बाकी, साक्षात्कारों में ‘आलोचना होती रहनी चाहिए’ का धनिया छिड़कते रहिए।
As a Brahmin hearing that Brahmin politician didn't get a ticket is actually happy news for me. Absolutely no one speaks for us they enjoy the perks n nod to evrythng their masters say. Some like N.D. , work overtime to defend their masters but will happily sacrifice UCs
Name:- Rajesh Sethi
Caste:- Dalit
Occupation:- Rap*st
Achievement:- rap*d his own disabled daughter
not a single day goes without a dalit man RAPl*G little children and women, but yeah dalit lives matters no matter how degenerate these pests are
At this point it is a humiliation ritual for general castes if they are still voting BJP. It is not even treachery anymore. It is outright war against GCs.
It is upto GCs if they want to fight this war by purging this party or die in the name of political blindness.