"तड़पाओगे? तड़पा लो।
हम तड़प-तड़पकर भी तुम्हारे गीत गाएंगे।
ठुकराओगे? ठुकरा लो। हम ठोकर..."
बस यही हाल मेरे दलित समुदाय का है। आप इन्हें चाहे जितना भी लात-घूंसे, गाली, अपमान, दुत्कार... कर लीजिए, लेकिन ये मंदिर में पूजा और दर्शन करना नहीं छोड़ेंगे।
BJP की विधायक मैडम जय देवी कौशल भी मंदिर में पूजा और दर्शन करने गई थीं। जातीय श्रेष्ठताबोध से घिरे हुए हिंदुओं ने इन्हें अपमान का प्रसाद भेंट कर दिया। अब मैडम जी, पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर एवं इनका पूरा परिवार बहुत दुखी हैं। रो रहे हैं। काश, इन्होंने बाबासाहेब को पढ़ा होता, तो आज इन्हें अपमान का प्रसाद चखना नहीं पड़ता।
Lucknow के Eco Garden में बड़े पैमाने पर आरक्षण और एमबीबीएस सीट बचाओ को लेकर sc/st मेडिकल छात्रों का प्रोटेस्ट होने जा रहा है, बहुजन संगठन व राजनीतिक लोग ज्यादा से ज्यादा इन छात्रो का समर्थन देने पहुँचे, मीडिया बन्धु भी पहुंच कर इनकी आवाज बनने का काम करे ।
#jaibhim
यदि जाति प्रमाणपत्र जला दिए जाएँ और आरक्षण छोड़ दिया जाए, तो क्या हिंदू समाज जातियों के आधार पर हो रहे भेदभाव को छोड़ देगा?
क्या हिंदू जाति की सीमाओं से बाहर शादी करना शुरू कर देंगे? क्या तथाकथित नीची और ऊँची जातियों के बीच बिना किसी भेदभाव के शादियाँ होने लगेंगी? क्या ऊँची जाति की लड़की से शादी करने पर नीची जाति के लड़के की हत्या नहीं की जाएगी?
क्या UPSC में SC, ST और OBC अभ्यर्थियों के साथ जाति देखकर इंटरव्यू में भेदभाव, जानबूझकर कम अंक देना या उनकी रैंक गिराना बंद हो जाएगा? क्या JNU में SC, ST और OBC विद्यार्थियों को इंटरव्यू में शून्य अंक मिलना बंद हो जाएगा?
क्या SC, ST और OBC के साथ न्यायपालिका में भेदभाव समाप्त हो जाएगा? क्या सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में SC, ST और OBC के न्यायाधीश उनकी जनसंख्या के अनुपात में नियुक्त किए जाने लगेंगे? क्या जाति देखकर जज बनाना बंद हो जाएगा?
क्या निजी कंपनियाँ और संस्थाएँ SC, ST और OBC के लोगों को अपने बोर्ड मेंबर और कंपनी डायरेक्टर बनाएँगी?
क्या IIM और IIT में SC, ST और OBC प्रोफेसर नियुक्त होंगे? क्या दिल्ली विश्वविद्यालय में फैकल्टी नियुक्तियों में जातिगत भेदभाव समाप्त हो जाएगा?
क्या जाति के आधार पर आर्थिक और व्यावसायिक भेदभाव समाप्त हो जाएगा? क्या दलितों को होटल और अन्य व्यवसाय स्थापित करने में समान अवसर मिलेंगे? क्या दलित के होटल में हिंदू बिना किसी झिझक के नाश्ता, दोपहर का भोजन और रात का खाना खाएँगे? क्या देश में आर्थिक समानता आ जाएगी?
क्या जॉब मार्केट में जाति के आधार पर भेदभाव बंद हो जाएगा? जैसे आज ₹1 लाख या उससे अधिक वेतन वाली निजी और कॉरपोरेट नौकरियों में SC, ST और OBC की भागीदारी बहुत कम, लगभग नगण्य दिखाई देती है, क्या आरक्षण समाप्त करते ही यह असमानता खत्म हो जाएगी?
क्या छुआछूत के आधार पर हो रहा दलित उत्पीड़न रुक जाएगा?
क्या दलित महिला के हाथ से बना खाना स्कूल के बच्चे बिना किसी जातिगत भेदभाव के खा लेंगे?
सवाल सिर्फ आरक्षण का नहीं है। सवाल उस जाति व्यवस्था का है, जो आरक्षण के बिना भी समाज में मौजूद रहेगी।
निजी क्षेत्र में आरक्षण देश का सर्वोपरि मुद्दा होना चाहिए। इसमें किसी भी तरह की देरी राष्ट्र के लिए घातक है।
SC, ST और OBC समुदाय के युवाओं को शिक्षा और संस्थानों तक पहुंच का वास्तविक अवसर देना देश की प्रतिभा को सीमित करना नहीं है, बल्कि उसे व्यापक बनाना है।
आरक्षण विरोधी आरक्षण को “भीख” इसलिए कहते हैं ताकि आप आरक्षण लेने में शर्म महसूस करें, आपका मनोबल गिराया जा सके, आरक्षण को बदनाम किया जा सके और आप इसे छोड़ दें। इसके पीछे असली षड्यंत्र आपके अधिकारों को छीनना और आपको फिर से जाति व्यवस्था में गुलाम बनाए रखना है।
असम मुख्यमंत्री हेमंता विस्वा सरमा का बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में पानी मे जाकर दौरा।
60% हिंदू होने के बावजूद यूं ही नहीं बीजेपी प्रचंड बहुमत में आती है..
उसके पीछे हेमंता दा की कड़ी मेहनत एवं जनता के प्रति समर्पण शामिल है।