ये विशुद्ध अश्लीलता है!
बिहार बाढ़ से पीड़ित है, कई जाने चली गई है मगर एक आत्ममुग्ध बूढ़े के जन्मदिन पर करोड़ों के दिये बहा दिये गए!
मोदी जी शर्म भी नहीं आती?
पटना के जेपी गंगा पथ पर एक तरफ भाजपाई प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर चाटुकारिता में दीए जला रहे हैं, वहीं जेपी गंगा पथ के ही दूसरी तरफ बाढ़ से विस्थापित हुए लोगों की पेट की आग बुझाने के लिए भोजन की व्यवस्था को भी सम्राट सरकार द्वारा बंद कर दिया गया है!
लगता है केंद्र सरकार से केवल दीए जलाने भर का बजट मिला!
इंसानों के दर्द को घटाने का नहीं!
टेंट में रहने को लोग विवश हैं और भाजपाई भी अपनी चाटुकारिता में इन लोगों की अनदेखी कर दीए जलाने को विवश हैं! गुजराती मालिक को खुश जो करना है!
@yadavtejashwi #RJD
एक सुनहरा दौर था जब दूरदर्शी, शिक्षित, प्रगतिशील विवेकशील प्रधानमंत्री विदेश जाते थे तो उनके लिए बड़े-बड़े यूनिवर्सिटी में लेक्चर और खुली प्रेस कांफ्रेंस रखी जाती थी। वो जहाज में भी प्रेस वार्ता करते थे।
अब वाले गप्पू विदेश जाते है तो मेलोडी की बचकानी हरकत, अनर्गल तुकबंदी, उल्टे सीधे लिखे खरीदे हुए मेडल, म्यूजिक और नाचने-गाने के प्रोग्राम रखे जाते हैं। ये विदेश नीति तो हरगिज नहीं हो सकती।
शर्मनाक!
विश्वभर के आहत हुए सनातनियों एवं सच्चे मीडिया के संज्ञानार्थ :
- ये कैसी पाबंदी है कि आरोपियों का स्वागत पुलिस दरवाज़ा खोलके कर रही है।
- ड्राइवर फँसता तो मालिक भी फँसता।
- जिसका नाम अंतरिम रिपोर्ट में नहीं है, उसका अंतिम में कैसे होगा।
- जिसके ऊपर फोड़ा ‘ठीकरा’, वो तो रिपोर्ट के हिसाब से काफ़ी ‘ठीक रहा’
- अगर CDR निकाली जाए तो पता चलेगा सबसे ज़्यादा फोन भाजपा के लोगों के ही आए हैं जो भाजपा छोड़कर इधर आना चाहते हैं।
- जनता ने भाजपाइयों की नाकाबंदी कर दी है।
- जो लोग दूर से बैठकर आरोप लगा रहे हैं, लगता है उनकी भी इस महाकांड में हिस्सेदारी है। उनकी आमदनी की नहर बंद हो गई है, इसीलिए छटपटा रहे हैं
- सिर्फ़ खाँचा नहीं, पूरा ढांचा बदलना चाहिए।
- पूरा ट्रस्ट भंग होना चाहिए।
- सज़ा सिर्फ़ घोड़े या लगाम को नहीं, कोचवान को भी मिलनी चाहिए।
- जिम्मेदारी सिर्फ़ उसकी नहीं जिसको दी गई, बल्कि जिसने जिम्मेदारी दी उसकी भी तय होनी चाहिए।
- केवल इस्तीफ़े की लीपा-पोती से काम नहीं चलेगा। जो लोग हटे हैं, उनके हस्ताक्षर से हुए सभी भू-सौदों और अन्य कार्यों के लिए न्यायिक जांच बैठाई जाए।
- इस्तीफ़ा बच निकलने का रास्ता नहीं बनना चाहिए।
- दोषियों की भविष्य की गतिविधियों और आवागमन पर निगाह रखी जाए।
- इनके विदेश गमन पर पाबंदी लगाई जाए।
- यह 140 करोड़ भारतीयों के विश्वास का विषय है।
- आपस में 'निष्कलंक' होने की क्लीन चिट देने का खेल बंद हो।
- भ्रष्ट लोगों का काला सच सामने आ चुका है।
- भाजपा में भगदड़ मच गई है।
जो भाजपा का साथी, वो रामघाती।
शेष अगले अंक में…
"बिहार की जनता के नाम संदेश "
प्रिय साथियों,
आप सभी को राष्ट्रीय जनता दल के 30वें स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ! बिहार के करोड़ों लोगों के लिए 5 जुलाई का दिन विशेष महत्व रखता है क्योंकि 1997 को आज ही के दिन अनेक वरिष्ठ साथियों के साथ मिलकर हमने गरीबों, शोषितों, दबे कुचले वर्गों एवं अकलियतों के हक़ों और अधिकारों की प्राप्ति के लिए राष्ट्रीय जनता दल की स्थापना की थी। यह कोई साधारण दिन नहीं है। इस दिन बिहार एवं देश की राजनीति की दशा एवं दिशा का कायापलट हुआ था।
राष्ट्रीय जनता दल द्वारा गरीबों,शोषितो एवं आम जनमानस की भलाई के लिए किये गए संघर्ष, त्याग एवं बलिदानों के बारे में अगर मैं वर्णन करुं तो शब्द भी कम पड़ जाएंगे। बिहार में व्यापत सामाजिक एवं आर्थिक असमानता और फिरकापरस्ती को नेस्तनाबूद करने के साथ-साथ एक विकसित,मजबूत, समृद्ध, खुशहाल व समतामूलक बिहार के निर्माण के लिए राजद के असंख्यक निस्वार्थ कार्यकर्ताओं एवं वोटरों ने सेवा, त्याग, बलिदान और परिश्रम की देश भर में एक अनूठी मिसाल कायम की है। पार्टी के प्रति समर्पित इन कार्यकर्ताओं के खून-पसीने से ही पार्टी का विस्तार सम्भव हुआ है। यह हमारे कार्यकर्ताओं की ऊर्जा, दृढ़ संकल्प और समर्पण का ही परिणाम है कि प्रतिदिन राजद और मजबूती से आगे बढ़ रही है। पार्टी का हर दौर में साथ देने वाले तमाम नेताओं, साथियों और कार्यकर्ताओं को मैं तहे दिल से सलाम करता हूं।
राजद की प्राथमिकता और प्रतिबद्धता गरीब, पीड़ित, बहिष्कृत, कमज़ोर व मजलूम तबकों की वकालत रही है। बदलते दौर में भी हमारी राजनीति मूलतः सामाजिक आर्थिक ग़ैरबराबरी और फिरकापरस्ती के खिलाफ़ रही है। हमारे विकास का मॉडल चमकते हवाई अड्डे, आलीशान मॉल और चमचमाते होटलों तक सीमित नहीं रहता बल्कि विकास के हरेक पहलू में हम समाज के गरीब एवं आखिरी व्यक्ति की भागीदारी और उसकी हिस्सेदारी के लिए संकल्पित हैं। इन मॉल, होटलों और हवाई अड्डों का निर्माण करने वाले शिल्पकारों, कामगारों, कारीगरों और इनमें काम करने वाले कर्मचारियों एवं उनके परिजनों के जीवन में गुणात्मक तथा सकारात्मक परिवर्तन आए यही हमारा ध्येय है। इससे कम हमें किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।
हमने सामाजिक और राजनीतिक संरचना में व्याप्त असमानता के खिलाफ निरंतर संघर्ष कर अपने लोकतंत्र को व्यापक, समृद्ध और समावेशी बनाया है। अपनी इस यात्रा में हमने कई ऐसे मुक़ाम हासिल किये हैं जिनकी चार-पाँच दशक पूर्व कल्पना भी असंभव थी। लोहिया, जेपी, कर्पूरी और अंबेडकर के इन मूल्यों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता और प्रगाढ़ हुई है साथ ही हमने वो मंजिल हासिल की है जहाँ से अब आर्थिक और मनोवैज्ञानिक सबलीकरण की लड़ाई को मुकम्मल अंजाम तक ले जाना है। यह विरासत हमारी शक्ति भी है और पूँजी भी!
देश में तमाम जनवादी, प्रगतिशील, समाजवादी और लोकतान्त्रिक विचारधारा से लैस दलों पर निराशा के क्षणिक बादल छाये हैं। Compromised constitutional institutions, आक्रामक बाज़ार, वोटर ही नहीं निर्वाचित जनप्रतिनिधि खरीदने में पूंजी का असीमित उपयोग तथा दक्षिणपंथी प्रतिक्रियावादी राजनीति ने लोकतंत्र के अस्तित्व पर कई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। पिछड़ों की भागीदारी, शिक्षा और रोज़गार के अवसरों की समानता, अकलियतों के हक़ूक़,उनकी सुरक्षा,असमान विकास के मुद्दों तथा सरकार की नाकामियों को एक तथाकथित ‘हिंदुत्व के आवरण’ से ढंका जा रहा है।
साथियों, विगत कई राज्यों के चुनाव नतीजों की अगर पड़ताल करें तो मालूम होगा कि बीजेपी संवैधानिक संस्थाओं को कब्जे में लेकर संविधान को दरकिनार कर तानाशाही के बल पर देश को फिर से पीछे धकेलने का प्रयास कर रही है।हमारी राजनीति हमें इस परिस्थिति को स्वीकार करने की इजाज़त नहीं देती। अतः राजद के सभी साथियों को बिना वक़्त जाया किये इस ऐेतिहासिक भूमिका के लिए तैयार होना पड़ेगा।हर कार्यकर्ता और नेता को यह समझना होगा कि हमारा दल सिर्फ ‘चुनाव लड़ने की मशीन’ नहीं है।
समर्थक समूहों और अन्य प्रगतिशील वर्गों के साथ लगातार संपर्क रखकर यह भरोसा दिलाना होगा कि राजद उनके मुद्दों और चिंताओं के लिए संसद और सड़क दोनों ही जगह लड़ने में सक्षम है। साथियों, यह लड़ाई पिछली सारी लड़ाईयों से अलग होने वाली है क्योंकि यह लड़ाई ‘असंवेदनशील सम्पन्नता’ और ‘चेतन विपन्नता’ के बीच कि लड़ाई है।यह लड़ाई ‘मज़बूत’ और ‘मजबूर’ वर्गों के बीच की है,यह लड़ाई संवैधानिक संस्थाओं के असंवैधानिक तरीकों को ख़त्म करने की है,यह संघ और कोर्पोरेट घरानों की नयी जुगलबंदी के बीच की लड़ाई है।ये हिंदुस्तान में गरीबों, किसानों और वंचितों के अस्तित्व की लड़ाई है।अतः छोटी-मोटी चिंताओं और मतभेदों को ताक पर रखकर इस लड़ाई को मुकम्मल अंजाम तक ले जाने के लिए मिलकर लड़ना होगा।