समझे न तीरगी कि फ़ना मेरे साथ है
मैं हूँ चराग़-ए-असर, हवा मेरे साथ है।
जिनको ये ज़अ्म है कि ज़माना है उनके साथ,
वो जानते नहीं कि ख़ुदा मेरे साथ है।
— अम्बरीन हसीब अम्बर
Happy Birthday #Dr_Ambreen_Haseeb_Ambar#ustaadeishq
यक़ीन की सल्तनत थी और सुल्तानी हमारी,
दमकती थी किसी बोसे से पेशानी हमारी।
महकता था घने पेड़ों से वीराना हमारा,
निकल आती थी हर मुश्किल से आसानी हमारी।
हम इस ख़ातिर तेरी तस्वीर का हिस्सा नहीं हैं,
तेरे मंज़र में आ जाए न वीरानी हमारी।
— हम्माद नियाज़ी ❤️
#hammadniyazi#ustaadeishq
वही ताज है वही तख़्त है, वही ज़हर है वही जाम है
ये वही ख़ुदा की ज़मीन है, ये वही बुतों का निज़ाम है
मैं ये मानता हूँ मेरे दिए, तेरी आँधियों ने बुझा दिए
मगर एक जुगनू हवाओं में, अभी रौशनी का इमाम है
डा. बशीर बद्र 💔
#bashirbadr#ustaadeishq
ग़ज़ल के बादशाह बशीर बद्र साहब आज दुनिया ए फानी से कूच कर गये।
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलयहि राजिऊन।
भीगी हुई आँखों का ये मंज़र न मिलेगा
घर छोड़ के मत जाओ कहीं घर न मिलेगा।
-बशीर बद्र साहब 💔
जिस रोज़ दिल्ली में तरुण की हत्या हुई उसी रोज़ दिल्ली में चार और अन्य हिंदुओं की हत्या हुई। लेकिन उन चारों हत्या के आरोपी ‘दूसरे’ नहीं हैं, इसलिए हिंदू ख़तरे में नहीं आया। @DelhiPolice@CMODelhi@MCD_Delhi ने उन चारों हिंदुओं की हत्या के आरोपितों का घर भी नहीं गिराया। @vinod_bansal ने उन चारों हिंदुओं की हत्या के आरोपितों को जानवर भी नहीं बताया। उन चारों हिंदुओं की हत्या के आरोपितों को पीड़ित परिवार ने पाकिस्तान भेजने की मांग भी नहीं की! उन चारों हिंदुओं की हत्या पर किसी ललित शर्मा नामी नफ़रती जीव ने उन हत्यारोपितो के खून से होली खेलने का आह्वान भी नहीं किया। उन चारों हिंदुओं की हत्या पर कोई @Abhinav_Pan नामी शातिर संघी रिपोर्टिंग करने उनके घर नहीं गया। उन चारों हिंदुओं की हत्या पर किसी अभिनव ने उन हिंदुओं को कत्ल करने वाले उनके ही समुदाय के लोगों से सवाल नहीं किया कि उन्हें बचाने कोई आगे क्यों नहीं आया?
ऐसे ही कितने ही सवाल हैं, जो उन चारों हिंदुओं की हत्या के बाद उनकी चिता के साथ ही धुआँ बनकर उड़ गए। सबसे बड़ा सवाल तो बुलडोजर का है! उत्तम नगर में एक हिंदू मारा गया तो सरकार ने आरोपी का घर गिरा दिया। उसी रोज़ चार और हिंदू मारे गए तो सरकार ने चुप्पी साध ली। जो सरकार ‘दूसरे’ अपराधी हत्यारों का घर गिरवाकर खुद ही इबारत लिखती है, वही सरकार ‘अपने’ अपराधी हत्यारों का घर नहीं गिराकर एक और इबारत लिखती है। इबारत यह कि अगर पीड़ित ‘अपना’ है और आरोपी ‘दूसरा’ है तो उसका घर गिरा दिया जाएगा, एनकाउंटर कर दिया जाएगा। अगर पीड़ित भी अपना है और आरोपी भी अपना है, तब सामान्य कार्रावाई होगी। अगर पीड़ित ‘दूसरा’ है और आरोपी ‘अपना’ है तब पीड़ित की रिपोर्ट भी बमुश्किल दर्ज होगी।
यह मदर ऑफ डेमोक्रेसी की निष्पक्षता है! मदर ऑफ डेमोक्रेसी के अफसर नेता शपथ लेते हैं कि वो बिना अनुराग एवं द्वेष का कर्तव्य निर्वहन करेंगे। लेकिन वास्तविक अमल कुछ और ही रहता है।
Tarun, in Delhi, was k!lled by muslims allegedly over water balloon issue on Holi
- the accused were arrested
- their home set on fire
- then it was bulldozed
Now look at the case of Unaiz Khan.
- He was k!lled by his Hindu friend
- Police says it was accident
- Any bulldozer action?
- Any hashtags?
- Any reels?
And the l¥nching of muslims happens on a daily basis but their news rarely make the headlines.