अरे! 😮
अटल और मोदी ने मिलकर इतने सारे मन्दिर बना दिय���? और लेहरू जी व मौनमोहन ने इतने अस्पताल बनवाए कि बनवाते बनवाते विदेशी धरती भी कम पड गयी। 😑
लेकिन हमने अस्पताल के लिए वोट दिये ही कब थे?
राकेश डकैत ने अम्बानी को कोसने और ऑक्सीजन की गाड़ियों का रास्ता रुकवाने के अलावा कोविड से निपटने में कोई सहयोग किया हो तो बताओ।
ऊपर से बीस हजार लोगों को और बुला लिया ताकि और ऑक्सीजन की गाड़ियां रोकी जा सकें।
मुंबई के श्री स्वामीनारायण मंदिर को कोविड अस्पताल में बदल दिया गया है । वहाँ पर इलाज कराने वाले सभी बीमारों का ख़र्च भी मंदिर ही उठाएगा ।
आपने मंदिर को आगे आते तो देखा होगा, कभी किसी मस्जिद या मदरसे चर्च को आगे आते देखा है क्या?
@yojak_IND @ippatel Bhai jinki kitabon me ye likha ho ke dusre dharm ko manne walo ko narak me dalo dusre dharm ki aurat joki Musalmani nhi hain vo randi se bhi agi gujri aap ek kam kro youTube pe neram atri ko suno bohot acha kam kiya hain unhone
@equbal_fahmi Wah wah 😂😂😂😂 ulta chor sahi kha musalmaan kuch galat nhi krta caa ke khilaaf protest nrc ke khilaaf protest joker nalayak ka andhbhakt 3 talak halaala road pe namaz cow ko mrna
@yojak_IND @ippatel Bhai Allah mohummad ki soch hain aap ek bar quran padho Hadith padho agar nhi padh sakte time nhi hain toh understanding mohummad pafho
जिस प्रकार नफरती कीडा अमानतुल्ला का कुलबुला रहा है उसके संकेत यही कहते हैं कि अब वो लोग देश में हर सच बोलने वाले को जिबह करने की पूरी तैयारी में हैं।
केजरीवाल के नेता पहले भी दिल्ली में हिन्दुओं को जिबह कर चुके हैं।
क्या आप सच के साथ हैं?
#मैं_नरसिंहानंद_जी_के_साथ_हूं h
@FaizanK61624289 @its_dheer_07@AjayKum88711375@sajwani Aur me tumhara 400+ example de sakta hoon musalamaanon ke hinduon ko marne ka sabse pahle toh 300 ya 400 saal pahele tumhara dada pardada ko maar mar ke islamic banay
जो कहते हैं कि डॉक्टर का कोई धर्म या मजहब नही होता वो जरा ये ट्वीट ध्यान से देख लें।
@zoo_bear सही कहता है कि कुछ लोग आज भी हिन्दू मुस्लिम में ही उलझे हैं।
लेकिन वो इस सच को कभी नही बताएगा।
@AchAnkurArya ‘गुनाह’ एक उर्दू शब्द है तो ‘गुनाहों का देवता’ क्यूँ,
‘गुनाहों का खुदा’ क्यूँ नहीं?
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‘हवस’ भी उर्दू शब्द है तो ‘हवस का पुजारी’ क्यूँ, ‘हवस का मौलाना’ क्यूँ नहीं..?..