सवर्णों को ध्यान रखना होगा कि वह किसी भी सवर्ण नेता के पार्टी बदलने, टिकट न मिलने, या किसी का अध्यक्ष बनने या टिकट मिलने पर बंधाई या मातम न मनाएं? क्योंकि इनके होने न होने से कोई फर्क नहीं है यह सत्तालोलुप लोग हैं, इन्हे कुर्सी प्यारी है इन्हें समाज से घंटा फर्क नहीं पड़ता है।
सवर्णों को ध्यान रखना होगा कि वह किसी भी सवर्ण नेता के पार्टी बदलने, टिकट न मिलने, या किसी का अध्यक्ष बनने या टिकट मिलने पर बंधाई या मातम न मनाएं? क्योंकि इनके होने न होने से कोई फर्क नहीं है यह सत्तालोलुप लोग हैं, इन्हे कुर्सी प्यारी है इन्हें समाज से घंटा फर्क नहीं पड़ता है।
समाज के नाम पर सिर्फ दलित और पिछड़े नेता ही अच्छे हैं, जो किसी भी दल में रहे अपने समाज के लिए मुखर रहेंगे।
इसीलिए हम नेताओं की गुलामी और जिंदाबाद करने से बचें, उतनी ऊर्जा अपने समाज के हक और अधिकारों की बात करने वाले सोशलिस्ट लोगों की साथ दें, और खुद उठाएं, तभी परिवर्तन आएगा इन नेताओ की वजह से तुम्हारा उद्धार नहीं होगा।
श्री मोदी जी के हिन्दुत्ववादी कालखंड में स्कूल की पुस्तकों में ईसाइयों का गुणगान यह कह कर हो रहा है कि कन्वर्जन के बाद लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन हुए।
“दूसरे शब्दों में कहें तो ईसाईयत भारत में दीर्घकालिक (सकारात्मक) परिवर्तनों का उद्गम रहा है।”
हमें ये तो अनुमान था कि सवर्णों का वोट लेने के लिए मोदी और भीम आर्मी के चंदू में डील होगी कि भीमटो से सवर्णों पर अभद्र टिप्पणी करवाओ फिर भीमटो को जेल भेजो इससे सवर्ण बीजेपी को वोट कर देगा, लेकिन ये अनुमान नहीं था कि चंदू को जेल भेजने वाली डील हो सकती है,,,,,,, सावधान सवर्णों
@Princechau69471 उतनी ऊर्जा अपने समाज के हक और अधिकारों की बात करने वाले सोशलिस्ट लोगों की साथ दें, और खुद उठाएं, तभी परिवर्तन आएगा इन नेताओ की वजह से तुम्हारा उद्धार नहीं होगा।
@Princechau69471 सवर्णों को ध्यान रखना होगा कि वह किसी भी सवर्ण नेता के पार्टी बदलने, टिकट न मिलने, या किसी का अध्यक्ष बनने या टिकट मिलने पर बंधाई या मातम न मनाएं? क्योंकि इनके होने न होने से कोई फर्क नहीं है यह सत्तालोलुप लोग हैं, इन्हे कुर्सी प्यारी है इन्हें समाज से घंटा फर्क नहीं पड़ता है।
@Princechau69471 समाज के नाम पर सिर्फ दलित और पिछड़े नेता ही अच्छे हैं, जो किसी भी दल में रहे अपने समाज के लिए मुखर रहेंगे।
इसीलिए हम नेताओं की गुलामी और जिंदाबाद करने से बचें,
उतनी ऊर्जा अपने समाज के हक और अधिकारों की बात करने वाले सोशलिस्ट लोगों की साथ दें, और खुद उठाएं, तभी परिवर्तन आएगा इन नेताओ की वजह से तुम्हारा उद्धार नहीं होगा।
सवर्णों को ध्यान रखना होगा कि वह किसी भी सवर्ण नेता के पार्टी बदलने, टिकट न मिलने, या किसी का अध्यक्ष बनने या टिकट मिलने पर बंधाई या मातम न मनाएं? क्योंकि इनके होने न होने से कोई फर्क नहीं है यह सत्तालोलुप लोग हैं, इन्हे कुर्सी प्यारी है इन्हें समाज से घंटा फर्क नहीं पड़ता है।
सवर्णों को ध्यान रखना होगा कि वह किसी भी सवर्ण नेता के पार्टी बदलने, टिकट न मिलने, या किसी का अध्यक्ष बनने या टिकट मिलने पर बंधाई या मातम न मनाएं? क्योंकि इनके होने न होने से कोई फर्क नहीं है यह सत्तालोलुप लोग हैं, इन्हे कुर्सी प्यारी है इन्हें समाज से घंटा फर्क नहीं पड़ता है।
समाज के नाम पर सिर्फ दलित और पिछड़े नेता ही अच्छे हैं, जो किसी भी दल में रहे अपने समाज के लिए मुखर रहेंगे।
इसीलिए हम नेताओं की गुलामी और जिंदाबाद करने से बचें, उतनी ऊर्जा अपने समाज के हक और अधिकारों की बात करने वाले सोशलिस्ट लोगों की साथ दें, और खुद उठाएं, तभी परिवर्तन आएगा इन नेताओ की वजह से तुम्हारा उद्धार नहीं होगा।
समाज के नाम पर सिर्फ दलित और पिछड़े नेता ही अच्छे हैं, जो किसी भी दल में रहे अपने समाज के लिए मुखर रहेंगे।
इसीलिए हम नेताओं की गुलामी और जिंदाबाद करने से बचें,
यूपी में ब्राह्मण CM चाहिए तो सवर्णों, खासकर ब्राह्मणों को कांग्रेस पर विचार करना चाहिए।
इतिहास में ब्राह्मण CM देने का रिकॉर्ड कांग्रेस के पास है,
बाकी दोनों दलों में ठाकुर नेतृत्व,यादव नेतृत्व।
ऐसे में अगर लक्ष्य ब्राह्मण CM है,तो कांग्रेस ही सबसे व्यावहारिक विकल्प नजर आती है
⚖️ कानून सबके लिए समान हो।
SC/ST Act को लेकर हमारी मांग है कि जाति के आधार पर अलग कानूनी व्यवस्था की जगह सभी नागरिकों के लिए समान आपराधिक कानून लागू हो।
किसी भी निर्दोष को झूठे मुकदमे से सुरक्षा मिले और वास्तविक पीड़ित को मजबूत न्याय मिले।
👉 समानता का मतलब—कानून की नजर में सब बराबर।
#SCSTAct #GeneralAct #EqualityBeforeLaw #ReservationReform
पूर्व जज यशवंत वर्मा के खिलाफ FIR की मांग सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए ठुकरा दी कि वह “Wild Witch Hunt” नहीं करना चाहते।
यशवंत वर्मा चाहते थे कि उनका Impeachment हो ताकि सच सामने आए, लेकिन अंततः उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
वही नरोत्तम मिश्रा की बात कर रहा है ना जिन्होंने कभी यूजीसी और आरक्षण के मुद्दे पर कभी जवान ही नहीं खोली जब जवान खोली तो इस बात पर की पार्टी में उन्हें किनारे क्यों लगा दिया।
12% ब्राह्मण है मध्यप्रदेश मे,
और 1% वाला मुख्यमंत्री है,
नरोत्म मिश्रा ब्राह्मण है और उनका बढ़ता प्रभाव देख के BJP उन्हें साइड कर दी,
मध्यप्रदेश के 25% सवर्ण को साथ ले के एक पार्टी बनाना चाहिए नरोत्म मिश्रा जी को,
क्योंकि BJP अब उन्हें कुछ नही देने वाली है,
Does anyone know how many times Maha Manav travelled to the US and Europe after the ACYPL picked him up for the #BhikshaTour of the US in 1993?
As part of Bhiksha, the ACYPL training ensured that in 1995, Modi was appointed the secretary of the BJP's national organisation in New Delhi.
In 1998, he was promoted to the post of National General Secretary of the BJP!
These promotions came despite the fact that most BJP leaders of Gujarat hated his devious and destructive ways so much that, in 1995, at the insistence of all the senior BJP leaders, including current and past chief ministers of Gujarat, PM Vajpayee agreed to ban Modi's entry into Gujarat. In short, he was externed and politically banished from his home state.
He was accused of promoting internal warfare between senior BJP leaders and interfering in the affairs of the govt even though he was only a party secretary.
For six long years, Modi was not allowed entry into Gujarat.
And yet, in October 2001, Modi was air dropped as chief minister of Gujarat, despite tough resistance and opposition by senior-most BJP leaders.
It is now clear that ACYPL and other videshi handlers of Modi ensured that PM Vajpayee and Advani, much against their own wishes, were forced to appoint Modi as chief minister of Gujarat. Hardly any BJP leader wanted him back.
In short, as part of #ACYPLBHIKSHA Modi got the CM's post in 2001.
So pleased was the American Deep State with Modi's obedient performance as Gujarat CM that, that over riding the wishes of ALL the national leaders of the BJP, Modi was fielded as a PM candidate in 2014.
Vajpayee, Advani, Gadkari et all knew that, as in Gujarat where he finished of all tall leaders of BJP, he would do the same with the national level BJP leaders.
Needless to say, the American Deep State ensured that leftists, Islamists and foreign-funded NGOs attacked him relentlessly as a Hindutva fascist.
The Bhiksha Givers of Modi unleashed a clever fake narrative about Modi being a kattar opponent of Islam and Christianity, even while he pampered them silly.
But naive Hindus fell for it thinking he would save Hindus from Islamic tyranny and the Conversion Mafia. Hindus in geneeral and Brahmins, Rajputs, Banias, OBCs etc ensured that Modi led BJP got a resounding mandate in the 2014 General election.
I am the only one who partly understood the Deep State's fake narrative peddled through the likes of Teesta Setalvad and documented Modi's generous treatment of Islamists and Christians in my book, Modi Muslims and Media.
But at the time of writing of my book, even i failed to comprehend that Modi actually hates Hindus.
It took a couple of more years to realize that he has been set up to tear asunder our social fabric and promote a civil war within Hindu society in order to assist the Conversion Mafias to wipe Hindus out.