More than 300 Opposition MPs marched from Parliament to the Election Commission today to meet the Election Commissioners.
We represent crores of Indians.
- Why aren't the Election Commissioners meeting us?
- Why is the police stopping and threatening us?
How did Gyanu modify Form 6 without the Supreme Court’s approval? On whose orders did he do it?
This makes one thing clear: Gyanu was not acting independently. He was serving his political bosses, even if it meant putting their interests above the rule of law.
Gyanu is the biggest traitor of India.
महाराष्ट्र के छात्र फडणवीस सरकार की शिक्षा व्यवस्था और अन्याय से त्रस्त हैं।
आदिवासी छात्र अपनी माँगें लेकर मुंबई पहुँचे - कुछ बस से, और कुछ पैदल चलकर।
उनकी माँगें क्या हैं? आदिवासी आश्रमशालाओं और छात्रावासों में बुनियादी सुविधाएँ। छात्रवृत्ति। वही चीज़ें जो किसी भी बच्चे का हक़ हैं।
मुंबई में रुकने की जगह नहीं थी, तो कांग्रेस ने उन्हें तिलक भवन में ठहराया। और आज सुबह होने से पहले - पुलिस कांग्रेस कार्यालय के अंदर घुसी और इन बच्चों को उठाकर ले गई। आज़ाद मैदान पर प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही। जो बच्चे नासिक से पैदल चलकर आए, उनको ये जवाब मिला।
उधर पुणे में MPSC के अभ्यर्थी सत्याग्रह पर बैठे हैं। ये माँगें नई नहीं हैं - मैंने मुख्यमंत्री फडणवीस से इन पर बात की थी। तब कुछ नहीं हुआ। इसीलिए आज ये बच्चे सड़क पर हैं।
मैं और कांग्रेस पार्टी महाराष्ट्र के छात्रों के साथ खड़े हैं। हम एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे।
It is now established beyond doubt that Gyanesh Kumar changed Form 6 illegally and unilaterally.
This is just one more proof of him abusing his position to help the BJP.
He and everyone else involved in this criminal assault on our democracy will be held accountable.
कांग्रेस पार्टी की 3 माँगे non-negotiable हैं।
पहली, ज्ञानेश कुमार का इस्तीफ़ा
दूसरी, SIR को रद्द करना
तीसरी, Ballot Paper पर चुनाव कराना
देशभर में कांग्रेस कार्यकर्ता और INDIA गठबंधन के साथी इन तीन मुद्दों को लेकर सड़कों पर हैं।
जो भी Civil Society Members व Youth Organisations इन मुद्दों पर देश में जगह-जगह संघर्ष कर रहे हैं, हम उनके साथ हैं।
दूसरी ओर भाजपा ने दिल्ली में महिला पत्रकारों का उत्पीड़न किया, वो बेहद निंदनीय है।
तानाशाह बहुत घबराया हुआ है, ध्यान भटकाने के एक और अध्याय के लिए तैयार रहिए।
MPSC च्या ढिसाळ कारभारामुळे बेजार झालेल्या आणि आपल्या हक्कांसाठी लढा देणाऱ्या या अभ्यासू आणि बुद्धिमान विद्यार्थ्यांना… तुफानातल्या दिव्यांना लवकरात लवकर न्याय मिळायलाच पाहिजे…
सरकारने लवकरात लवकर चर्चा करून, सर्व रास्त मागण्या पुर्ण करून मार्ग काढावा!
#MPSC_विद्यार्थी_सत्याग्रह
कहीं छात्र पेपर लीक के ख़िलाफ़ आंदोलन कर रहे हैं।
कहीं किसान अपनी ज़मीन के लिए लड़ रहे हैं।
कहीं आशा कार्यकर्ता महीनों से मानदेय की मांग कर रही हैं।
कहीं आदिवासी अपने जंगल बचाने के लिए खड़े हैं।
हर आंदोलन अपनी अलग लड़ाई लड़ रहा है इसलिए हर आंदोलन को लगता है कि वो अकेला है।
इसलिए 'सत्याग्रह' - आपका आंदोलन जहाँ भी चल रहा हो, उसकी बात सीधे मुझ तक पहुँचाइए। दो मिनट लगेंगे - दिल्ली आने की ज़रूरत नहीं।
आपका आंदोलन नक्शे पर आ जाएगा - और आप देख पाएँगे कि देश में और कौन-कौन वही लड़ाई लड़ रहा है।
बिखरे हुए आंदोलन दबा दिए जाते हैं। जुड़े हुए आंदोलन सरकारें झुका देते हैं।
👉 https://t.co/hJ8iARr5La
If Gyanesh Kumar doesn’t resign, cockroaches from across India will march to Delhi & protest at Jantar Mantar on October 10.
If Delhi Police tries to stop us, wherever they stop us will become our Jantar Mantar..
Ours will be a peaceful andolan. We will walk on the path shown by Mahatma Gandhi. It is up to the Govt & the Delhi Police whether they respect our right to peaceful protest or repeat the brutality we witnessed on July 20.
This is a fight to save our democracy. Every citizen who wants free & fair elections must join.
Thank you, Mumbai Police, for your cooperation today. Salute to all the police personnel who were on duty! Jai Hind🇮🇳
Delhi Police, seekh lo kuch Mumbai Police se. 🙂
आज गांधी जयंती है।
और आज ही, हज़ारों नौजवान वोट चोरी के ख़िलाफ़ सड़कों पर हैं - शांतिपूर्वक, बिना हिंसा के, अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करते हुए।
उनकी माँग साफ़ है: ज्ञानेश कुमार इस्तीफ़ा दें। लोकतंत्र बचाओ।
और Modi-Shah सरकार का जवाब? लड़के-लड़कियों को सड़कों पर घसीटा जा रहा है। सैकड़ों हिरासत में हैं। उनका कसूर सिर्फ़ यह कि उन्होंने वोट चोरी पर सवाल पूछा।
बापू ने यही सिखाया था - सच बोलो, शांति से लड़ो। और यही सरकार को सबसे ज़्यादा डराता है।
क्योंकि लाठी से भीड़ रोकी जा सकती है, सवाल नहीं।
ज्ञानेश कुमार जाएँगे। और जिस सिस्टम ने उन्हें बिठाया है, वो भी जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने ऐसा कानून पास कराया है जिसमें भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त एवं चुनाव आयुक्त को जीवन में कभी भी (पद पर रहते अथवा पद से हटने के बाद) जेल नहीं हो सकती, उसे आख़िरी साँस तक गिरफ्तार भी नहीं किया जा सकता, पूछताछ भी नहीं हो सकती।
यह विशेषाधिकार तो पद से हटने के बाद देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और जज के पास भी नहीं है लेकिन मोदी-शाह ने चुनाव आयुक्त के लिए यह खास क़ानून बनवाया क्योंकि उसी से चुनाव में चोरी, डकैती, धांधली और ठगी करवानी है। EVM में हेरफेर कर ईवीएम बदलवाना और जलवाना है। मतदान के दिन सरकारी खजाना लुटवाना है। विपक्षियों के नाम कटवाने और भाजपाइयों के फ़र्जी वोटर जुड़वाने है।
ये लोग लोकतंत्र के कसाई है। बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान के हत्यारे है।
मेरी सुप्रीम कोर्ट से एक और उम्मीद है जिस तरह जनता से हर गलती का हिसाब लिया जा रहा है, उसी तरह जनता के नुकसान का हिसाब भी तय हो।
सड़क में गड्ढा मिले, खराब सड़क की वजह से accident हो, घंटों traffic में फँसकर fuel जले, घटिया construction कुछ महीनों में टूट जाए तो इसका जिम्मेदार कौन? उसकी भी वसूली क्या ठेकेदार और Company के बिजली बिल या Payment से काटेंगे?
माननीय Court से एक और अनुरोध है इतने सारे लंबित Case है कई लोग न्याय के इंतजार में है उसका भी कोई सुझाव का इंतजार रहेगा सालों से न्याय के लिए दबी file और Case का क्या होगा ?