बहुत कम लोग जानते हैं कि अभिनेता गोविंदा की माँ निर्मला देवी जी 1940 के दशक की फ़िल्म अभिनेत्री होने के साथ-साथ एक बेहतरीन हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायिका भी थीं। इस दुर्लभ वीडियो में सुनिए उनकी ख़ूबसूरत गायकी।
“जिद का तुम्हारे जो पर्दा सरकता तो खिडकियों से आगे भी तुम देख पाते.”
डॉक्टर-इंजीनियर से आगे कुछ न देखने की सामाजिक-पारिवारिक ज़िद्द और इसके बीच कश्मकश। इसे बताती उड़ान कितनी शानदार फ़िल्म थी।
मछलियों को लगता था
कि जैसे वे तड़पती हैं पानी के लिए
पानी भी उनके लिए तड़पता होगा
लेकिन जब खींचा जाता है जाल
तो पानी मछलियों को छोड़कर
जाल से निकल भागता है
—नरेश सक्सेना
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