गाजियाबाद: नगर निगम की घोर लापरवाही के कारण ट्रांस हिंडन क्षेत्र के वार्ड नंबर 10 स्थित डीएलएफ कॉलोनी (सी-94, मेन रोड) में एक बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। स्थानीय निवासियों और राहगीरों के सिर पर हर वक्त मौत मंडरा रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।
डीएलएफ कॉलोनी के मेन रोड पर भवन संख्या सी-94 के सामने सीवर की लाइन फटी हुई है। इसके कारण हर समय सड़क पर सीवर का गंदा और बदबूदार पानी बहता रहता है। इस जलजमाव की वजह से राहगीरों और वाहन चालकों को आवाजाही में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बिजली का पोल झुका, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
सबसे चिंताजनक बात यह है कि सीवर का पानी ठीक बिजली के खंभे की जड़ में जमा हो रहा है। लगातार पानी भरे रहने के कारण खंभे की नींव पूरी तरह कमजोर हो चुकी है और बिजली का यह खंभा अब मुख्य सड़क की तरफ काफी झुक गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पोल कभी भी सड़क से गुजर रहे किसी राहगीर या वाहन पर गिर सकता है, जिससे कोई अप्रिय घटना या जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है।
शिकायतों के बाद भी मूकदर्शक बना प्रशासन
क्षेत्रीय निवासियों का आरोप है कि इस गंभीर समस्या के बारे में नगर निगम के उच्च अधिकारियों, सीवर विभाग, वार्ड के सुपरवाइजर और क्षेत्रीय पार्षद को कई बार लिखित व मौखिक शिकायतें दी जा चुकी हैं। इसके बावजूद अधिकारी समस्या को नजरअंदाज कर रहे हैं। किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने अब तक स्थिति का जायजा लेकर इसका कोई ठोस समाधान नहीं निकाला है।
निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि नगर निगम प्रशासन ने समय रहते सीवर लाइन की मरम्मत और बिजली के पोल को ठीक नहीं कराया, तो वे सड़कों पर उतरकर विरोध-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार करता है या समय रहते कोई ठोस कदम उठाता है। @GzbNagarNigam@AMRUTCityGzb@dm_ghaziabad@CMOfficeUP@HMOIndia@UPGovt@PMOIndia :- संबंधित अधिकारी हेतु मामले की जांच कर कार्यवाही के संदर्भ में।
गाजियाबाद: नगर निगम की घोर लापरवाही के कारण ट्रांस हिंडन क्षेत्र के वार्ड नंबर 10 स्थित डीएलएफ कॉलोनी (सी-94, मेन रोड) में एक बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। स्थानीय निवासियों और राहगीरों के सिर पर हर वक्त मौत मंडरा रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।
डीएलएफ कॉलोनी के मेन रोड पर भवन संख्या सी-94 के सामने सीवर की लाइन फटी हुई है। इसके कारण हर समय सड़क पर सीवर का गंदा और बदबूदार पानी बहता रहता है। इस जलजमाव की वजह से राहगीरों और वाहन चालकों को आवाजाही में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बिजली का पोल झुका, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
सबसे चिंताजनक बात यह है कि सीवर का पानी ठीक बिजली के खंभे की जड़ में जमा हो रहा है। लगातार पानी भरे रहने के कारण खंभे की नींव पूरी तरह कमजोर हो चुकी है और बिजली का यह खंभा अब मुख्य सड़क की तरफ काफी झुक गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पोल कभी भी सड़क से गुजर रहे किसी राहगीर या वाहन पर गिर सकता है, जिससे कोई अप्रिय घटना या जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है।
शिकायतों के बाद भी मूकदर्शक बना प्रशासन
क्षेत्रीय निवासियों का आरोप है कि इस गंभीर समस्या के बारे में नगर निगम के उच्च अधिकारियों, सीवर विभाग, वार्ड के सुपरवाइजर और क्षेत्रीय पार्षद को कई बार लिखित व मौखिक शिकायतें दी जा चुकी हैं। इसके बावजूद अधिकारी समस्या को नजरअंदाज कर रहे हैं। किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने अब तक स्थिति का जायजा लेकर इसका कोई ठोस समाधान नहीं निकाला है।
निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि नगर निगम प्रशासन ने समय रहते सीवर लाइन की मरम्मत और बिजली के पोल को ठीक नहीं कराया, तो वे सड़कों पर उतरकर विरोध-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार करता है या समय रहते कोई ठोस कदम उठाता है। @GzbNagarNigam@AMRUTCityGzb@dm_ghaziabad@CMOfficeUP@HMOIndia@UPGovt@PMOIndia :- संबंधित अधिकारी हेतु मामले की जांच कर कार्यवाही के संदर्भ में।
मेरठ: नशे में धुत तीन सिपाहियों ने चौकीदारों से की मारपीट और मोबाइल तोड़ा, एसएसपी ने किया निलंबित; थाना इंचार्ज की भूमिका पर भी उठे सवाल।
मेरठ (उत्तर प्रदेश): परीक्षितगढ़ थाना क्षेत्र की आसिफाबाद पुलिस चौकी पर तैनात तीन सिपाहियों को ड्यूटी में लापरवाही, शराब के नशे में अभद्रता और गश्त कर रहे चौकीदारों के साथ मारपीट के गंभीर आरोपों के बाद तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसएसपी बीबीजीटी एस मूर्ति द्वारा यह कार्रवाई सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और पीड़ितों की लिखित शिकायत के आधार पर की गई है।
क्या है पूरा मामला?
समसपुर गांव निवासी चौकीदार शिवाकांत गिरी और नितिन गिरी के अनुसार, 26 सितंबर की देर रात (लगभग ढाई बजे) वे बाजार में अपनी नियमित गश्त और पहरा दे रहे थे। इसी दौरान आसिफाबाद चौकी पर तैनात तीन सिपाही—विक्रम, आशीष कुमार और सूरजेश—वहां पहुंचे। आरोप है कि तीनों सिपाही अत्यधिक नशे की हालत में थे और उन्होंने बिना किसी कारण चौकीदारों के साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी।
जब पीड़ित चौकीदार ने पुलिसकर्मियों की इस अनैतिक हरकत का वीडियो बनाने का प्रयास किया, तो सिपाहियों ने उसका मोबाइल फोन छीनकर जमीन पर पटक दिया और तोड़ दिया, ताकि साक्ष्य मिटाया जा सके।
थाना प्रभारी (SHO) की भूमिका पर भी जांच की मांग
इस घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और सम्मानित लोगों में भारी रोष है। क्षेत्रवासियों ने उच्च अधिकारियों का ध्यान परीक्षितगढ़ थाना प्रभारी (SHO) की कार्यशैली की ओर आकर्षित कराते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि:
थाना प्रभारी का अपने मातहत कर्मचारियों और स्टाफ पर कोई प्रशासनिक नियंत्रण या कमान नहीं है।
वे स्वयं कई बार अपनी ड्यूटी से गैर-जिम्मेदाराना तरीके से अनुपस्थित रहते हैं।
उन पर पहले भी निर्दोष लोगों को झूठे मुकदमों में फंसाने और रिश्वत लेकर केस से नाम निकालने जैसे गंभीर आरोप लगते रहे हैं।
जन-अधिकारों का हनन और अनिवार्य कानूनी कार्रवाई की मांग
सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले पुलिसकर्मियों द्वारा ही रात्रिकालीन सुरक्षा में तैनात सह-कर्मियों (चौकीदारों) के साथ हिंसा और मोबाइल छीनने जैसी हरकत कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। इस मामले में केवल विभागीय निलंबन को नाकाफी बताते हुए निम्नलिखित कठोर कदमों की मांग की गई है:
अपराधिक मुकदमा (FIR) दर्ज हो: मोबाइल छीनना और तोड़ना भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत छीना-झपटी (Snatching), संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और आपराधिक धमकी की श्रेणी में आता है। दोषी सिपाहियों पर नामजद प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए।
साक्ष्य मिटाने की धाराएं जुड़ें: वीडियो बना रहे व्यक्ति का फोन छीनकर तोड़ना सीधे तौर पर सबूत नष्ट करने का प्रयास है, अतः इस आधार पर अतिरिक्त धाराएं जोड़ी जाएं।
सेवा से बर्खास्तगी: विभागीय जांच तेजी से पूरी कर दोषी पाए जाने पर सिपाहियों को सेवा से बर्खास्त किया जाए।
मुआवजा व क्षतिपूर्ति: पीड़ित का टूटा हुआ मोबाइल फोन वापस कराया जाए या सिपाहियों के वेतन से कटौती कर पीड़ित को उचित मुआवजा दिया जाए।
पर्यवेक्षण में चूक पर जवाबदेही: थाना प्रभारी (SHO) स्तर पर निगरानी और कमान में हुई चूक के लिए वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा जवाबदेही तय की जाए। @dgpup@Uppolice@UPGovt@CBIHeadquarters@digrangemeerut@adgzonemeerut@myogiadityanath@CMOfficeUP@HMOIndia@PMOIndia@homeupgov
मेरठ: नशे में धुत तीन सिपाहियों ने चौकीदारों से की मारपीट और मोबाइल तोड़ा, एसएसपी ने किया निलंबित; थाना इंचार्ज की भूमिका पर भी उठे सवाल।
मेरठ (उत्तर प्रदेश): परीक्षितगढ़ थाना क्षेत्र की आसिफाबाद पुलिस चौकी पर तैनात तीन सिपाहियों को ड्यूटी में लापरवाही, शराब के नशे में अभद्रता और गश्त कर रहे चौकीदारों के साथ मारपीट के गंभीर आरोपों के बाद तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसएसपी बीबीजीटी एस मूर्ति द्वारा यह कार्रवाई सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और पीड़ितों की लिखित शिकायत के आधार पर की गई है।
क्या है पूरा मामला?
समसपुर गांव निवासी चौकीदार शिवाकांत गिरी और नितिन गिरी के अनुसार, 26 सितंबर की देर रात (लगभग ढाई बजे) वे बाजार में अपनी नियमित गश्त और पहरा दे रहे थे। इसी दौरान आसिफाबाद चौकी पर तैनात तीन सिपाही—विक्रम, आशीष कुमार और सूरजेश—वहां पहुंचे। आरोप है कि तीनों सिपाही अत्यधिक नशे की हालत में थे और उन्होंने बिना किसी कारण चौकीदारों के साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी।
जब पीड़ित चौकीदार ने पुलिसकर्मियों की इस अनैतिक हरकत का वीडियो बनाने का प्रयास किया, तो सिपाहियों ने उसका मोबाइल फोन छीनकर जमीन पर पटक दिया और तोड़ दिया, ताकि साक्ष्य मिटाया जा सके।
थाना प्रभारी (SHO) की भूमिका पर भी जांच की मांग
इस घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और सम्मानित लोगों में भारी रोष है। क्षेत्रवासियों ने उच्च अधिकारियों का ध्यान परीक्षितगढ़ थाना प्रभारी (SHO) की कार्यशैली की ओर आकर्षित कराते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि:
थाना प्रभारी का अपने मातहत कर्मचारियों और स्टाफ पर कोई प्रशासनिक नियंत्रण या कमान नहीं है।
वे स्वयं कई बार अपनी ड्यूटी से गैर-जिम्मेदाराना तरीके से अनुपस्थित रहते हैं।
उन पर पहले भी निर्दोष लोगों को झूठे मुकदमों में फंसाने और रिश्वत लेकर केस से नाम निकालने जैसे गंभीर आरोप लगते रहे हैं।
जन-अधिकारों का हनन और अनिवार्य कानूनी कार्रवाई की मांग
सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले पुलिसकर्मियों द्वारा ही रात्रिकालीन सुरक्षा में तैनात सह-कर्मियों (चौकीदारों) के साथ हिंसा और मोबाइल छीनने जैसी हरकत कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। इस मामले में केवल विभागीय निलंबन को नाकाफी बताते हुए निम्नलिखित कठोर कदमों की मांग की गई है:
अपराधिक मुकदमा (FIR) दर्ज हो: मोबाइल छीनना और तोड़ना भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत छीना-झपटी (Snatching), संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और आपराधिक धमकी की श्रेणी में आता है। दोषी सिपाहियों पर नामजद प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए।
साक्ष्य मिटाने की धाराएं जुड़ें: वीडियो बना रहे व्यक्ति का फोन छीनकर तोड़ना सीधे तौर पर सबूत नष्ट करने का प्रयास है, अतः इस आधार पर अतिरिक्त धाराएं जोड़ी जाएं।
सेवा से बर्खास्तगी: विभागीय जांच तेजी से पूरी कर दोषी पाए जाने पर सिपाहियों को सेवा से बर्खास्त किया जाए।
मुआवजा व क्षतिपूर्ति: पीड़ित का टूटा हुआ मोबाइल फोन वापस कराया जाए या सिपाहियों के वेतन से कटौती कर पीड़ित को उचित मुआवजा दिया जाए।
पर्यवेक्षण में चूक पर जवाबदेही: थाना प्रभारी (SHO) स्तर पर निगरानी और कमान में हुई चूक के लिए वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा जवाबदेही तय की जाए। @dgpup@Uppolice@UPGovt@CBIHeadquarters@digrangemeerut@adgzonemeerut@myogiadityanath@CMOfficeUP@HMOIndia@PMOIndia@homeupgov
राजघाट पावर हाउस के पास ‘जसप्रीत गैस सर्विस’ में अवैध गैस कटिंग का खेल बेखौफ जारी, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल।
नई दिल्ली: राजघाट पावर हाउस नए कंचनपुरी बस डिपो के पास स्थिति 'जसप्रीत गैस सर्विस' इन दिनों अवैध गतिविधियों और सुरक्षा नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाने को लेकर विवादों में है। क्षेत्रीय चर्चाओं और सूत्रों के अनुसार, गैस एजेंसी परिसर में लंबे समय से बड़े पैमाने पर अवैध गैस कटिंग (सिलेंडरों से अवैध रूप से रिफिलिंग और गैस चोरी) का काला कारोबार बेखौफ फल-फूल रहा है। इस घोर लापरवाही से किसी बड़े हादसे की आशंका को लेकर स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इस पूरे अवैध कारोबार को कथित तौर पर गैस एजेंसी के मैनेजर अंकित और गोदाम कीपर राजू का संरक्षण प्राप्त है। सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे इस रिफिलिंग और कटिंग के खेल में रोशन, सूरज, मखमेंदर, लालाराम, शमीम, पप्पू और बंटी की मुख्य भूमिका बताई जा रही है। वहीं, स्थानीय सूत्रों का दावा है कि 'पिंटू' नामक व्यक्ति पूरे तंत्र का वित्तीय लेनदेन और अवैध वसूली संभालने का काम देखता है। घनी आबादी और बस डिपो के पास जारी यह खतरनाक गतिविधि किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व में भी दो बार समाचार प्रकाशित किए जा चुके हैं। जनशिकायत के बाद उच्च अधिकारियों की ओर से औपचारिक जवाब तो आया कि "जानकारी संबंधित अधिकारी को भेज दी गई है और जल्द कार्रवाई की जाएगी", लेकिन धरातल पर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। अधिकारियों का यह उदासीन रवैया अवैध कारोबारियों के हौसले पस्त करने के बजाय और बुलंद कर रहा है।
आस-पास के नागरिकों और पीड़ितों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि कागजी आश्वासनों से हटकर मौके पर निष्पक्ष छापेमारी की जाए। स्थानीय लोगों की मांग है कि:
अवैध रिफिलिंग और कटिंग में शामिल सभी आरोपितों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने पर एजेंसी के खिलाफ दंडात्मक कदम उठाए जाएं।
वित्तीय हेरफेर और अवैध वसूली में शामिल पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश किया जाए।
अब देखने वाली बात यह होगी कि लगातार उठ रही आवाजों और औपचारिक बयानों के बाद संबंधित विभाग और आला अधिकारी इस अवैध नेटवर्क पर कब और क्या ठोस कार्रवाई करते हैं। @MoPNG_eSeva@PetroleumMin@HardeepSPuri@OfficeofHSP@CMODelhi@LtGovDelhi@CPDelhi@DelhiPolice@DCPCentralDelhi@HMOIndia@PMOIndia@AmitShah@AmitShahOffice@rashtrapatibhvn@VPIndia@loksabhaspeaker@LokSabhaSectt@MCD_Delhi@dtptraffic@IndianOilcl@ArvindKejriwal@AtishiAAP@AAPDelhi@SanjayAzadSln@AamAadmiParty@INCDelhi@BJP4Delhi@RahulGandhi@rajnathsingh@yadavakhilesh
चांदपुर में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल: बिना मुकदमा संख्या का नोटिस देकर युवक को किया गया प्रताड़ित।
चांदपुर (बिजनौर):
थाना चांदपुर पुलिस द्वारा पीड़ित योगिंदर सिंह, पिता छत्तर सिंह, ग्राम रुखनपुर, पोस्ट बाहमनशोरा, तहसील चांदपुर, थाना चांदपुर, जिला बिजनौर, को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 35(3) के तहत नोटिस जारी करने के मामले में गंभीर अनियमितता सामने आई है। पीड़ित युवक ने पुलिस प्रशासन पर जबरन परेशान करने और दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
पीड़ित के अनुसार, पुलिस अधिकारियों ने उनसे नाम, पता और पिता का नाम (छतर सिंह) पूछकर फॉर्म में भर लिया और हस्ताक्षर करा लिए, लेकिन नोटिस में सबसे महत्वपूर्ण जानकारी 'मुकदमा अपराध संख्या' और 'धारा' का कॉलम पूरी तरह खाली छोड़ दिया।
क्या है पूरा मामला?
कानूनी प्रावधानों के अनुसार, BNSS की धारा 35(3) (जो पूर्व में CrPC की धारा 41A थी) के तहत नोटिस तभी जारी किया जाता है जब किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई विशिष्ट प्राथमिकी (FIR) दर्ज हो। नोटिस में मुकदमा संख्या, धारा, और उपस्थिति का समय व स्थान स्पष्ट रूप से दर्ज होना अनिवार्य है। पीड़ित का कहना है कि बिना एफआईआर संख्या दर्ज किए नोटिस देना और हस्ताक्षर कराना उन्हें गैर-कानूनी तरीके से फंसाने या प्रताड़ित करने की साजिश है।
पीड़ित के लिए इंसाफ के कानूनी मार्ग
यदि किसी व्यक्ति को बिना एफआईआर नंबर के इस प्रकार का अधूरा नोटिस देकर प्रताड़ित किया जा रहा है, तो कानून में इसके खिलाफ निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:
वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत: पीड़ित तत्काल इस पूरे मामले और हस्ताक्षरित नोटिस की प्रति के साथ पुलिस अधीक्षक (SP) बिजनौर और पुलिस महानिरीक्षक (IG/DIG) को लिखित शिकायत दर्ज कराएं। इसमें स्पष्ट उल्लेख करें कि बिना मुकदमा संख्या के जबरन हस्ताक्षर कराए गए हैं।
जनसुनवाई पोर्टल (IGRS): उत्तर प्रदेश सरकार के आईजीआरएस पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर जांच की मांग की जा सकती है।
विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क: यदि पुलिस द्वारा बिना किसी वैध अपराध संख्या के अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है, तो जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) बिजनौर से मुफ्त कानूनी मदद ली जा सकती है।
उच्च न्यायालय का रुख: यदि पुलिस द्वारा अवैध गिरफ्तारी या प्रताड़ना की आशंका हो, तो पीड़ित अधिवक्ता के माध्यम से इलाहाबाद उच्च न्यायालय में रिट याचिका दाखिल कर राहत और निष्पक्ष जांच की मांग कर सकते हैं।
बिना किसी दर्ज मुकदमे या बिना एफआईआर विवरण के जारी किया गया नोटिस प्रक्रियात्मक त्रुटि का स्पष्ट मामला है और कानून के समक्ष यह मान्य नहीं है, जिसकी गहनता से जांच कर पीड़ित को इंसाफ मिल सके। @dgpup@Uppolice@CBIHeadquarters@acbimeerut@bijnorpolice@UPGovt@myogiadityanath@ChiefSecyUP@CMOfficeUP@HMOIndia@PMOIndia पीड़ित का संपर्क नं: +919927232882
चांदपुर में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल: बिना मुकदमा संख्या का नोटिस देकर युवक को किया गया प्रताड़ित।
चांदपुर (बिजनौर):
थाना चांदपुर पुलिस द्वारा पीड़ित योगिंदर सिंह, पिता छत्तर सिंह, ग्राम रुखनपुर, पोस्ट बाहमनशोरा, तहसील चांदपुर, थाना चांदपुर, जिला बिजनौर, को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 35(3) के तहत नोटिस जारी करने के मामले में गंभीर अनियमितता सामने आई है। पीड़ित युवक ने पुलिस प्रशासन पर जबरन परेशान करने और दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
पीड़ित के अनुसार, पुलिस अधिकारियों ने उनसे नाम, पता और पिता का नाम (छतर सिंह) पूछकर फॉर्म में भर लिया और हस्ताक्षर करा लिए, लेकिन नोटिस में सबसे महत्वपूर्ण जानकारी 'मुकदमा अपराध संख्या' और 'धारा' का कॉलम पूरी तरह खाली छोड़ दिया।
क्या है पूरा मामला?
कानूनी प्रावधानों के अनुसार, BNSS की धारा 35(3) (जो पूर्व में CrPC की धारा 41A थी) के तहत नोटिस तभी जारी किया जाता है जब किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई विशिष्ट प्राथमिकी (FIR) दर्ज हो। नोटिस में मुकदमा संख्या, धारा, और उपस्थिति का समय व स्थान स्पष्ट रूप से दर्ज होना अनिवार्य है। पीड़ित का कहना है कि बिना एफआईआर संख्या दर्ज किए नोटिस देना और हस्ताक्षर कराना उन्हें गैर-कानूनी तरीके से फंसाने या प्रताड़ित करने की साजिश है।
पीड़ित के लिए इंसाफ के कानूनी मार्ग
यदि किसी व्यक्ति को बिना एफआईआर नंबर के इस प्रकार का अधूरा नोटिस देकर प्रताड़ित किया जा रहा है, तो कानून में इसके खिलाफ निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:
वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत: पीड़ित तत्काल इस पूरे मामले और हस्ताक्षरित नोटिस की प्रति के साथ पुलिस अधीक्षक (SP) बिजनौर और पुलिस महानिरीक्षक (IG/DIG) को लिखित शिकायत दर्ज कराएं। इसमें स्पष्ट उल्लेख करें कि बिना मुकदमा संख्या के जबरन हस्ताक्षर कराए गए हैं।
जनसुनवाई पोर्टल (IGRS): उत्तर प्रदेश सरकार के आईजीआरएस पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर जांच की मांग की जा सकती है।
विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क: यदि पुलिस द्वारा बिना किसी वैध अपराध संख्या के अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है, तो जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) बिजनौर से मुफ्त कानूनी मदद ली जा सकती है।
उच्च न्यायालय का रुख: यदि पुलिस द्वारा अवैध गिरफ्तारी या प्रताड़ना की आशंका हो, तो पीड़ित अधिवक्ता के माध्यम से इलाहाबाद उच्च न्यायालय में रिट याचिका दाखिल कर राहत और निष्पक्ष जांच की मांग कर सकते हैं।
बिना किसी दर्ज मुकदमे या बिना एफआईआर विवरण के जारी किया गया नोटिस प्रक्रियात्मक त्रुटि का स्पष्ट मामला है और कानून के समक्ष यह मान्य नहीं है, जिसकी गहनता से जांच कर पीड़ित को इंसाफ मिल सके। @dgpup@Uppolice@CBIHeadquarters@acbimeerut@bijnorpolice@UPGovt@myogiadityanath@ChiefSecyUP@CMOfficeUP@HMOIndia@PMOIndia पीड़ित का संपर्क नं: +919927232882
चित्रा विहार रेड लाइट के पास खुलेआम गांजे की बिक्री: पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे गंभीर सवाल।
(पूर्वी दिल्ली: राजधानी के थाना प्रीत विहार क्षेत्र अंतर्गत आने वाले चित्रा विहार रेड लाइट के पास अवैध नशीले पदार्थों का कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। मुख्य सड़क पर बनी झुग्गियों के सामने सरेआम अवैध गांजे की बिक्री की जा रही है, जिससे पूरे इलाके में डर और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस अवैध नशीले कारोबार की कमान रईस नामक व्यक्ति के हाथों में है।
कारोबार का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि आरोपी पुलिस और कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए नाबालिग बच्चों और महिलाओं को ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। सड़क किनारे बिना किसी खौफ के हो रही तस्करी के कारण न केवल क्षेत्र का सामाजिक माहौल बिगड़ रहा है, बल्कि मुख्य मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों, महिलाओं और स्थानीय निवासियों का निकलना भी दूभर हो गया है।
थाना अध्यक्ष को दी गई सूचना, फिर भी ठोस कार्रवाई का इंतजार
मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना अध्यक्ष को फोन पर इस अवैध धंधे की विस्तृत सूचना दे दी गई है। हालांकि, स्थानीय निवासियों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि पूर्व में भी इस संबंध में खबरें प्रकाशित होने और शिकायतें दर्ज कराए जाने के बावजूद अब तक कोई प्रभावी या ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
मुख्य सड़क पर बेखौफ जारी नशीले पदार्थों का यह कारोबार न केवल स्थानीय पुलिस की गश्त और खुफिया तंत्र पर सवालिया निशान खड़ा करता है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर किसकी शह पर यह अवैध गतिविधि फल-फूल रही है।
नाबालिगों के भविष्य पर मंडराता खतरा
अपराध में नाबालिग बच्चों और महिलाओं का इस्तेमाल कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती है। नशीले पदार्थों के कारोबारी बच्चों को कम उम्र में ही इस दलदल में धकेल रहे हैं, जिससे उनका भविष्य पूरी तरह तबाह हो रहा है।
क्षेत्रीय निवासियों ने दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और जिला पुलिस उपायुक्त (DCP) से मांग की है कि इस मामले का तत्काल संज्ञान लिया जाए। चित्रा विहार रेड लाइट के पास विशेष अभियान चलाकर मुख्य आरोपी रईस समेत इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाए, ताकि इलाके में शांति और सुरक्षा का माहौल बहाल हो सके। @DCPEastDelhi@ShoPreet@DelhiZone_NCB@narcoticsbureau@CrimeBranchDP@CPDelhi@JointCP_ER@LtGovDelhi@DelhiPolice@DelhiGovDigital@dgovcbic
चित्रा विहार रेड लाइट के पास खुलेआम गांजे की बिक्री: पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे गंभीर सवाल।
(पूर्वी दिल्ली: राजधानी के थाना प्रीत विहार क्षेत्र अंतर्गत आने वाले चित्रा विहार रेड लाइट के पास अवैध नशीले पदार्थों का कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। मुख्य सड़क पर बनी झुग्गियों के सामने सरेआम अवैध गांजे की बिक्री की जा रही है, जिससे पूरे इलाके में डर और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस अवैध नशीले कारोबार की कमान रईस नामक व्यक्ति के हाथों में है।
कारोबार का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि आरोपी पुलिस और कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए नाबालिग बच्चों और महिलाओं को ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। सड़क किनारे बिना किसी खौफ के हो रही तस्करी के कारण न केवल क्षेत्र का सामाजिक माहौल बिगड़ रहा है, बल्कि मुख्य मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों, महिलाओं और स्थानीय निवासियों का निकलना भी दूभर हो गया है।
थाना अध्यक्ष को दी गई सूचना, फिर भी ठोस कार्रवाई का इंतजार
मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना अध्यक्ष को फोन पर इस अवैध धंधे की विस्तृत सूचना दे दी गई है। हालांकि, स्थानीय निवासियों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि पूर्व में भी इस संबंध में खबरें प्रकाशित होने और शिकायतें दर्ज कराए जाने के बावजूद अब तक कोई प्रभावी या ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
मुख्य सड़क पर बेखौफ जारी नशीले पदार्थों का यह कारोबार न केवल स्थानीय पुलिस की गश्त और खुफिया तंत्र पर सवालिया निशान खड़ा करता है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर किसकी शह पर यह अवैध गतिविधि फल-फूल रही है।
नाबालिगों के भविष्य पर मंडराता खतरा
अपराध में नाबालिग बच्चों और महिलाओं का इस्तेमाल कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती है। नशीले पदार्थों के कारोबारी बच्चों को कम उम्र में ही इस दलदल में धकेल रहे हैं, जिससे उनका भविष्य पूरी तरह तबाह हो रहा है।
क्षेत्रीय निवासियों ने दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और जिला पुलिस उपायुक्त (DCP) से मांग की है कि इस मामले का तत्काल संज्ञान लिया जाए। चित्रा विहार रेड लाइट के पास विशेष अभियान चलाकर मुख्य आरोपी रईस समेत इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाए, ताकि इलाके में शांति और सुरक्षा का माहौल बहाल हो सके। @DCPEastDelhi@ShoPreet@DelhiZone_NCB@narcoticsbureau@CrimeBranchDP@CPDelhi@JointCP_ER@LtGovDelhi@DelhiPolice@DelhiGovDigital@dgovcbic
चित्रा विहार रेड लाइट के पास खुलेआम गांजा बिक्री: स्थानीय पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल।
पूर्वी दिल्ली के थाना प्रीत विहार क्षेत्र अंतर्गत चित्रा विहार रेड लाइट के पास बनी झुग्गियों के सामने ऑन-रोड अवैध नशीले पदार्थों (गांजे) की बिक्री का मामला सामने आया है। प्राप्त जानकारियों के अनुसार, रईस नामक एक व्यक्ति इस अवैध कारोबार की बागडोर संभाल रहा है और वह इस काम में नाबालिग बच्चों तथा महिलाओं का ढाल बना उन्हें इस्तेमाल कर रहा है।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि पुलिस और कानून की कार्रवाई से बचने के लिए आरोपी द्वारा बच्चों और महिलाओं को आगे किया जाता है। सड़क किनारे सरेआम हो रही इस तस्करी के कारण न केवल क्षेत्र का माहौल खराब हो रहा है, बल्कि आसपास के मुख्य मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों और स्थानीय निवासियों में भी असुरक्षा का माहौल व्याप्त है।
पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल
इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक पहलू स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सामने आ रहा है। सूत्रों का दावा है कि यह अवैध व्यापार स्थानीय पुलिस की कथित शह या अनदेखी के कारण लगातार फल-फूल रहा है। ऐसे में कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं:
क्या स्थानीय बीट ऑफिसर की भूमिका संदिग्ध है? बीट पुलिसकर्मी का मुख्य काम अपने क्षेत्र की हर गतिविधि पर नजर रखना होता है। ऐसे में ऑन-रोड चल रहे इस कारोबार की जानकारी बीट ऑफिसर को न होना कई संदेह पैदा करता है।
क्या थाना अध्यक्ष इस गतिविधि से बेखबर हैं? यदि चित्रा विहार जैसे मुख्य रेड लाइट इलाके पर अवैध नशीले पदार्थ बिक रहे हैं, तो सवाल यह भी है कि क्या यह जानकारी थाना अध्यक्ष तक नहीं पहुंची, या फिर मामले पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा?
स्थानीय निवासियों की मांग
क्षेत्र के नागरिकों और समाजसेवियों ने इस मामले का तुरंत संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस के उच्च अधिकारियों, विशेषकर संबंधित डीसीपी (East District) से हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों का कहना है कि इस अवैध नेटवर्क को ध्वस्त कर मुख्य आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और संबंधित बीट कर्मियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की जाए ताकि क्षेत्र को नशे के इस जाल से मुक्त कराया जा सके। @DCP_SHAHDARA@ADCP1Shahdara@ShahdaraAddlDCP@ACPPuneet@ShoPreet@CrimeBranchDP@DelhiZone_NCB@CBIHeadquarters@DelhiGovDigital
चित्रा विहार रेड लाइट के पास खुलेआम गांजा बिक्री: स्थानीय पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल।
पूर्वी दिल्ली के थाना प्रीत विहार क्षेत्र अंतर्गत चित्रा विहार रेड लाइट के पास बनी झुग्गियों के सामने ऑन-रोड अवैध नशीले पदार्थों (गांजे) की बिक्री का मामला सामने आया है। प्राप्त जानकारियों के अनुसार, रईस नामक एक व्यक्ति इस अवैध कारोबार की बागडोर संभाल रहा है और वह इस काम में नाबालिग बच्चों तथा महिलाओं का ढाल बना उन्हें इस्तेमाल कर रहा है।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि पुलिस और कानून की कार्रवाई से बचने के लिए आरोपी द्वारा बच्चों और महिलाओं को आगे किया जाता है। सड़क किनारे सरेआम हो रही इस तस्करी के कारण न केवल क्षेत्र का माहौल खराब हो रहा है, बल्कि आसपास के मुख्य मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों और स्थानीय निवासियों में भी असुरक्षा का माहौल व्याप्त है।
पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल
इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक पहलू स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सामने आ रहा है। सूत्रों का दावा है कि यह अवैध व्यापार स्थानीय पुलिस की कथित शह या अनदेखी के कारण लगातार फल-फूल रहा है। ऐसे में कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं:
क्या स्थानीय बीट ऑफिसर की भूमिका संदिग्ध है? बीट पुलिसकर्मी का मुख्य काम अपने क्षेत्र की हर गतिविधि पर नजर रखना होता है। ऐसे में ऑन-रोड चल रहे इस कारोबार की जानकारी बीट ऑफिसर को न होना कई संदेह पैदा करता है।
क्या थाना अध्यक्ष इस गतिविधि से बेखबर हैं? यदि चित्रा विहार जैसे मुख्य रेड लाइट इलाके पर अवैध नशीले पदार्थ बिक रहे हैं, तो सवाल यह भी है कि क्या यह जानकारी थाना अध्यक्ष तक नहीं पहुंची, या फिर मामले पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा?
स्थानीय निवासियों की मांग
क्षेत्र के नागरिकों और समाजसेवियों ने इस मामले का तुरंत संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस के उच्च अधिकारियों, विशेषकर संबंधित डीसीपी (East District) से हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों का कहना है कि इस अवैध नेटवर्क को ध्वस्त कर मुख्य आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और संबंधित बीट कर्मियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की जाए ताकि क्षेत्र को नशे के इस जाल से मुक्त कराया जा सके। @DCP_SHAHDARA@ADCP1Shahdara@ShahdaraAddlDCP@ACPPuneet@ShoPreet@CrimeBranchDP@DelhiZone_NCB@CBIHeadquarters@DelhiGovDigital
उत्तर दिल्ली में पुलिस चौकी के पास बेखौफ सट्टेबाजी: प्रशासन की मिलीभगत या अपराधियों के बुलंद हौसले?
नई दिल्ली:
राजधानी में कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने और अपराध मुक्त दिल्ली के बड़े-बड़े दावों के बीच उत्तर दिल्ली के थाना सिविल लाइन क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आ रहा है। स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, थाना सिविल लाइन के अंतर्गत आने वाली मजनू का टीला पुलिस चौकी से महज कुछ ही दूरी पर खुलेआम अवैध सट्टेबाजी और जुए का काला कारोबार फल-फूल रहा है।
पुलिस चौकी के पास बेखौफ गोरखधंधा
बताया जा रहा है कि अरुणा नगर (मजनू का टीला) स्थित मनोज मेडिकोज के पास वाली गली के एक मकान में सन्नी, सुमित और चेतू नामक व्यक्तियों द्वारा चिड़िया-कबूतर, तितली-कबूतर और मटका जैसे अवैध जुए व सट्टे का धंधा धड़ल्ले से चलाया जा रहा है। इसके अलावा, करन प्रधान के पास भी कुछ ही दूरी पर इसी प्रकार के जुए का अवैध कारोबार सक्रिय है।
SHO की गश्त के बावजूद बेधड़क कारोबार
सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि जिस इलाके में यह अवैध गतिविधियां चलाई जा रही हैं, वहां क्षेत्र के थाना प्रभारी (SHO) अपने अधीनस्थ स्टाफ के साथ समय-समय पर इलाके में गश्त करते रहते हैं। इसके बावजूद पुलिस की नाक के नीचे बिना किसी डर के यह अवैध धंधा चल रहा है। ऐसे में स्थानीय निवासियों के बीच यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या यह पुलिस प्रशासन की घोर लापरवाही है या फिर स्थानीय पुलिस की सह पर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं?
दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर
एक तरफ जहां दिल्ली के उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री कानून-व्यवस्था को सख्त करने और अपराधियों पर लगाम कसने की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है। पुलिस चौकी से चंद कदमों की दूरी पर चल रहा यह सट्टेबाजी का खेल न केवल स्थानीय प्रशासन की नाकामी को उजागर करता है, बल्कि खाकी की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
उच्च अधिकारियों से कार्रवाई की उम्मीद
यदि समय रहते इस अवैध कारोबार और अपराधियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो इससे इलाके में अन्य आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। अब देखना यह होगा कि मामले को संज्ञान में लेते हुए दिल्ली पुलिस के उच्च अधिकारी और शीर्ष प्रशासन इस पर क्या कड़ा रुख अपनाते हैं, या फिर यह मामला भी महज फाइलों में सिमट कर रह जाएगा। @DcpNorthDelhi@shocivillines@ACPCivillines@CrimeBranchDP@DelhiPolice@CPDelhi@LtGovDelhi@dgovcbic@HMOIndia@CMODelhi
उत्तर दिल्ली में पुलिस चौकी के पास बेखौफ सट्टेबाजी: प्रशासन की मिलीभगत या अपराधियों के बुलंद हौसले?
नई दिल्ली:
राजधानी में कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने और अपराध मुक्त दिल्ली के बड़े-बड़े दावों के बीच उत्तर दिल्ली के थाना सिविल लाइन क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आ रहा है। स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, थाना सिविल लाइन के अंतर्गत आने वाली मजनू का टीला पुलिस चौकी से महज कुछ ही दूरी पर खुलेआम अवैध सट्टेबाजी और जुए का काला कारोबार फल-फूल रहा है।
पुलिस चौकी के पास बेखौफ गोरखधंधा
बताया जा रहा है कि अरुणा नगर (मजनू का टीला) स्थित मनोज मेडिकोज के पास वाली गली के एक मकान में सन्नी, सुमित और चेतू नामक व्यक्तियों द्वारा चिड़िया-कबूतर, तितली-कबूतर और मटका जैसे अवैध जुए व सट्टे का धंधा धड़ल्ले से चलाया जा रहा है। इसके अलावा, करन प्रधान के पास भी कुछ ही दूरी पर इसी प्रकार के जुए का अवैध कारोबार सक्रिय है।
SHO की गश्त के बावजूद बेधड़क कारोबार
सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि जिस इलाके में यह अवैध गतिविधियां चलाई जा रही हैं, वहां क्षेत्र के थाना प्रभारी (SHO) अपने अधीनस्थ स्टाफ के साथ समय-समय पर इलाके में गश्त करते रहते हैं। इसके बावजूद पुलिस की नाक के नीचे बिना किसी डर के यह अवैध धंधा चल रहा है। ऐसे में स्थानीय निवासियों के बीच यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या यह पुलिस प्रशासन की घोर लापरवाही है या फिर स्थानीय पुलिस की सह पर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं?
दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर
एक तरफ जहां दिल्ली के उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री कानून-व्यवस्था को सख्त करने और अपराधियों पर लगाम कसने की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है। पुलिस चौकी से चंद कदमों की दूरी पर चल रहा यह सट्टेबाजी का खेल न केवल स्थानीय प्रशासन की नाकामी को उजागर करता है, बल्कि खाकी की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
उच्च अधिकारियों से कार्रवाई की उम्मीद
यदि समय रहते इस अवैध कारोबार और अपराधियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो इससे इलाके में अन्य आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। अब देखना यह होगा कि मामले को संज्ञान में लेते हुए दिल्ली पुलिस के उच्च अधिकारी और शीर्ष प्रशासन इस पर क्या कड़ा रुख अपनाते हैं, या फिर यह मामला भी महज फाइलों में सिमट कर रह जाएगा। @DcpNorthDelhi@shocivillines@ACPCivillines@CrimeBranchDP@DelhiPolice@CPDelhi@LtGovDelhi@dgovcbic@HMOIndia@CMODelhi
स्वामी दयानंद अस्पताल में ओपीडी क्षेत्र के भीतर आटोक्लेव यूनिट निर्माण पर चिकित्सकों का विरोध और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ।
पूर्वी दिल्ली स्थित स्वामी दयानंद अस्पताल (दिलशाद गार्डन) के ओपीडी परिसर में आटोक्लेव यूनिट के निर्माण को लेकर चिकित्सकों और अस्पताल प्रशासन के बीच विवाद गहरा गया है। अत्यधिक भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक क्षेत्र में उच्च तापमान तथा भाप के दबाव पर काम करने वाली इस नसबंदी (स्टरलाइजेशन) प्रणाली की स्थापना से जन-सुरक्षा और संक्रमण नियंत्रण के मानकों पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
भीड़भाड़ वाले ओपीडी क्षेत्र में निर्माण कार्य
अस्पताल की दूसरी मंजिल पर ओपीडी क्लिनिक तथा पंजीकरण काउंटर स्थित हैं, जहाँ प्रतिदिन सैकड़ों मरीज और उनके संबंधी पहुँचते हैं। वर्तमान में दो पंजीकरण काउंटरों को स्थानांतरित करके एक नई दीवार का निर्माण किया जा रहा है, ताकि इस बंद कमरे में आटोक्लेव यूनिट स्थापित की जा सके। चिकित्सकों का तर्क है कि मुख्य आवाजाही वाले मार्ग में इस प्रकार की इकाई की स्थापना किसी दुर्घटना अथवा संक्रमण के प्रसार का कारण बन सकती है।
शल्य चिकित्सा (सर्जिकल) विभाग के डॉक्टरों का कहना है कि स्थापित स्वास्थ्य मानकों के अनुसार आटोक्लेव यूनिट को सामान्य जन-आवाजाही से दूर किसी सुरक्षित स्थान पर बनाया जाना चाहिए।
इस नए निर्माण के विषय में शल्य चिकित्सा विभाग के चिकित्सकों से कोई सुझाव या सहमति नहीं ली गई।
जानकारी के अनुसार, यह निर्माण कार्य अस्पताल प्रशासन (चिकित्सा अधीक्षक, उप चिकित्सा अधीक्षक तथा विभागाध्यक्ष) के स्तर पर संचालित किया जा रहा है।
विभागाध्यक्ष (डॉ. जगमोहन) के निष्कासन और तत्पश्चात पुनर्नियुक्ति को लेकर अस्पताल परिसर में पहले से ही विभिन्न चर्चाएँ चल रही हैं। इस प्रशासनिक उठापटक के बीच ओपीडी क्षेत्र में जोखिम भरे निर्माण कार्य शुरू कराए जाने पर चिकित्सकों ने असंतोष जताया है। समाचार पत्रों में इस विषय पर खबरें प्रकाशित होने के बाद भी निर्माण कार्य जारी है।
चर्चा में मामले पर अस्पताल प्रबंधक सुनीता का कहना है कि इस नई इकाई से आम जनता अथवा मरीजों को कोई सुरक्षा जोखिम नहीं होगा। एक अन्य प्रशासनिक अधिकारी के अनुसार, पंजीकरण काउंटर केवल दोपहर तक संचालित होते हैं और आटोक्लेव यूनिट को काउंटर बंद होने के पश्चात ही चलाया जाएगा।
इसके विपरीत, चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पताल के मुख्य ओपीडी ढांचे में ऐसा फेरबदल संक्रमण नियंत्रण के स्वीकृत मापदंडों के विपरीत है। @MCD_Delhi@AdditionalMcd@MoHFW_INDIA@DCP_SHAHDARA@HelthMinistry@LtGovDelhi@DelhiGovDigital@DPCC_Pollution संबंधित अधिकारी हेतु मामले की जांच कर कार्यवाही के संदर्भ में।
स्वामी दयानंद अस्पताल में ओपीडी क्षेत्र के भीतर आटोक्लेव यूनिट निर्माण पर चिकित्सकों का विरोध और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ।
पूर्वी दिल्ली स्थित स्वामी दयानंद अस्पताल (दिलशाद गार्डन) के ओपीडी परिसर में आटोक्लेव यूनिट के निर्माण को लेकर चिकित्सकों और अस्पताल प्रशासन के बीच विवाद गहरा गया है। अत्यधिक भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक क्षेत्र में उच्च तापमान तथा भाप के दबाव पर काम करने वाली इस नसबंदी (स्टरलाइजेशन) प्रणाली की स्थापना से जन-सुरक्षा और संक्रमण नियंत्रण के मानकों पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
भीड़भाड़ वाले ओपीडी क्षेत्र में निर्माण कार्य
अस्पताल की दूसरी मंजिल पर ओपीडी क्लिनिक तथा पंजीकरण काउंटर स्थित हैं, जहाँ प्रतिदिन सैकड़ों मरीज और उनके संबंधी पहुँचते हैं। वर्तमान में दो पंजीकरण काउंटरों को स्थानांतरित करके एक नई दीवार का निर्माण किया जा रहा है, ताकि इस बंद कमरे में आटोक्लेव यूनिट स्थापित की जा सके। चिकित्सकों का तर्क है कि मुख्य आवाजाही वाले मार्ग में इस प्रकार की इकाई की स्थापना किसी दुर्घटना अथवा संक्रमण के प्रसार का कारण बन सकती है।
शल्य चिकित्सा (सर्जिकल) विभाग के डॉक्टरों का कहना है कि स्थापित स्वास्थ्य मानकों के अनुसार आटोक्लेव यूनिट को सामान्य जन-आवाजाही से दूर किसी सुरक्षित स्थान पर बनाया जाना चाहिए।
इस नए निर्माण के विषय में शल्य चिकित्सा विभाग के चिकित्सकों से कोई सुझाव या सहमति नहीं ली गई।
जानकारी के अनुसार, यह निर्माण कार्य अस्पताल प्रशासन (चिकित्सा अधीक्षक, उप चिकित्सा अधीक्षक तथा विभागाध्यक्ष) के स्तर पर संचालित किया जा रहा है।
विभागाध्यक्ष (डॉ. जगमोहन) के निष्कासन और तत्पश्चात पुनर्नियुक्ति को लेकर अस्पताल परिसर में पहले से ही विभिन्न चर्चाएँ चल रही हैं। इस प्रशासनिक उठापटक के बीच ओपीडी क्षेत्र में जोखिम भरे निर्माण कार्य शुरू कराए जाने पर चिकित्सकों ने असंतोष जताया है। समाचार पत्रों में इस विषय पर खबरें प्रकाशित होने के बाद भी निर्माण कार्य जारी है।
चर्चा में मामले पर अस्पताल प्रबंधक सुनीता का कहना है कि इस नई इकाई से आम जनता अथवा मरीजों को कोई सुरक्षा जोखिम नहीं होगा। एक अन्य प्रशासनिक अधिकारी के अनुसार, पंजीकरण काउंटर केवल दोपहर तक संचालित होते हैं और आटोक्लेव यूनिट को काउंटर बंद होने के पश्चात ही चलाया जाएगा।
इसके विपरीत, चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पताल के मुख्य ओपीडी ढांचे में ऐसा फेरबदल संक्रमण नियंत्रण के स्वीकृत मापदंडों के विपरीत है। @MCD_Delhi@AdditionalMcd@MoHFW_INDIA@DCP_SHAHDARA@HelthMinistry@LtGovDelhi@DelhiGovDigital@DPCC_Pollution संबंधित अधिकारी हेतु मामले की जांच कर कार्यवाही के संदर्भ में।
नंदनगरी डी-ब्लॉक में नियमों की धज्जियां: बेखौफ चल रहा अवैध शराब का कारोबार, पुलिस प्रशासन के दावों पर उठे सवाल।
नई दिल्ली: राजधानी के उत्तर-पूर्वी जिले के थाना नंदनगरी क्षेत्र अंतर्गत डी-ब्लॉक (जिसे स्थानीय स्तर पर 'स्कूल ब्लॉक' भी कहा जाता है) में अवैध शराब का कारोबार धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, यहां खुलेआम और बेखौफ तरीके से घरों से शराब परोसी जा रही है। इस पूरे अवैध नेटवर्क को 'सुनीता' नामक महिला द्वारा संचालित किए जाने की खबर है।
स्थानीय सूत्रों की मानें तो इस अवैध कारोबार को इलाके के बीट ऑफिसर अशोक का संरक्षण (छत्रछाया) प्राप्त है, जिसके चलते शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है। हैरान करने वाली बात यह है कि हाल ही में जिला पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) द्वारा अवैध गतिविधियों पर नकेल कसने और लापरवाह बीट अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के कड़े निर्देश जारी किए गए थे। इसके बावजूद, नंदनगरी के इस इलाके में कानून का कोई खौफ नजर नहीं आ रहा है और कई घरों को मिनी शराब ठेके में तब्दील कर दिया गया है।
स्कूल ब्लॉक में मंडराता खतरा, निवासियों में रोष
जिस क्षेत्र में यह अवैध कारोबार चल रहा है, उसे 'स्कूल ब्लॉक' के नाम से जाना जाता है। रोजाना स्कूल आने-जाने वाले बच्चों, महिलाओं और स्थानीय नागरिकों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक बनती जा रही है। असामाजिक तत्वों के जमावड़े के कारण क्षेत्र का माहौल लगातार खराब हो रहा है और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्षेत्रीय निवासियों का कहना है कि आला अधिकारियों के सख्त रुख के बावजूद निचले स्तर पर बीट पुलिस की कथित मिलीभगत के कारण यह अवैध धंधा बंद होने का नाम नहीं ले रहा। अब देखना यह होगा कि समाचार संज्ञान में आने के बाद दिल्ली पुलिस के उच्च अधिकारी इस मामले पर क्या कड़ा संज्ञान लेते हैं और आरोपी बीट स्टाफ व अवैध कारोबार चलाने वालों पर क्या कार्रवाई की जाती है। @DCPNEastDelhi@NNagri60662@shonandnagrined@DelhiPolice@CPDelhi@CrimeBranchDP@DelhiZone_NCB@LtGovDelhi@dgovcbic@DelhiGovDigital