“कुछ साल पहले तक मेरे मन में बहुत था - हम ‘विश्वगुरु’ बनेंगे पर अब लगता है विश्वगुरु को Contradict करने वाली बातें ज्यादा हो रही हैं !
या तो विश्वगुरु-विश्वगुरु करना बंद करो या ये सब Nonsense बंद करो !”
अनुराधा पौडवाल जी ने ‘मोदी जी’ को आड़े हाथों लिया🔥
यह घटिया आदमी अमित भारद्वाज है
इस नफ़रती चिंटू ने झूठ फैलाया था कि अखिलेश यादव जी और टिन्नू यादव के बीच फोन पर 980 बार बात हुई
फिर झूठ पकड़ा गया. अब माफ़ी मांग रहा है.
ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए जिससे कि दूसरे झुट्ठे झूठ फैलाने से पहले सौ दफ़ा सोचें
पत्रकार - यूपी में भाजपा की सरकार है और राम मंदिर में डकैती हो गई।
युवक - जब सोमनाथ मंदिर में लूट हुई थी तो किसकी सरकार थी 70 साल से तो कांग्रेस ही थी।
पत्रकार - अरे सोमनाथ की लूट कांग्रेस के समय नहीं हुई थी वो तो 11वीं सदी में हुई थी।
आज अगर नेहरू जी जिंदा होते तो अपने सिगार में गोली भरकर इसके भेजे में उतार देते।😂
बताओ हजार साल पहले की घटना में भी नेहरू को घुसेड़ देते हैं गजब अनपढ़ अंधभक्त है।
यकीन करना मुश्किल है, बॉलीवुड में ऐसे निडर लोग हैं।
जब बॉलीवुड के दिग्गज किंग और बिग बी जैसों के मुंह डर की वजह से चुप हो गए हों,
तब SS शेखर सुमन उन मुद्दों पर बोल रहे हैं जिनका बारे में सोचकर भी कई लोगों को पसीना आ जाता है।
@apnarajeevnigam
मुख्यमंत्री Fadnavis जी! सवाल पूछना कब से गाली देना हो गया?
जो जवाबदेही तय करेंगे उन्हें अनाप-शनाप कहा जाएगा? जो गड़बड़ हुई है उसका जवाब ना देकर ऐसा बयान? सरकार की आलोचना राज्य की आलोचना कैसे हो गई?
मीडिया का स्तर देखिए...
वाह ... मुख्यमंत्री जनता के सवालों का जवाब शालीनता से दें या न दें, लेकिन उनकी भद्दी भाषा को भी "Roasted 🔥" बताकर प्रमोट किया जा रहा है।
जनता पुल गिरने पर सवाल पूछे, जवाबदेही मांगे... और जवाब में विधानसभा के भीतर ऐसी भाषा?
यही लोकतांत्रिक जवाबदेही है?
मीडिया का काम सत्ता से सवाल पूछना है या सत्ता की कटु भाषा को भी मनोरंजन बनाकर पेश करना?
पुल क्यों गिरा, जिम्मेदार कौन है, व्यवस्था कहाँ विफल हुई- इन सवालों पर बहस कम... भाषा पर तालियाँ है।लोकतंत्र में आलोचना का जवाब तानों से नहीं दिया जाता।
@navneetmishra99 15 से 20 हजार की नौकरी करने बाले लाखों करोडो का घर बना रहे है बो भी जो गिनती मे लगे हुए थे।। मगर कोई पूछे नही बोले नही क्योकि सब कॉक्रेच है ना
आइटी सेल के टट्टी टट्टू अब यह बता रहे हैं कि इथेनॉल UPA ले कर आई थी और राजपत्र दिखा रहे हैं!
अरे भड़वों! जब तर्क नहीं है तो लड़चट्टों चुप क्यों नहीं रहते तुम लोग? पिछले बारह वर्षों से सत्ता में तुम हो। नीति पर गंभीरता से कार्य आरम्भ हुआ 2018 में। इंजन बने 2023 में। और तुम दिखा रहे हो कि नीति तो 2007 में आई?
अच्छा तो ये बताओ कि 2001 और 2003 में किस पैर्टी की सरकार थी? क्या वो तब से E20-30-85 बेच रहे थे? तुमने तब भी जनता को कॉन्फिडेंस में नहीं लिया, और तुमने आज भी बिना बताए जनता के EMI पर लिए इंजनों का बलात्कार किया है।
क्या UPA वालों ने गडकरी और हरदीप पुरी से कहा था कि बिना जनता को बताए कि इथेनॉल कितना मिक्स है, पेट्रोल कह कर बेचो। और उन गाड़ियों में भी डलवाओ जो बिलकुल भी इसके लिए नहीं बने हैं।
तुम्हारे पाँव के नीचे से भूमि खिसक रही है, और तुम अभी भी कॉन्ग्रेस और नेहरू को ब्लेम करने की राह देख रहे हो। चुल्लू भर पानी में डूब जाओ हरामखोरों।
कितना PR करोगे @nitin_gadkari का? और ये तुम नहीं करते पर करना पड़ रहा है क्योंकि आँच @narendramodi तक जा रही है। कुछ भी हो जाए, मोदी के कुर्ते का एक धागा हिलना नहीं चाहिए। बाकी देश में आग ही क्यों न लग जाए।
ऐसी भी क्या गुलामी करनी है बे? आत्मा तो मत बेचो दल्लों!
मेहनत की कमाई से जिंदगी भर की पूंजी लगाकर लोग कार-बाइक खरीदते हैं, सपने देखते हैं।
लेकिन आज E20 पेट्रोल पंपों से गन्ने juice जैसा पीला पानी निकल रहा है।
इंजन खराब, माइलेज घटने की बात लोग ख़ुद बोल रहे है नई गाड़ियां तक बेकार हो रही हैं।
वही सुप्रीम कोर्ट में सरकार खुद कह रही कि ये ongoing experiment है, नतीजे अगले साल आएंगे।
तो क्या आम आदमी की गाड़ियां सरकार के लिए प्रयोग की लैब Experiment हैं? करोड़ों लोगों की मेहनत की कमाई और सपनों के साथ खिलवाड़ आख़िर किसके लिए ?
इतने सारे आरोप लोग लगा रहे है ! किसी के पास कोई जवाब नहीं है! और है तो हमेशा की तरह चुप्पी !
“Ethanol से माइलेज 30% कम मिलता है, लेकिन हमें इसे सकारात्मक नज़रिए से देखना चाहिए।”
— एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, भारत पेट्रोलियम
जब आप हमें ईंधन के नाम पर मिलावटी चीज़ दे रहे हैं, जिससे न सिर्फ़ माइलेज कम मिलता है बल्कि हमारी गाड़ियाँ भी खराब होती हैं, तो हम इसे सकारात्मक नज़रिए से कैसे देख सकते हैं?
इसे सिर्फ़ गडकरी एंड सन्स ही सकारात्मक नज़रिए से देख सकते हैं, क्योंकि वे इससे पीढ़ियों के लिए दौलत बना रहे हैं।
@JaikyYadav16 अबे बाबले शारुख हंसराज से पढ़ा है पैसे की कोई कमी नही थी। जिस समय कॉलेज के लोंडे दिन मे एक या दो सिग्रेट पीते थे उस समय शारुख दिन की चार डिब्बी पीने बाला क्या समोसा बेचेगा