देश को किसने क्या दिया और किसने क्या लिया ये सभी जानते हैं लेकिन जानकर भी अंजान बनते हैं तो कसूर किसका नेताओं का या पब्लिक का । पब्लिक कोई दूध पीती बच्ची तो नहीं जो औरों के बहकावे में आ जाएगी ।
वर्षा वार्ष्णेय अलीगढ़
कवयित्री एवं लेखिका
क्या मोदी जी का कोई और विकल्प है किसी के पास ,अगर हो तो बताना जरूर क्योंकि हर व्यक्ति महान बनता है । जिस व्यक्ति पर अपना घर भी न संभलता हो वो भी उनकी आलोचना जरूर करता है ।
वर्षा वार्ष्णेय अलीगढ़
प्रिय Meta टीम,
मेरा पेज हैक हुआ है और मेरे पास मालिक होने के सारे proof है [versha varshney poetess and writer] मैंने अपने पेज को वापस पाने के लिए कई प्रयास किए हैं, लेकिन मुझे अभी तक कोई सफलता नहीं मिली है।
वर्षा वार्ष्णेय अलीगढ़
अमराइयों में भी याद
हमारी तुम्हें सताएगी
जब भी मुड़कर देखोगे
तन्हाई तुम्हें रुलायेगी
गीत प्रेम के दोहराकर
थक जाओगे जब कभी
रुबाइयाँ मेरे प्रेम की
तुम्हें बहुत सताएंगीं
दिल से कोई चाहे तुम्हें
बड़े नसीब से मिलता है
बहकी बहकी हवाएँ
मेरे ही तराने गाएँगी
वर्षा वार्ष्णेय @