👉 DURGA STOTRAS-SULADI
- ARJUNA KRUTHA DURGA STUTHI
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- Sri Manchalamma Stothram
(Sri Raghavendra Theertha Krutha)
- durgādvātriṃśannāmāvaliḥ
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In the philosophy established by Sri Madhvacharya, Goddess Lakshmi is the supreme, flawless, and eternal consort of Lord Narayana. She is entirely dependent on Sri Hari but holds a position superior to all other souls (Jivas), including Brahma and Shiva.
With whatever name one may call Her—Durga, Lakshmi, Saraswathi—She is MaAya, She is Shakti, She is Prakruthi, She is Ambhrani. All are Maha Lakshmi roopas.
In Dvaita philosophy, Maha Lakshmi assumes three primary forms corresponding to the three cosmic gunas (attributes) and cosmic functions:
Sri-Roopa (Sattva): The form of pure goodness, light, and spiritual abundance. She serves Lord Hari in His maintaining/sustaining function.
Bhu-Roopa (Rajas): The form associated with dynamic action, material creation, and the physical universe (Prakruthi).
Durga-Roopa (Tamas): The form through which She controls the forces of darkness, material bondage, and cosmic dissolution.
Every single form and name mentioned represents a perfect ray of the singular, magnificent Maha Lakshmi, always acting in complete harmony with the independent will of Sri Hari.
naaham karta harih karta
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ऑनलाइन व्यंग्य के रूप में जन्मी और सोशल मीडिया पर गरजने वाले कॉकरोच जमीन पर भी अपनी धमक दिखाएंगे,इसकी उम्मीद किसी को नहीं थी।लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी की एक आवाज पर हजारों युवा भारतीय, गिग वर्कर,और झुग्गी बस्तियों के लोगों के साथ यूट्यूब इन्फ्लुएंसर और बड़े कॉलेजों के छात्र जुटे।कॉकरोचो के इस उफान में शिक्षा मंत्री उड़ गए।मोदी सरकार को दुर्लभ कदम वापसी पर विवश होना पड़ा।परीक्षा सुधारों में तेजी आई प्रधानमंत्री के साथ सरकार के सभी मंत्री खुद इंस्टाग्राम पर उतर आए।
अब फिर कॉकरोच जंतर मंतर पर पहुंच रहे हैं।लोकतंत्र प्रदर्शनों और आंदोलनों में महकता है।शासन के प्रहरे और पुलिस के दमन में लोकतंत्र सिसकता है।आंदोलन से निकलकर सत्ता पर पहुचने वाले भी आंदोलन का अराजक बताते हैं।इसमें नया कुछ भी नहीं है। अंग्रजों ने महात्मा गांधी के आंदोलन को अराजक बताया था, जेपी के संपूर्ण क्रांति को इंदिरा गांधी ने अराजक और देशद्रोह बताया था, अन्ना आंदोलन को यूपीए सरकार ने विदेशी ताक़तों का हाथ बताया था।कोई सरकार प्रश्न पसंद नहीं करती। विपक्ष में रहकर जनता के साथ खड़े रहने वाले सत्ता में आते ही जनता के सामने खड़े हो जाते हैं।दुनियाभर की लोकतांत्रिक सरकारों का चरित्र ऐसा होता है।सिर्फ मरे हुए लोकतंत्र में धरना प्रदर्शन नहीं होते।लोकतंत्र धरना में धड़कता है।
एक तंज से बनी पार्टी धरने प्रदर्शन से युवा भारतीयता का प्रतीक बनने की कोशिश कर रही है।आम आदमी पार्टी कॉकरोच पार्टी को साधन, संसाधन और सुविधा उपलब्ध करा रही है। शुरुआती ऐसे ग़ैर राजनीतिक संगठन के यात्रा की तार्किक परिणति राजनैतिक दल के रूप में होती है।
युवाओं के समर्थन से सत्ता की राजनीति करने की तैयारी कर रही सोजेपी के कर्ताधर्ता जानते हैं कि वर्ष 2029 तक भारत में जेन जी के 38 करोड़ वोटर होंगे, जो कुल मतदाताओं का एक-चौथाई हिस्सा होगा। कभी छोटा और राजनीति से दूर रहा यह समूह भारत का सबसे बड़ा और शायद सबसे निर्णायक पीढ़ीगत वर्ग बनेगा।सोजेपी की नजर इसी वर्ग पर है।युवाओं के ताक़त की एक झलक तमिलनाडु में दिखी,जहां राजनीति में नए सुपरस्टार बिजय ने युवाओं के दम पर एक मजबूत पारंपरिक दल को सत्ता से बाहर कर सत्ता हथिया ली।
आंकड़े और मिसाल दोनों मौजूद हैं।हौसला भी है और राष्ट्रीय स्तर पर ऐसा होना असंभव नहीं।मगर सैद्धांतिक रूप से मुमकिन चीज़े भारत की उलझी और प्रतिस्पर्धा राजनीति की वास्तविकता के आगे अक्सर दम तोड़ देती हैं।कॉकरोच जनता पार्टी के सर्वेसर्वा संभावना और खतरे, दोनों को समझते हुए आगे बढ़ना चाहते हैं।
देश की राजनीति और आंदोलनों को मैं लंबे समय से देख रहा हूँ।
मैंने जन आक्रोश से उठे आंदोलनों को तेजी से उभरते हुए और उतनी ही तेजी से बिखरते देखा है।कुछ आंदोलन टिकाऊ राजनैतिक ताकत भी बने।किसी भी आंदोलन के टिकाऊ राजनैतिक ताकत बनने के लिए जोश के साथ तीन चीजें चाहिए-नेतृत्व,एजेंडा और ऐसा संगठन जो एजेंडे को जनता तक पहुंचाकर असर पैदा कर सके और जन समर्थन जुटा सकें।
महात्मा गांधी, जयप्रकाश नारायण और अण्णा हजारे का आंदोलन इसलिए सफल हुआ और राजनैतिक ताकत बना क्योंकि उनके पास जन समर्थन था।
सीजेपी संस्थाओं की जवाबदेही की बात कर रही है, लेकिन एक मजबूत राजनैतिक दल को इन शिकायतों से आगे बढ़कर भारत की अर्थव्यवस्था का खाका देना होगा। हर साल रोजगार बाजार में आने वाले 1.2 करोड़ युवाओं के लिए नौकरियां कैसे सृजित होंगी? शिक्षा, कौशल और रोजगार के बीच ढांचागत दूरी कैसे मिटेगी? सब प्रश्नों का व्यावहारिक हल बताना होगा।
सीजेपी के एजेंडे को उससे ज्यादा धार, गहराई और तालमेल चाहिए जो उसके पास अभी है। उसे पारंपरिक दलों, खासकर कांग्रेस के हाथों अपना एजेंडा छिनने का खतरा भी है। कांग्रेस को अपनी तरफ से उठाए मुद्दों पर बहुत समर्थन नहीं मिला है।साथ ही, सत्तारूढ़ दल की पूरी ताकत भी सीजेपी पर टूटेगी।
बहरहाल, युवाओं से संवाद के मोर्चे पर सीजेपी साफ तौर पर आगे है।सीजेपी जेन जी के पसंदीदा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सीधे बात करके वह पारंपरिक दलों के पूरे प्रचार तंत्र को दरकिनार कर रही हैं।
भारत का राजनैतिक इतिहास आसानी से उम्मीद नहीं जगाता, लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी की संभावना खत्म भी नहीं करता।
यह देखना दिलचस्प होगा कि व्यंग्य से जन्मा और असली जन आक्रोश से ताकत पाया युवा आंदोलन राजनैतिक परिपक्वता का कठिन सफर तय कर सकता है या नहीं।सीजेपी के बढ़ने की मुश्किलें, चाहे जिस रूप में सामने आएं, एक बड़ी तस्वीर दिखाएंगी, भारत दुनिया का सबसे युवा बड़ा देश है। वह युवाओं की राजनैतिक ऊर्जा को सकारात्मक या विनाशकारी रूप में कैसे समेटता है, यह किसी एक चुनाव से कहीं ज्यादा आने वाले दशकों के लोकतंत्र को आकार देगा।