हम वीर, नम्र, विद्वान्, धनवान, या निर्धन कोई भी हो ,हम इस भारतवर्ष के सेवक बनकर उसकी सेवा में अपना धन, जीवन, सर्वस्व अर्पित कर दे।भाग कार्यवाह, देहरादून @आरएसएस
भारत संपूर्ण विश्व को भौतिक और आध्यात्मिक प्रगति की राह पर अग्रसर करेगा - डॉ. मोहन भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
“अभी तक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर कोई नहीं उतरा था, हमारे वैज्ञानिकों ने लंबे परिश्रम के पश्चात वहां उतरने का पहला मान प्राप्त किया है।
स्वतंत्रता दिवस की सब को शुभकामनाएं।
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सलिलं सुधामधुरितं पवनोऽपि गन्धवाही।
चरितं विकल्पकलितं धर्मो दयावगाही।
यत्प्राङ्गणं शबलितं कौतूहलैरशेषम्॥
वन्दे सदा स्वदेशम्॥
भारत माता की जय।।🇮🇳
श्रमेण लभ्यं सकलं न श्रमेण विना क्वचित् ।
सरलाङ्गुलि संघर्षात् न निर्याति घनं घृतम् ॥
अपने कठोर और अहर्निश परिश्रम से राष्ट्र निर्माण में अतुलनीय योगदान देने वाले कर्मयोगी श्रमिकों को श्रमिक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
#श्रमिक_दिवस
रुक जाना थम जाना, इस जीवन का आधार नही,
बस पड़ाव है,कुछ कर्तव्यों के संकल्पों का, कुछ और नहीं - कुछ और नहीं!
विछिप्त हुए न भयभीत हुए, उन भूकम्पों के थपेड़ों से,
अडग रहे, थमे रहे उन सूनामी लहरों से,
#अभ्यास ।। भारत माता की जय ।।
बहूनि सन्ति तीर्थानि, दिवि भूमौ रसातले |
बदरी सदृशं तीर्थ, न भूतो न भविष्यति ||
देवभूमि उत्तराखण्ड में विश्व प्रसिद्ध पवित्र श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के शुभ अवसर पर समस्त श्रद्धालुओं एवं देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
व्याकुर्वन् व्याससूत्रार्थं श्रुतेरर्थं यथोचिवान्।
श्रुतेर्न्याय: स एवार्थ: शंकर: सवितानन:।।
2 वर्ष की अल्पायु में वेद-उपनिषद के ज्ञान, 7 वर्ष में संन्यास जीवन ग्रहण करके सनातन संस्कृति को नव चेतना प्रदान करने वाले आदि शंकराचार्य जी की जयंती पर भावपूर्ण नमन।
शंकरं शंकराचार्यं केशवं बादरायरणम्
सूत्रभाष्य कृतौ वन्दे भगवन्तौ पुनः पुनः।।
प्रातः स्मरणीय धर्म संस्थापक पूज्य भगवत्पाद श्री शंकराचार्य की जन्मजयंती पर हार्दिक शुभकामनाएं🌸
वन्दे बोधमयं नित्यं गुरुं शंकररूपिणम्।
यमाश्रितो हि वक्रोऽपि चन्द्रः सर्वत्र वन्द्यते॥
अर्थ : मैं ज्ञानमय, नित्य, शङ्कररूपी गुरुदेव की वन्दना करता हूँ, जिनका आश्रित होकर ही टेढ़ा चन्द्रमा भी सर्वत्र वन्दित होता है ।
#हर____हर___महादेव#जय#बाबा#केदार ।।
समस्त दोषो की जन्मभूमि , गुणों का अभिमान हैं।
पर दोषदर्शन से उसमें नित्य वृद्धि होती है।
ओर व्यक्तिगत दोष के दर्शन से अपने गुणों का अभिमान गल जाता है ।।