झारखंड के छात्रों और राज्य सरकार के बीच सहमति बनी, और छात्रों ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त की - यह ख़बर सुनकर बहुत खुशी हुई।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी और झारखंड सरकार ने बातचीत का रास्ता चुना, और समाधान निकाला। छात्रों ने संयम रखा, और अपनी बात मनवाई।
यही सही तरीक़ा है - छात्र सवाल पूछें, तो जवाब मिलना चाहिए।
हम देश के हर छात्र के साथ खड़े हैं। और हम इस वसूली तंत्र को जड़ से बदलकर रहेंगे - ताकि हर छात्र को उसकी मेहनत का पूरा फल और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का हक़ मिले।
पूरे देश में ये system बदलेगा - अब ऐसी व्यवस्था बनेगी जो छात्रों को आगे बढ़ाए, उन्हें पीछे न खींचे।
This is India's ‘FREE PRESS’ !
He's an anchor on Doordarshan, a central government TV channel. He's always spewing venom. When a child questioned the flaws in the CBSE exam testing, this national channel anchor @AshokShrivasta6 labeled him a P@kistani child. Imagine the mental trauma the child and his entire family must have suffered!
This is a serious crime. It's online bullying. If it were any other country, he would be in jail for violating child rights. But the @narendramodi government won't take action against this anchor. If they do, we'll let you know.
This is PRESS FREEDOM here… you can FREELY commit any crime while sitting in the government's lap.
Thank you
बर्बादी करे सरकार, बोझ उठाए जनता
ONGC को कंगाल कर दिया। इस कंपनी के पास 2014 में 13000 करोड़ का कैश रिजर्व था, आज यही कंपनी 78000 करोड़ के क़र्ज़ में डूबी है। उसका पैसा HPCL और गुजरात पेट्रोलियम में लगा दिया।
2014 में भारत अपनी जरूरत 27% तेल उत्पादन खुद करता था। 18-18 घंटे की मेहनत के बाद ये घटकर 13% रह गया।
अब ट्रंप को छींक आई है तो इनको बुखार आ गया है। जो है उसे बेच दो, न बिके तो बर्बाद कर दो, नया कुछ बनाओ मत। यही है नरेंद्र मोदी का आत्मनिर्भर इंडिया, जिसे इन्होंने असल में 'ट्रंपनिर्भर इंडिया' बना दिया है।
• मैंने 2 साल मेहनत की, अपना 100% दिया
• आंसर-की के हिसाब से मेरे 710 नंबर आ रहे थे
• अब कह रहे हैं पेपर लीक हो गया, फिर से पेपर दो
- ये कोई बात थोड़े ही है.. मुझे कुछ भी फील नहीं हो रहा है
NTA में जो लोग पेपर लीक कर रहे हैं, वे ही इसके लिए ज़िम्मेदार हैं.
NEET 2026 की परीक्षा रद्द हो गयी।
22 लाख से ज़्यादा छात्रों की मेहनत, त्याग और सपनों को इस भ्रष्ट भाजपाई व्यवस्था ने कुचल दिया।
किसी पिता ने कर्ज़ लिया,
किसी माँ ने गहने बेचे,
लाखों बच्चों ने रात-रात भर जागकर पढ़ाई की,
और बदले में मिला, पेपर लीक, सरकारी लापरवाही और शिक्षा में संगठित भ्रष्टाचार।
यह सिर्फ़ नाकामी नहीं, युवाओं के भविष्य के साथ अपराध है।
हर बार पेपर माफिया बच निकलते हैं और ईमानदार छात्र सज़ा भुगतते हैं।
अब लाखों छात्र फिर से वही मानसिक तनाव, आर्थिक बोझ और अनिश्चितता झेलेंगे।
अगर अपनी तकदीर परिश्रम से नहीं, पैसे और पहुँच से तय होगा, तो फिर शिक्षा का मतलब क्या रह जाएगा?
प्रधानमंत्री का तथाकथित अमृतकाल, देश के लिए विषकाल बन गया है।
NEET 2026 के पेपर लीक की खबर सुनी।
परीक्षा नहीं - NEET अब नीलामी है।
कई सवाल परीक्षा से 42 घंटे पहले WhatsApp पर बिक रहे थे।
22 लाख से ज़्यादा बच्चे साल भर रात-रात भर आँखें जलाकर पढ़ते रहे और एक रात में उनका भविष्य बाज़ार में सरेआम नीलाम हो गया। यह पहली बार नहीं है। 10 साल में 89 पेपर लीक - 48 बार दोबारा परीक्षा। हर बार वही वादे, और फिर वही ख़ामोशी।
मोदी जी, जब आप अपनी हर नाकामी का बिल जनता पर डालते हैं, तो ग़रीब के बच्चों का भविष्य भी उसी बिल में आता है।
22 लाख बच्चों का भरोसा टूटा है। और मोदी सरकार से बड़ा ख़तरा भारत के युवाओं के सपनों के लिए कोई नहीं।
मैं भारत के युवा के साथ हूँ। यह वक़्त बेहद मुश्किल है - मैं जानता हूँ। लेकिन यह व्यवस्था ऐसे नहीं रहेगी। हम मिलकर इसे बदलेंगे।
जवाहरलाल नेहरू जिस भारत के प्रधानमंत्री थे, वह गरीब भारत था जिसे अंग्रेजों ने लूटकर खोखला कर दिया था। क्या नरेंद्र मोदी भी 1950 में जी रहे हैं? क्या 2026 का भारत, 1950 में पहुंच गया है? तब भारत की जो शक्ति थी, क्या आज भी वैसी ही है? क्या नरेंद्र मोदी को भी वही लुटा हुआ भारत चाहिए ताकि नेहरू से प्रतियोगिता कर सकें? इसीलिए ट्रंप से निर्देश लेकर तेल खरीदते हैं?
ट्रंप को छींक आए तो मोदी जी को बुखार आ जाता है, फिर आत्मनिर्भरता के नारे का क्या हुआ? पिछले 12 साल में भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए क्या प्रयास किया गया?
2014 में भारत अपनी जरूरत का 27% तेल उत्पादन खुद करता था। यह घटकर 13% कैसे रह गया? जिस ONGC के पास 2014 में 13000 करोड़ का कैश रिजर्व था, आज वो 78000 करोड़ के क़र्ज़ में कैसे डूबी है? यह भी नेहरू ने किया है?
12 साल तक सत्ता में रहने के बाद थोड़ा तर्क तो ढंग से खोजा कीजिए! हर बात पर 70 साल पहले के भारत से तुलना करना बेहद शर्मनाक तो है ही, इससे यह भी पता चलता है कि मौजूदा सत्ता के पास भविष्य और वर्तमान को लेकर कोई दृष्टि नहीं बची है।