अखबारों से प्रूफ रीडर नाम का प्राणी लुप्त हो गया। यह मानकर चलते हैं कि कोई कॉपी रिपोर्टर लिख रहा है तो उसमें प्रयुक्त वर्तनी आदि देखने की जिम्मेदारी उसकी है। व्यवहार में ऐसा नहीं है। रिपोर्टर ही नहीं अब कॉपी डेस्क पर भी भाषा और विषय की अच्छी समझ वाले लोग कम हो रहे हैं। मीडिया हाउसों को इस तरफ ध्यान देना चाहिए। अक्सर टीवी चैनलों के स्क्रॉल और कैप्शनों में बड़ी गलतियाँ होतीं हैं। सुपरिभाषित शैली पुस्तिका और एक अंदरूनी गुणवत्ता सिस्टम इसे ठीक कर सकता है।
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आज ये देखकर संतोष हुआ कि आखिरकार 12,700 गेस्ट टीचर्स के संघर्ष और कांग्रेस सरकार की नीति को जीत मिली है। पहले सुप्रीम कोर्ट और अब एकबार फिर हाईकोर्ट ने 2014 में कांग्रेस सरकार द्वारा बनाई गई नियमितीकरण की नीति पर मुहर लगाते हुए गेस्ट टीचर्स को पक्का करने का आदेश दिया है। यह फैसला स्वागत योग्य है और बीजेपी के दुष्प्रचार पर करारा तमाचा है।
बीजेपी को बिना देरी के सभी गेस्ट टीचर्स को रेगुलर कर्मियों वाले तमाम लाभ देने चाहिए। साथ ही हरियाणा की जनता से कांग्रेस सरकार व उनकी भर्तियों के विरुद्ध फैलाए गए दुष्प्रचार के लिए माफी मांगनी चाहिए। क्योंकि 9000 जेबीटी की भर्ती से लेकर हजारों गेस्ट टीचर्स की नियुक्ति और कच्चे कर्मचारियों के नियमितीकरण में बार-बार कोर्ट ने मेरिट, नीति व प्रक्रियाओं को पूरी तरह सही ठहराया है। जबकि बीजेपी सरकार ने इन भर्तियों को रद्द करवाकर, कर्मचारियों की नौकरी छीनने के लिए पूरा जोर लगा रखा था।
संतोष इस बात का भी है कि एक तरफ सत्ता से दूर होते हुए भी कांग्रेस की नीतियां आज भी कर्मचारियों को लाभ पहुंचा रही हैं। वहीं सत्ता में होते हुए भी बीजेपी आजतक एक भी ऐसी नीति नहीं बना पाई, जो कोर्ट में टिक सके और कच्चे कर्मचारियों को लाभ दे सके। कौशल कर्मियों को रोज काम से निकाला जा रहा है। जबकि चुनाव में बीजेपी ने इनको पक्का करने का झूठा करके 1.25 लाख परिवारों से वोट लिया था।
हाईकोर्ट द्वारा गेस्ट टीचर्स के नियमितीकरण का फैसला स्वागतयोग्य है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट भी कांग्रेस सरकार की 2014 की नियमितीकरण (Regularization) नीति पर मुहर लगा चुका है। हरियाणा की बीजेपी सरकार को अब एक पल की देरी किये बिना अदालत के फैसले को लागू करना चाहिए।
इस फैसले ने बीजेपी सरकार के उस झूठ का भी पर्दाफाश कर दिया जिसमें वो लगातार नियुक्तियों को नियमों के विरुद्ध बताकर कर्मचारियों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही थी। अदालत ने कांग्रेस की नियमितीकरण नीति को सही बताया और स्पष्ट किया कि सार्वजनिक प्रक्रिया के माध्यम से योग्य उम्मीदवारों का चयन किया गया था।
इसके उलट, बीजेपी सरकार की कोई भी नीति कोर्ट में नहीं टिकती। बीजेपी सरकार न तो पक्की नौकरियां दे पा रही है और न ही कौशल निगम के तहत रखे गए कर्मचारियों को पक्का कर पा रही है। चुनाव में 1.25 लाख कच्चे कर्मचारियों के परिवारों से झूठे वादे करके वोट लेने वाली बीजेपी की पोल खुल चुकी है।