इसको कवर क्यों नहीं करते मीडिया वाले?
न्यूयॉर्क में 𝗥𝗦𝗦 की इवेंट का जमकर विरोध हुआ है, जिसमें बड़ी संख्या हिंदुस्तानियों की है। गोदी मीडिया इसे नहीं दिखा रहा, दिखाएगा भी नहीं।
टीकमगढ़ के स्वास्थ्य केंद्र में कलेक्टर के सामने CHO महिला मरीज का BP नहीं ले पाईं। कलेक्टर को खुद आकर मशीन पकड़कर सिखाना पड़ा। ना जाने यही हालत कितने स्वास्थ्य केन्द्रों की होगी
ये कोई छोटी बात नहीं है। जो बुनियादी जाँच नहीं कर सकता, वो गाँव के स्वास्थ्य केंद्र में कैसे बैठा है? ट्रेनिंग कहाँ हुई? भर्ती कैसे हुई?गाँव के मरीज की जान इन्हीं हाथों में है। स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत यही है और जितनी कमिया और लाचारी स्वास्थ्य विभाग में है उतनी सायद ही किसी में हो ।
RSS चीफ मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में हिंदुत्व पर स्पीच दी. उन्होंने कहा कि जो हिंदू ये सोचता है कि भारत में एक भी मुसलमान नहीं होना चाहिए, वो असल में हिंदू है ही नहीं.
साथ ही, उन्होंने कहा कि सभी धर्म अलग-अलग रास्तों से एक ही ईश्वर तक पहुंचते हैं और हर इंसान बराबर है. उन्होंने राजनीति को ‘सेल्फ इंटरेस्ट का गेम’ भी बताया.
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Mohan Bhagwat | RSS
“तुम हमारे गिलास में पानी कैसे पी लिए?”
बस यह एक सवाल सुनिए और फिर उन तमाम दावों को याद कीजिए कि अब जाति कहाँ बची है, भेदभाव तो कब का खत्म हो चुका है, अब तो सब बराबर हैं!
जिस पानी पर किसी जाति का अधिकार नहीं, जिस प्यास में कोई ऊँच-नीच नहीं, उसी पानी का एक गिलास आज भी किसी इंसान को उसकी जाति याद दिला देता है। सोचिए, उस व्यक्ति पर क्या गुजरती होगी जिसे केवल पानी पी लेने भर से उसकी सामाजिक हैसियत बताने की कोशिश की जाए।
जातिवाद केवल किताबों में दर्ज इतिहास नहीं है। वह आज भी भाषा, व्यवहार, अपमान और रोज़मर्रा की छोटी-छोटी घटनाओं में दिखाई देता है।
इसलिए सवाल आरक्षण कब खत्म होगा का नहीं, सवाल यह है - जाति के नाम पर यह अपमान कब खत्म होगा?
Uttar Pradesh: मेरठ के एक सरकारी CHC में मरीज इलाज और इंजेक्शन के लिए भटकते नजर आए, जबकि परिसर में मेहंदी का रंगारंग कार्यक्रम चल रहा था. इस मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों की सुविधाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
What reaches our plate must be safe, No exceptions.
Food safety is not merely about inspections, raids or regulations. It is about public health, accountability and trust.
Every food business has a responsibility. Every citizen has a right to safety.
#TukaramMundhe#leadership #inspiuration #people
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पहले फूड डिपार्टमेंट में हाहाकार मचाई, उन्हें सुधारा और अब चिकित्सा क्षेत्र में आ गए।
हम बात कर रहे हैं FDA कमिश्नर IAS तुकाराम मुंडे की जिन्होंने कल पुणे में Cipla फॉर्मा का लाइसेंस रद्द कर दिया।
Cipla फॉर्मा में तुकाराम मुंडे को दवा के प्रचार और लेबलिंग के लिए ऐसी चीजें मिली हैं जो नियमों के विरुद्ध हैं।
इसमें उन्होंने बड़ी कार्यवाई करते हुए Reactin Plus दवा का लगभग 11.19 लाख का स्टॉक जब्त करके मार्केट में गईं इस दवा को वापस मंगाने का आदेश दिया है।
अब FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे एक एक क्षेत्र में घुसते जा रहे हैं और यही डर लोगों को उनके सही ट्रैक पर ले आयेगा।
सुभाष चंद्रा का 22 हज़ार करोड़ का क़र्ज़ 6.5 करोड़ में निपटा दिया गया. सुभाष चंद्रा भाजपा के समर्थन से सांसद बने थे.
सुभाष चंद्रा की जगह कोई गरीब किसान होता तो 2-4 लाख रूपयों के लिए उसे फाँसी लगानी पड़ जाती.
प्राइवेट अस्पतालों में इलाज के नाम पर लूट तो हो ही रही है, ऊपर से सही और स्पष्ट मेडिकल ओपिनियन भी नहीं मिलता। छोटी-सी बीमारी के लिए चार डॉक्टरों को दिखाओ तो चारों की अलग राय- कोई अलग जाँच लिखेगा, कोई अलग बीमारी बताएगा और कोई अलग इलाज।
सरकार को सभी अस्पतालों के लिए पारदर्शी और एकसमान मानक बना देने चाहिए! किस बीमारी में कौन-सी जाँच जरूरी है, इलाज का उचित खर्च कितना है और मरीज को पूरी जानकारी देना अनिवार्य हो। चिकित्सा सेवा है, मरीज की मजबूरी का कारोबार नहीं।
इस देश का एकलव्य कमजोर नहीं है जो ऊपर गद्दी पर बैठा द्रोणाचार्य है वो हरामी है।
ये बात बाबा साहब अच्छे से जानते थे इसी लिए उन्होंने हजारों साल से शोषित,वंचित रहने वाले समाज के बच्चों को आरक्षण का ब्रह्मास्त्र दिया।
गर्दनीबाग धरना स्थल पर राशन आनंद सर ने कहा BPSC का कैलेंडर है तो BSSC का भी कैलेंडर होना चाहिए..!
क्यों नहीं है कैलेंडर?
छात्रों की मांग को जल्द बिहार सरकार को स्वीकार करके निष्पक्षता दिखानी चाहिए।
दिल्ली के इस सरकारी स्कूल में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी आईं, गृह मंत्री अमित शाह भी आए, फिर भी ऐसा हालात हैं, तो जहां नहीं गए होंगे वहां के स्कूलों का क्या हाल होगा।
#SchoolThikKaro
Gen-Alpha बच्चों ने जो हिम्मत दिखाई है, वह सिर्फ़ तारीफ़ नहीं, सबके लिए सीख है।
किताबों में पढ़ते थे अपने हक़ के लिए आवाज़ उठाओ और सच के साथ खड़े रहो।
इन बच्चों ने वही बात Classroom से ज़मीन पर उतार दी।
जिन्हें हम देश का भविष्य कहते हैं, वे आज अपने वर्तमान की लड़ाई खुद लड़ रहे हैं।
शायद अब बड़ों को भी इन बच्चों से सीखने की ज़रूरत है। #schoolthikkaro