मिलिए अजय यादव से
अलग-अलग देश में जाकर पावरलिफ्टिंग में भारत के लिए अब तक पांच गोल्ड मेडल जीत चुके हैं।
बिहारी क्रिकेटर मुकेश कुमार और आकाश दीप को बिहार सरकार ने DSP का पद दिया है हाल ही में।
झारखंड के लिए क्रिकेट खेलने वाला ईशान किशन को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा एक करोड़ नगदराशि दिया जा चुका है।
वही अजय यादव को केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने उनके घर पर जाकर सिर्फ एक गुलदस्ता भेंट कर दिया।
अजय यादव को कोई स्पॉन्सर करने वाला नहीं है अपने मेहनत के कमाई के पैसे से फ्लाइट टिकट और होटल का खर्चा उठाते हैं वियतनाम रूस यूएई समेत कई देशों मेडल जीत चुके हैं।
बिहार सरकार द्वारा अजय यादव के साथ भेदभाव क्यूं किया जा रहा है।
यूरोप में होने वाले खेल के लिए अजय के पास पैसे नहीं जो की कुछ महीने बाद होने वाला है।
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इस देश मे कुछ सवाल सिर्फ राहुल गांधी के लिए रिजर्व हैं।
जिनका दायरा, मोहम्मद गोरी लेकर खलजी, बाबर, औरंगजेब, अंग्रेज, नेहरू, इन्दिरा, मनमोहन तक फैला हो सकता है।
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राहुल की क्वालिफिकेशन के बारे मे रामचन्द्र गुहा का सवाल, ऐसा ही स्पेशल सवाल है। भारत के 99% नेता, नेता बनने के पहले क्या करते थे, इसकी जानकारी न तो आम लोगो है,
न वे इसकी परवाह करते हैं।
मसलन, बिना कोई अनुभव , बिना कोई चुनाव लड़े, डायरेक्ट शपथ लेकर अनिर्वाचित मुख्यमंत्री बनने के पहले, हमारे प्रधानमंत्री क्या करते थे??
पब्लिक डोमेन में इसकी सूचना शून्य है।
अब भले वे खुद स्वीकार करें, कि वे पढ़े लिख नही पाये, स्टेशन पर चाय बेची, 35 वर्ष भिक्षाटन करते रहे - तो भी इससे किसी को फर्क नही पड़ता।
मगर राहुल के बारे मे जानना है।
गहराई से, और तथ्यपरक जानना है।
और नकारना है।
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दरअसल राहुल से उसकी योग्यता नही पूछी जाती, उन्हें प्रच्छन्न रूप से निर्योग्य घोषित किया जाता है। और निर्योग्यता का एक ही कारण है- गांधी सरनेम के साथ पैदा होना..
और दरअसल यही गुहा जैसो का ऑब्जेक्शन है। वरना तो 5 बार का सांसद, 4 राज्य सरकारो का पॉवर सेंटर, केंद्रीय सरकार में 10 साल तक निर्णय बदलने की ताकत रखने वाला शख्स.
जिसे विभिन्न संसदीय समितियों में दो दशक का अनुभव हो,
पब्लिक पॉलिसी की पुख्ता समझ हो, कैम्ब्रिज मे पढ़ा हो और और अर्थव्यवस्था की दशा दिशा की बार बार सटीक पूर्वसूचना देता हो, अगर किसी और दल या देश में में 100 सांसद लेकर बैठा होता..
तो उससे यह सवाल करने की हिम्मत किसी मे न होती।
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लेकिन आप राहुल से पूछ सकते है।
क्योकि राहुल से डर नही लगता।
रामचन्द्र गुहा का वह वीडियो हमने देखा है, जिसमे सरकार के विरुद्ध तख्ती लेकर खड़े हो जाने भर से पुलिस उन्हें कुत्तो की तरह घसीटकर ले गई। इसके बाद वे दोबारा सरकार के नाम की तख्ती लेकर चौराहे पर नही गए।
राहुल के नाम की तख्ती सेफ है।
गुहा को पता है।
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और यही "सेफ" फीलिंग राहुल की उपलब्धि है। उसके 20 साल के पोलिटिकल करियर का एसेंस है।
रामचन्द्र गुहा इस देश मे भाजपा/ मोदी की हेजेमनी को राहुल पर थोपते है, तो उनके इतिहासकार होने की समझ पर शक होता है।दरअसल, जो वे स्वीकार करने से बच रहे है, वो यह कि आज देश की राजनीतिक हालात, एक आम चुनावी राजनीति नही, एक कंट्रोल्ड सामाजिक परिवर्तन है।
यह परिवर्तन, मीडिया, ज्युडिशयरी, चुनाव आयोग, ब्यूरोक्रेसी और एजेंसियों के शीर्ष पर कठपुतलियां बिठाकर थोपा गया है। जिसके नीचे जनाक्रोश उबल रहा है।
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इस आक्रोश की प्रतिक्रिया को विस्फोटक, और विध्वंसक होने से बचाने, और गृहयुद्ध समान हालात टालने के लिए किसी भी विपक्ष को बहुत धैर्यवान, सॉफ्ट होने की जरूरत है।
वरना जिस स्ट्रीट फाइट, सँगठनीकरण और आक्रामक राजनीति की अपेक्षा, राम गुहा आज राहुल गांधी से कर रहे है- उसका नतीजा पिछले 1 माह का बंगाल, और 3 साल से मणिपुर देखकर समझ लेना चाहिए।
आप पूरे देश मे ऐसा चाहते हैं???
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गम्भीर इतिहासकार जानता है, कि ऐसी सत्ता अपनी कब्र खुद बड़ी गहरी खोदती है।
मौजूदा दौर उन भावनाओ का एक्सप्रेशन है, जिसे हमारे समाज ने 70 साल तक ऐसे छिपा रखा था रखी थी, जैसे कोई बूढा अपने किशोर उम्र के कुटैव छिपाकर रखता है। बेहयाई को मान्यता मिलते ही वह धारा खुलकर खेल रही है।
लेकिन तमाम धन, ताकत, नंगई और मैनिपुलेशन के बावजूद 37-38% जनसमर्थन उसका पीक था। अब तो आगे सिर्फ ढलान है।
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गुहा हों, या उनकी तरह डेस्परेट दूसरे लोग, जान लें कि हिंदुस्तान की आत्मा इस तरह बहुत देर कुचली नही जा सकती।
इस झँजवात से बाहर निकलने का रास्ता, यह देश जल्द तय करेगा। पर उस उबाल का पथ प्रदर्शक कोई ईमानदार, दूरदर्शी, और नैतिक मूल्यों पर ठहराव रखने वाला ऐसा शख्स होना चाहिए। जो शांति, साहचर्य और मेल मिलाप का चेहरा हो।
इस वक्त, बिलाशक..
वह राहुल है।
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इस दौर का बुद्ध है।
जिसे महज राजघराने की पैदाइश की वजह से खारिज कर देना, और खास तरह की प्रतिक्रियाओं की आशा रखना, बौद्धिक नही- बायस्ड होने के लक्षण हैं।
जो राम गुहा कई बार प्रदर्शित कर चुके हैं। उनका फैन होने के नाते उन्हें सप्रेम सलाह है कि वे समाज मे अपनी उम्र औऱ अनुभव का आडम्बर बनाये रखें। भ्रम और खीज की शिकार जुबान को विराम दें।
और मौन की शक्ति महसूस करें।
कल नोएडा की सड़कों पर जो हुआ, वो इस देश के श्रमिकों की आख़िरी चीख़ थी - जिसकी हर आवाज़ को अनसुना किया गया, जो मांगते-मांगते थक गया।
नोएडा में काम करने वाले एक मज़दूर की ₹12,000 महीने की तनख्वाह,₹4,000-7,000 किराया। जब तक ₹300 की सालाना बढ़ोतरी मिलती है, मकान मालिक ₹500 सालाना किराया बढ़ा देता है।
तनख्वाह बढ़ने तक ये बेलगाम महंगाई ज़िंदगी का गला घोंट देती है, कर्ज़ की गहराई में डुबा देती है - यही है “विकसित भारत” का सच।
एक महिला मज़दूर ने कहा - “गैस के दाम बढ़ते हैं, पर हमारी तनख्वाह नहीं।” इन लोगों ने शायद इस गैस संकट के दौरान अपने घर का चूल्हा जलाने के लिए ₹5000 का भी सिलेंडर खरीदा होगा।
यह सिर्फ़ नोएडा की बात नहीं है। और यह सिर्फ़ भारत की भी बात नहीं है। दुनियाभर में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं - पश्चिम एशिया में युद्ध की वजह से सप्लाई चेन टूट गई है।
मगर, अमेरिका के टैरिफ़ वॉर, वैश्विक महंगाई, टूटती सप्लाई चेन - इसका बोझ Modi जी के “मित्र” उद्योगपतियों पर नहीं पड़ा। इसकी सबसे बड़ी मार पड़ी है उस मज़दूर पर जो दिहाड़ी कमाता है, तभी रोज़ खाता है।
वो मज़दूर, जो किसी युद्ध का हिस्सा नहीं, जिसने कोई नीति नहीं बनाई - जिसने बस काम किया। चुपचाप। बिना शिकायत। और उसके बदले अपना हक मांगने पर उन्हें मिलता क्या है? दबाव और अत्याचार।
एक और ज़रूरी मुद्दा - मोदी सरकार ने 4 लेबर कोड जल्दबाज़ी में बिना संवाद नवंबर, 2025 से लागू कर, काम का समय 12 घंटे तक बढ़ा दिया।
जो मज़दूर हर रोज़ 12-12 घंटे खड़े होकर काम करता है फिर भी बच्चों की स्कूल फ़ीस क़र्ज़ लेकर भरता है - क्या उसकी मांग ग़ैरवाजिब है? और जो उसका हक़ हर रोज़ मार रहा है - वो “विकास” कर रहा है?
नोएडा का मज़दूर ₹20,000 माँग रहा है। यह कोई लालच नहीं - यह उसका अधिकार, उसकी जिंदगी का एकमात्र आधार है।
मैं हर उस मज़दूर के साथ हूं - जो इस देश की रीढ़ है और जिसे इस सरकार ने बोझ समझ लिया है।
सवाल जो नहीं पूछे गए!!
ब्लादिमीर पुतिन भारत दौरे पर हैं। स्वतन्त्र भारतीय पत्रकारों के लिए उनका इंटरव्यू अरेंज किया गया। उन्होंने सवाल पूछे।
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पुतिन उस सोवियत संघ के राष्ट्रपति नहीं। वे दुनिया के दूसरे ध्रुव के लीडर भी नहीं। मगर दुनिया के सबसे शक्तिशाली राजनेताओं में हैं। उनकी रीढ़, जुबान और साहस कोई दायरा नहीं देखता।
खुलकर बात करने वाला निर्णायक शख्स।
इसलिए सोच-समझकर बोलता है।
और बात पर टिकता है।
प्रशंसा का मूड नहीं। बस बता रहा हूँ – कि ऐसे शख्स के मुंह से कुछ निकलवा लेना, भारत की विदेश नीति के लिए एक राह खोल सकता है।
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पुतिन एक ऐसे देश के मुखिया हैं जो अकूत तेल और खनिज सम्पदा पर बैठा है। मिलिट्री पावर है। हमे देने के लिए बहुत कुछ है।
तो जो बातें सार्वजनिक रूप से नहीं निकलतीं, अपने देश के पत्रकार उन्हें निकलवाने की कोशिश करते हैं। क्या निकलवाने की कोशिश होनी चाहिए थी?
कुछ सवाल नीचे हैं।
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1- क्या रूस भारत को नॉर्दर्न सी रूट का स्थायी साझेदार बनाएगा? क्या चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री कॉरिडोर को मिलकर विकसित करने पर विचार कर रहा है?”
आर्कटिक में रूस को अकेले अरबों डॉलर लगाने हैं। भारत साझेदार बने तो स्वेज से 40% सस्ता, चीन-मुक्त नया यूरोप रूट हमारे हाथ में आ जाएगा।
2.क्या रूस भारत के साथ मिलकर BRICS में स्वर्ण- आधारित नई भुगतान प्रणाली विकसित करेगा?”
अमेरिका ने गोल्ड से डॉलर अलग करके नोट छापने की फैक्ट्री बना ली है। वहां रूस के 300 अरब डॉलर फ्रीज हैं। अगर पुतिन हाँ कहें, तो दुनिया के डी-डॉलराइजेशन में भारत मुख्य खिलाड़ी बन जाएगा।
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3. यूक्रेन युद्ध के बाद की नई विश्व व्यवस्था में, क्यारूस चाहता है कि भारत एक स्वतंत्र ध्रुव बने? या वह या अमेरिका/चीन के साथ पूरी तरह खड़ा हो?
रूस को डर है कि क्वाड के जरिए भारत अमेरिकी खेमे में चला जाएगा। पुतिन की हाँ, भारत की स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी को रूसी बैकिंग दे देगी।
4. क्या रूस भारत को S-500, Su-57, हाइपरसोनिक मिसाइल और परमाणु पनडुब्बी की पूरी तकनीक मेक-इन-इंडिया के तहत ट्रांसफर करेगा?
प्रतिबंधों से रूस की अर्थव्यवस्था दबी है। उसे भारत से बड़े ऑर्डर चाहिए। हाँ हुई तो 8-10 साल में भारत पाँचवीं पीढ़ी की सेना बन जाएगा।
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5. “सांस्कृतिक-ऐतिहासिक रूप से भारत-रूस संबंध चीन से कहीं गहरे हैं। क्या रूस मानता है कि लंबे समय में भारत, चीन से ज्यादा विश्वसनीय साझेदार साबित हो सकता है?
पुतिन डिप्लोमैटिक लेकिन सकारात्मक जवाब देंगे। वे जानते हैं कि चीन उनकी भी जमीन हड़प रहा है और भविष्य में वह प्रतिद्वंद्वी बनेगा।
6. UNSC के विस्तार में क्या रूस खुलकर भारत की वीटो पावर वाली स्थायी सदस्यता का समर्थन करेगा?
रूस UNSC में अकेला पड़ रहा है। उसे भारत जैसा स्थायी साथी चाहिए। पुतिन की हाँ हमारी सीट को लगभग पक्का कर देगी।
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7. अगर कल NATO-रूस या अमेरिका-चीन के बीच विश्व युद्ध हुआ, तो क्या रूस भारत की तटस्थ किंतु रूस-मित्र नीति का सम्मान करेगा?”
रूस को आश्वासन चाहिए कि भारत उसका साथ नहीं छोड़ेगा। हाँ मिली तो भारत को भविष्य के बड़े युद्ध में “सुरक्षित तटस्थता” का लाइसेंस मिल जाएगा।
8. क्या रूस भारत को अगले 20-25 साल तक डिस्काउंटेड दर पर तेल, गैस, कोयला और यूरिया की गारंटी दे सकता है?”
यूरोप का बाजार रूस ने खो दिया। भारत उसका सबसे बड़ा, भरोसेमंद खरीदार है। उनकी मजबूरी में हमारी 2047 तक की ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा छिपी है।
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सवाल और भी बुने जा सकते थे।
पर ऐसे सवाल “ट्रेक्टर-ट्रॉली भिड़ंत” और “आप थकते क्यों नहीं” करने वाले पत्रकारों को नहीं सूझते। सोचिये, इनका करियर का सबसे बड़ा इंटरव्यू था। क्या पूछा..?
“आपके कार्यकाल में जितने भारतीय प्रधानमंत्री रहे, उनमें सबसे महान कौन लगता है?”
अपेक्षा क्या थी? पुतिन मुट्ठी भांजकर “अबकी बार 400 पार, मोदी है तो मुमकिन है” का नारा लगाएँगे?
जवाब मिला: “किसी दूसरे देश के नेताओं को इस तरह वर्गीकृत करना अशोभनीय है।”
शुद्ध वेस्टेड ऑपर्च्युनिटी।
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विदेश मंत्रालय ने सवाल देखे भी होंगे, एप्रूव भी किए होंगे।
फिर भी ये पूछा गया। उन्हें तो सवालों की फेहरिस्त बनाकर, और मनमाफिक उत्तर न आने पर, काउंटर क्वेश्चन भी बनाकर देने चाहिए थे।
लेकिन नही।
नोएडा की सोनपरियां और साउथ ब्लॉक के बाजेवाले, पितृपूजन से आगे सोच नही पाते। तो भारत के भाग्य में चेन्नई-व्लादिवोस्तोक सी-रूट नहीं, गैस-तेल-यूरिया के दीर्घकालिक सस्ते सौदे नहीं,
BRICS करेंसी भी नहीं।
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बस “पुतिन ने मोदी की तारीफ की” – यही हमारी विदेश नीति का लक्ष्य हो गया है। और पुतिन का मलमूत्र कौन उठाकर ले गया, यही ब्रेकिंग न्यूज रहेगी।
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बिहार में दलित, ओबीसी और माइनाॅरिटी का बड़ा हिस्सा सत्ताधारी NDA को हराना चाहता है पर Congress-RJD की अगुवाई का INDIA एलायंस शायद जीतना नहीं जानते!इस बारे में आप कुछ और जानना चाहते हैं तो Urmilesh Samvad पर हमारा आज रात 9:30 का वीडियो देखिये!
मध्य प्रदेश में एक कुशवाहा युवक को ब्राह्मण के पैर धोकर पानी पीने को मजबूर किया गया। यह 21वीं सदी नहीं, जातिवाद के अंधकार युग की तस्वीर है। यह धर्म नहीं, सामाजिक गुलामी का प्रदर्शन है। सरकार और प्रशासन की चुप्पी शर्मनाक है।
@DGP_MP@DrMohanYadav51