यूपी की राजधानी लखनऊ के पड़ोसी ज़िला हरदोई में एक सरकारी अधिकारी शाहाबाद के एसडीएम श्री सुशील मिश्रा पर सरकारी निरीक्षण के दौरान दबंगों द्वारा ईंट व पत्थर आदि से किया गया जानलेवा हमला तथा उसमें उनके घायल होकर इलाज के लिये अस्पताल में भर्ती होने की ख़बर है, जो दुर्भाग्यपूर्ण ही नहीं बल्कि अति-चिन्ताजनक भी है। ऐसी घटनाओं की रोकथाम ज़रूरी है ताकि सरकारी कार्यों में कथित भ्रष्टाचार के साथ-साथ प्रदेश को अराजक तत्वों से बचाया जा सके। सरकार व्यापक जनहित के मद्देनज़र, इस ओर ज़रूर समुचित ध्यान दे।
देश की राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर के एक होटल में आज हुआ भीषण अग्निकाण्ड अति-दुर्भाग्यपूर्ण तथा इसमें काफी लोगों की हुई मौत तथा कई लोगों के घायल होने की भी घटना अत्यन्त ही दुखद। सभी पीड़ित परिवार वालों के प्रति मेरी गहरी संवेदना।
ऐसी दुखद घटनाओं की रोकथाम पर केन्द्र व दिल्ली सरकार को ज़रूर विशेष ध्यान देना चाहिये ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृति ना हो सके।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री व भाजपा के वरिष्ठ नेता योगी आदित्यनाथ जी को आज उनके जन्मदिन पर हार्दिक बधाई एवं उनके स्वस्थ्य जीवन व दीर्घायु होने की भी शुभकामनायें।
दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड में जान गँवाने वाले हर व्यक्ति और उनके परिवार के साथ मेरी गहरी संवेदनाएं है। जिन्होंने अपनों को खोया, उनके दुख की कोई भरपाई नहीं लेकिन इतना ज़रूर है कि वे इस घड़ी में अकेले नहीं हैं। पूरा देश उनके साथ खड़ा है।
मैं जानता हूँ कि कोई भी हादसा पूरी तरह रोका नहीं जा सकता। लेकिन कुछ हादसे ऐसे होते हैं जिनकी कहानी हम पहले भी सुन चुके होते हैं और यही सबसे तकलीफ़देह बात है। उपहार सिनेमा से लेकर आज तक, दिल्ली ने आग से होने वाली मौतों का यह सिलसिला बार-बार झेला है। हर बार वही सवाल उठते हैं, और हर बार जवाब अधूरे रह जाते हैं।
ईमानदारी से कहूँ तो इन घटनाओं की ज़िम्मेदारी किसी एक पार्टी पर नहीं डाली जा सकती। दिल्ली में बारी-बारी से कांग्रेस, बीजेपी और आम आदमी पार्टी ने सरकार चलाई है, नगर निगम भी इनके पास रहा है और फिर भी फायर सेफ्टी के बुनियादी नियम लागू करना किसी की प्राथमिकता नहीं बन सका। बिना मंज़ूरी के रेस्टोरेंट चलते रहे, अनाधिकृत निर्माण होते रहे, और जिनकी ज़िम्मेदारी निगरानी की थी, वे कहीं और देखते रहे। यह सिर्फ़ प्रशासन की चूक नहीं है यह उस भरोसे की चूक है जो हर नागरिक अपनी सरकार से करता है।
दिल्ली के लोग सिर्फ़ फ़रियाद नहीं कर रहे वे यह माँग रहे हैं कि अगली बार किसी और परिवार को इस त्रासदी को ना झेलना पड़े। यह माँग बहुत बड़ी नहीं है। यह वही बुनियादी माँग है जिसका हर लोकतंत्र अपने नागरिकों से वादा करता है।
हम मिलकर इसे बदल सकते हैं,पार्टी से ऊपर उठकर, चुनाव से ऊपर उठकर। यही उन परिवारों के प्रति सच्ची संवेदना होगी जिन्होंने आज अपनों को खोया है।
यूपी के जिला मेरठ की सरधना विधानसभा क्षेत्र के ग्राम चिरोड़ी की लगभग 17 वर्षीय बेटी एंव राष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी अनुष्का पाल की बदमाशों द्वारा की गई हत्या की खबर अत्यंत दुःखद एंव चिंताजनक है। यह घटना समाज को झकझोर देने वाली है। सरकार इस जघन्य अपराध में शामिल सभी दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी सुनिश्चित कर उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई करे, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके तथा भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृति न हो।
यू.पी. के जिला गाजियाबाद में खोड़ा के एक नौजवान युवक सूर्या चौहान की हुई हत्या की घटना अति दुखद व चिन्ताजनक। इस प्रकार की आयदिन हो रही घटनाओं की रोकथाम के लिए शासन व प्रशासन को सही कदम उठाने की जरूरत है। साथ ही इस घटना में शामिल अपराधियों की पहचान करके उन्हें कानूनी सजा जरूर दी जाए।
इसके साथ ही चुनाव का समय जैसे-जैसे नज़दीक आता जाएगा ऐसी घटनाओं के व्यापक दुष्परिणाम होंगे। अतः सरकार पूरी तरह सतर्क रहे।
1. यू.पी. के ग्रेटर नोएडा के जेवर में की गई लगभग 15 वर्ष के गोपाल शर्मा की हत्या अति दुःखद व चिन्ताजनक। सरकार इस घटना की उच्च-स्तरीय जाँच कराये और इसके सभी अभियुक्तों को कड़ी सजा दी जाये।
2. साथ ही कल हमीरपुर में निर्माणाधीन पुल के गिरने से कई मजदूरों की हुई मौत के प्रकरण को भी सरकार गम्भीरता से लेते हुये मृतकों के आश्रितों को उचित आर्थिक मदद दे तथा घायलों का भी विशेष ध्यान रखा जाये, बी.एस.पी. की यह भी मांग।
ईद अल अज़हा, अर्थात् आम बोलचाल की ज़ुबान में बक़रीद पर्व की दुनिया भर में रहने वाले सभी भारतीय मुस्लिम भाई-बहनों व उनके परिवार वालों को दिली मुबारकबाद तथा उनके साथ-साथ समस्त देशवासियों के ख़ुश व ख़ुशहाल ज़िन्दगी की शुभकामनायें।
सभी पर्व व त्योहार आदि पूरी शान्ति, आपसी सौहार्द और भाईचारे के साथ गुज़रे तो यह देश व जनहित में हमेशा बेहतर, ताकि देश-प्रदेश के विकास व यहाँ के लोगों की तरक़्क़ी पर पूरी ऊर्जा, शक्ति व संसाधन लग सके, जैसाकि बी.एस.पी. की यहाँ यूपी में रही चारों सरकारों में हमेशा से सभी सरकारों में दुर्लभ रही ’’क़ानून द्वारा क़ानून का राज’’ के तहत् पूरी तरह से सर्वसमाज-हितैषी ’सर्वजन हिताय व सर्वजव सुखाय’ की बेहतरीन सरकार रही।
आप सभी को ईद-उल-अज़हा की दिली मुबारकबाद।
कुर्बानी का ये पाक त्योहार हमें त्याग, भाईचारे और इंसानियत का पैगाम देता है।
आदरणीय बहन कु. मायावती जी के चार बार के शासनकाल में हर खास ओ आम के घर में बरकत, हर दिल में अमन और हर बस्ती में खुशहाली थी। हमें एक बार फिर वैसा ही प्रदेश बनाना है।
बीएसपी, अपनी सर्वसमाज-हितैषी सरकार के लिए आज भी प्रतिबद्ध है।
आज जब देश में नफरत की राजनीति हो रही है, भाई को भाई से लड़ाया जा रहा है ईद का यह पैगाम और भी ज़रूरी हो जाता है।
परमपूज्य बाबा साहब का संविधान हमें सिखाता है कि इस देश में हर नागरिक बराबर है, चाहे उसका मज़हब कोई भी हो, जाति कोई भी हो।
हम उस राजनीति के खिलाफ हैं जो मंदिर-मस्जिद में बाँटकर वोट माँगती है।
हम उस भारत के साथ हैं जहाँ ईद, दिवाली और होली, सब मिलकर मनाए जाते हैं।
भारत एक रहे, मज़बूत रहे।
ईद मुबारक।
उत्तर प्रदेश जैसे विशाल आबादी वाले राज्य में भीषण गर्मी के इस मौसम में बिजली की कम अपूर्ति व कटौती आदि की आम शिकायतों व उसको लेकर विशेषकर ग़रीब, मध्यम वर्ग, किसान, छोटे व्यापारियों व अन्य करोड़ों मेहनतकश लोगों का जीवन अति-कष्टदायी बना हुआ है तथा इसको लेकर लोग विभिन्न रूपों में अपना आक्रोश भी प्रकट कर रहे हैं, जिसकी चर्चा मीडिया में भी काफी व निरन्तर रहती है।
अतः सरकार से अपील है कि वह बिजली आपूर्ति सम्बंधी लोगों के कष्ट व परेशानियों को ध्यान में रखते हुये ज़रूरी उपाय तत्काल सुनिश्चित करे। इसके साथ ही, नये पावर प्लाण्ट आदि के माध्यम से भी आगे के लिये बिजली आपूर्ति की स्थिति को सुधारने का प्रयास करे तो यह व्यापक जनहित में उचित होगा।
जैसाकि सर्वविदित है कि अपने भारत देश की दुनिया भर में अच्छी एवं अनोखी मानवतावादी पहचान ख़ासकर परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के अनूपम संविधान को लेकर ज़्यादा है, जो पूरी तरह से धर्मनिरपेक्षता (सेक्युलरिज़्म) के सिद्धान्त पर आधारित है अर्थात् यहाँ रहने वाले विभिन्न धर्मों के मानने वाले सभी लोगों को एक-समान आदर-सम्मान देना है तथा देश का मिज़ाज भी अधिकतर ऐसे ही उच्च मानवीय गुणों पर आधारित सभी धर्मों के मानने वालों को उनके जान, माल व मज़हब की आज़ादी एवं सुरक्षा आदि सुनिश्चित करता है और इसके निर्धारित व बताये हुये रास्तों पर चलना सभी सरकारों की ही नहीं बल्कि सभी नागरिकों की भी परम व प्रमुख ज़िम्मेदारी है।
इतना ही नहीं बल्कि यह भी सर्वविदित ही है कि यही वह सुरक्षा कवच है जिसके सहारे विदेशों में भारत-विरोधी प्रोपागण्डा आदि का देश हमेशा बख़ूबी सामना करता है, किन्तु केन्द्र व सभी राज्य सरकारों का यह दायित्व/ज़िम्मेदारी बनती है कि वे ऐसा कुछ भी ना करें और ना ही वैसे कुछ होने दें जिससे देश व ख़ासकर भारत सरकार से इसके बारे अप्रिय सवाल-जवाब हो।
इस क्रम में ख़ासकर पश्चिम बंगाल में चुनाव उपरान्त जारी हिंसा की सर्वत्र हो रही चर्चाओं में भी विशेषकर मा. हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद सरकारों को इसके प्रति सतर्क व अराजकता के विरुद्ध सख़्त हो जाना चाहिये, ताकि किसी भी सरकार के ऊपर संकीर्ण राजनीति, धार्मिक भेदभाव, जातीय द्वेष व पक्षपात आदि का दोष लगे, यह अति-चिन्ता की बात ज़रूर होनी चाहिये।
इसके साथ ही, व्यापक जनहित व जनसुरक्षा के मद्देनज़र स्थापित नियम-क़ानूनों के अनुपालन या तत्सम्बंधी नये क़ानून आदि बनता है तो उसका अनुपालन सभी धर्मों के लोगों पर एक समान रूप में होना चाहिये अर्थात् संविधान व क़ाूनन की मान-मर्यादाओं को बरकरार रखने के लिये ज़रूरी है कि क़ानूनों का इस्तेमाल धार्मिक व जातीय भेदभाव/पक्षपात व द्वेष के बिना हो, ताकि सरकारें सर्वसमाज व सर्वधर्म हितैषी हों और लोगों को लगे भी तथा जिससे सरकारों की संवैधानिक गुडविल प्रभावित ना हो तो यह उचित होगा।
वैसे भी देश के ख़ासकर सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक हालात इतने कठिन व ज्वलन्त समस्यायें इतने अधिक दुखद/कष्टदायी हो गये हैं कि सभी सरकारों को उन विशेष मुद्दों पर अपना ध्यान पूरी तरह से केन्द्रित करना चाहिये, ना कि विध्वंसकारी इमेज आदि के माध्यम से लोेगों का ध्यान उस पर से बाँटने का प्रयास करना चाहिये, क्योंकि इससे देश की राष्ट्रीय समस्याओं का समाधान नहीं होगा बल्कि क्राइसिस के हालात को और बढ़ायेेगा, जो देश व जनहितैषी कतई भी नहीं होगा, यही अपील।
अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में ज़बरदस्त आंधी-तूफान से हुई जान-माल की भारी तबाही से प्रभावित लोगों/परिवारों की मदद के लिए राज्य सरकार को अपनी पूरी उदारता बरतते हुये हर प्रकार से उनके सहयोग के लिये आगे आना चाहिये ताकि वे लोग अपने उजड़े/बिखरे हुये पारिवारिक जीवन को समेट कर दोबारा से अपनी ज़िन्दगी शुरू कर सकें।
इसके साथ ही, ख़ासकर पेट्रोलियम पदार्थों आदि, इन आवश्यक वस्तुओं के मूल्य में अनवरत वृद्धि को जारी रखते हुये केन्द्र सरकार द्वारा पेट्रोल व डीज़ल आदि की क़ीमत में तीन रुपये प्रति लीटर की वृद्धि करोड़ों ग़रीबों व मेहनतकश परिवारों, खेती-किसानी आदि के साथ-साथ मिडिल क्लास के जीवन को भी बुरी तरह से प्रभावित करेगा, अर्थात् इस महंगाई का सीधा असर इन सबके परिवार के पालन-पोषण पर पड़ेगा।
इसीलिये सरकार को महंगाई व जीवन दुष्कर करने वाली इस प्रकार की नियमित वृद्धि को कम करने के लिए ज़रूरी सार्थक क़दम उठाने चाहिये, यही समय की माँग है।
समाजवादी पार्टी (सपा) के एक प्रमुख राष्ट्रीय प्रवक्ता द्वारा अभी हाल ही में ब्राह्मण समाज को लेकर की गयी अभद्र, अशोभनीय एवं आपत्तिजनक टिप्पणी व बयानबाज़ी आदि को लेकर हर तरफ उपजा भारी आक्रोश व उसकी तीव्र निन्दा स्वाभाविक ही है तथा इस विवाद के फलस्वरूप पुलिस द्वारा मुक़दमा दर्ज किये जाने के बाद भी यह मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। किन्तु संकीर्ण जातिवादी राजनीति करने वाली सपा के नेतृत्व की इस मामले को लेकर ख़ामोशी से भी मामला और अधिक गंभीर होकर काफी तूल पकड़ता जा रहा है। स्थिति भी तनावपूर्ण होती जा रही है।
वैसे भी सपा प्रवक्ता के ग़ैर-ज़िम्मेदाराना बयान से ब्राह्मण समाज के आदर-सम्मान व स्वाभिमान को जो ठेस पहुँची है तो उसको गंभीरता से लेते हुये सपा मुखिया को इसका तत्काल संज्ञान लेकर ब्राह्मण समाज से छमा याचना व पश्चाताप कर लेना चाहिये तो यह संभवतः उचित होगा।
इसके अलावा, इस ताज़ा प्रकरण से लोगों की नज़र में यह भी साबित है कि सपा का ख़ासकर दलितों, अति-पिछड़ों व मुस्लिम समाज आदि की तरह ब्राह्मण समाज-विरोधी भी इनका जातिवादी चाल व चरित्र बदला नहीं है बल्कि और ज़्यादा गहरा ही हुआ है तथा इसके साथ ही, ब्राह्मण समाज के प्रति वर्तमान सरकार के रवैयों को लेकर भी जो ज़बरदस्त नाराज़गी इस समाज में देखने को मिल रही है वह भी किसी से छिपा हुआ नहीं है,
जबकि यह सर्वविदित है कि बी.एस.पी. द्वारा सर्वसमाज की तरह ब्राह्मण समाज को भी पार्टी व सरकार में भी भरपूर आदर-सम्मान देने के साथ-साथ हर स्तर पर उन्हें उचित भागीदारी भी दी गयी है अर्थात् बी.एस.पी. में यूज़ एण्ड थ्रो नहीं है बल्कि सर्वसमाज का हित हमेशा सुरक्षित रहा है।
NEET-UG 2026 का रद्द होना सिर्फ एक परीक्षा का रद्द होना नहीं है, यह उन लाखों परिवारों के भरोसे की बात है, जिन्होंने अपने बच्चों के लिए सपने देखे, मेहनत से पढ़ाया और यह माना कि अगर बच्चा ईमानदारी से पढ़ेगा, तो व्यवस्था भी उसके साथ ईमानदारी से पेश आएगी।
मैं जानता हूँ कि देश भर में एक साथ परीक्षा कराना आसान काम नहीं है। लेकिन हमारे युवाओं को इतना अधिकार तो है कि उनकी मेहनत का सम्मान हो, और उनका भविष्य किसी की लापरवाही की भेंट न चढ़े।
जब पेपर लीक एक के बाद एक दोहराए जाएँ, और छात्र सड़कों पर न्याय माँगने को मजबूर हों तो यह सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं रह जाती, यह हमारे साझा भरोसे की चूक बन जाती है।
हमारे परम पूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे बड़ा हथियार बताया था। उस हथियार को कमजोर करने वालों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
सरकार और एजेंसियों को जवाब देना होगा कि आखिर हर बार युवाओं का भविष्य ही क्यों दांव पर लगाया जाता है?
देश के सभी छात्रों के साथ हमारी पूरी संवेदना और एकजुटता है। न्याय, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना अब सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है।
#NEET
अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध जारी युद्ध समाप्ति की अनिश्चितता के कारण ख़ासकर ऊर्जा संकट व विदेशी मुद्रा भण्डार की चिन्ताओं के मद्देनज़र मा. प्रधानमंत्री द्वारा देश के लोगों से ’संयम’ बरतने की गयी अपीलों से यह साबित है कि भारत के समक्ष संकट केवल पेट्रोल, डीज़ल, रसोई गैस आदि पेट्रोलियम पदार्थों को लेकर ही नहीं बल्कि आर्थिक संकट भी गहरायेगा, जिससे करोड़ों भारतवासियों का जीवन प्रभावित हो रहा है तथा जिसके जारी रहने की भी गंभीर आशंका है।
अर्थात् ऐसे समय में जबकि कोरोनाकाल की ज़बरदस्त मार के बाद रोज़ी-रोटी तक के संकट का जीवन झेल रही देश की लगभग सौ करोड़ जनता के पास और अधिक संयमित होने व खोने को कुछ ख़ास नहीं बचा है, तो ऐसी स्थिति में केन्द्र एवं राज्य सरकारें उन ग़रीब व मेहनतकश परिवारों को थोड़ी राहत देकर उनका सहारा बनने के लिये ख़ुद ही कुछ बेहतर करने का उपाय ज़रूर करें तो यह जन व देशहित में उचित होगा, ऐसी आम जन भावना।