जिस पर शराब रोकने की जिम्मेदारी थी …वही शराबबंदी को कमाई का जरिया बना लिया ..! इस लिए आज बिहार में शराबबंदी का ये हाल है .!
सिवान के उत्पाद निरीक्षक अंकेश कुमार गोड़ पर EOU की रेड चल रही है एक साथ पाँच जगह,ये इनका आलीशान अटलांटिका है, कई करोड़ रुपये गहने जेवरात बरामद हो चुके है अभी तक … !
हज़ारों लोग डुप्लीकेट पीकर मर गए,लाखो जेल में है,करोड़ो अपना लिवर किडनी और आँख ख़राब कर लिया ..! और ये भाई साहेब खरबो रुपए बना लिए .!
#EOU #Corrupción #sharabbandi
पत्रकारिता ऐसी होना चाहिए कि पेपर चोर आ'त्म'हत्या करने पर मजबूर हो जाये...
बाकी सरकारी बस का नहीं पेपर चोरी रोकना
एक बार सुनना शुरू करेंगे, अंत तक सुनेंगे
भारत तिवारी एनकाउंटर मामले में नया मोड़!
जिस अधिकारी एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा ने भारत तिवारी के एनकाउंटर का नेतृत्व किया था, उन्हें अब DSP के पद पर पदोन्नत कर दिया गया है।
इस बीच पूर्व NSG कमांडो लकी बिष्ट ने कई अहम दावे किए हैं। उनका कहना है कि करीब 19 साल पहले भी राजेश कुमार शर्मा पर मुज्जफरपुर में एक एनकाउंटर को लेकर आरोप लगे थे, लेकिन जांच के बाद उन्हें क्लीन चिट मिल गई थी।
मजदूर हो तो ट्रेन नहीं
वोटर हो तो VIP सेवा!
BJP ने गुजरात के सूरत से स्पेशल ट्रेन चलवाई. इस ट्रेन से पश्चिम बंगाल के लोगों को भरकर वोट करने भेजा गया. ये वही सूरत स्टेशन है, जहां एक दिन पहले ट्रेन पकड़ने आए मजदूरों को लाठी मिल रही थी. वो मजदूर यूपी-बिहार के थे.
A Turkish proverb says, “If a father bathes his children, both will laugh, and if a son bathes his father, both will cry.” Such is the painful beauty of life, where love comes full circle with time.
@Gyaneshwar_Jour मान्यवर, हम सभी कर्मियों की आवाज़ बुलंद करने के लिए दिल से धन्यवाद! और साथ ही यह भी उम्मीद करते है कि आने वाले दिनों में हम सभी को इस आउटसोर्सिंग व्यवस्था से मुक्ति मिलेगी।
मिलावटी खाना खाने से विक्रमशिला पुल के तीन पिलर्स को हुई फ़ूड पॉइजनिंग,
फ़िलहाल मौके पर हालत गंभीर बतायी जा रही है।
अब देखना ये है कि साँसे कब तक चलती हैं।
📍भागलपुर
#Beltron पर पहली पोस्ट से ही लगा कि समस्या बहुत ही गंभीर है. #Urmila के Payroll Management System से बहुतों को शिकायत है. सच जानना जरुरी है. आप [email protected] पर Mail कर समस्या तथ्य और प्रमाण के साथ बताएं. पहले समझते हैं, फिर नए मुख्य मंत्री के बनने पर नई सरकार में आपकी बातों को पहुंचाने का प्रयास करेंगे. Facebook और X पर साथ बने रहें.
" सौरभ द्विवेदी को दूसरा ख़त।"
प्रिय सौरभ, @saurabhtop
यह दूसरा ख़त है।
बाहर सड़कों पर तेज़ धूप बिखरी पड़ी है। मैं सड़क पार करते हुए एक बायपास के पास रुका हूँ। लोहे के एक भारी गर्डर वाले पुल के नीचे एक आदमी सोया है, शायद कूड़ा बीनता है। उसने प्लास्टिक की बोतलों से ठसाठस भरे एक बोरे को अपना तकिया बना लिया है और उसी खुरदुरे सिरहाने पर टिका, नींद में कुछ बड़बड़ा रहा है।
उसे देखकर सोच रहा था कि इंसान कितनी जल्दी किसी भी हालात के सांचे में ढल जाता है। ढल तो मैं भी जाता हूँ, और ढल तुम भी जाते हो। पर लल्लनटॉप के उस जाने-पहचाने आंगन से निकलकर जब तुमने 'एक्सप्रेस' की नई लाइन पकड़ी होगी, तो उस पुरानी कुर्सी को छोड़ने का थोड़ा दुख तो भीतर कहीं अटका ही होगा।
अज्ञेय की एक बहुत प्रामाणिक और मशहूर कविता है– "दुःख सबको मांजता है..." शायद उस जगह के छूटने की टीस ने ही तुम्हें इस नई यात्रा के लिए मांजा हो।
सौरभ सर, तुम हिंदी पत्रकारिता में एक ढलती हुई शाम की तरह हो। जिसमें न तो दिन की चिलचिलाती भागदौड़ है जो माथा दुखा दे, और न ही रात का वह स्याह सन्नाटा जो घबराहट पैदा करे। शाम दरअसल दिन की थकान और रातों के सुकून का एक मटमैला सा मिश्रण है। शाम सभी को अच्छी लगती है, और तुम उसी मुंडेर पर बैठी शाम हो।
मैं यह खत इसलिए नहीं लिख रहा कि तुमने कोई पुस्तकालय खोल लिया है। ईंटों का ढांचा खड़ा करके किताबें तो पहले भी कई लोग सजा चुके हैं। मैं इसलिए लिख रहा हूँ क्योंकि तुम्हें 'घर' बनाना आता है। इस भागती हुई दुनिया में, जहाँ लोग सिर्फ दौड़ रहे हैं, वहां इतनी कम उम्र में इतना कुछ 'कमाना' और फिर उस कमाई से लोगों के ठहरने के लिए एक जगह (पुस्तकालय) बनाना, कम ही लोग कर पाते हैं।
मैंने तुम्हें पहली बार किस स्क्रीन पर देखा था, मुझे ठीक से याद नहीं। और आखिरी बार कब देखूंगा, यह भी नहीं जानता। बस यही चाहता हूँ कि तुम ऐसे ही किसी न किसी बहाने दिखते रहो। तुम्हारी वह आंच जलती रहे।
खत लिखने वाला लड़का।
चाय इश्क़ और राजनीति।
“रात 10:28 पर लिखा गया सौरभ द्विवेदी के नाम एक ख़त।”
प्रिय सौरभ, @saurabhtop
रात के 10.28 हो रहे, और सच में 10.28 हो रहें, इसमें मेरी कोई कल्पना नहीं है। कल सुबह ये ख़त पोस्ट करूंगा, कल का समय नहीं मालूम। सोचा तो यही था, लेकिन अभी डाल रहा हूं, और अब 11.39 हो रहें। तुम जब भी देखो समझ लेना कि ये पोस्ट ताज़ा है अभी अभी लिखा गया है, नहीं भी देखो तो कोई बड़ी समस्या नहीं है, शायद तुम अभी भी चमारी में होंगे या लौट चुके होंगे, अब तुम्हारा ठिकाना भी नहीं मालूम।
पहले मालूम होता था कि तुम दिल्ली या नोएडा में ही होंगे लेकिन अब तुम्हारा ठिकाना मुंबई भी होगा शायद। लेकिन एक सेकेंड, तुम सोच रहे होंगे कि ये फालतू सा कौन आदमी है जो मुझे बार - बार तुम कह रहा है। दरअसल सौरभ ये हिम्मत मुझे तुम्हारे गांव की उस वीडियो से आई जहां तुम कह रहे थे कि कोई बच्ची आकर कहे कि मुझे जूता चाहिए तो ये मत सोचना कि तुम बड़े आदमी हो, या जो भी इस शब्द को चीजें मुझे नहीं याद, शायद इससे मिलता जुलता ही कुछ था।
खैर! आगे तुमने कहा कि भाग्यशाली को तुम कि कोई बच्ची तुम्हें हक़ के साथ कह रह रही है कि मुझे जूते चाहिए। मैं भी वही भाग्यशाली बनने का प्रयास कर रहा हूं, तुम का संबोधन करके, क्योंकि मुझे भी साहित्य का जूता चाहिए तुमसे।
क्योंकि मैं तुमपे अपना हक मानता हूं, मैं बड़े भाई से ज़्यादा दोस्त मानता हूं। इसलिए कभी तुम्हारी बुराई कर देता हूं, कभी तुम्हारे प्रेम में पागल हो जाता हूं और कभी तुमसे ज़्यादा उम्मीद के चक्कर में खुद का सत्यानाश कर लेता हूं। ये सब इतनी बार हो चुका है कि मानता हूं कि मुझे तुम्हें तुम कहने का अधिकार है।
झारखंड में सबसे पहले बच्चे तुम ही कहना सीखते है फ़िर उसमें संस्कार या झूठे दिखावटी संस्कार भरे जाते है तब वो आप कहने सीखते है, इसलिए मैं तुम्हें तुम ही कह रहा हूं क्योंकि मेरे में संस्कार की कमी है।
खैर! क्या लिखना चाह रहा हूं वहीं भूल गया। अब रुको याद कर रहा हूं। कर लिया याद और कसम से फिर 3 मिनट बाद इसको फिर से लिख रहा हूं।
यार क्या कमाल हो तुम।
जब भी तुम हिंदी बोलते हुए किसी का परिचय करवाते हो तो मुझे जलन होती है, लगता है कि मेरी प्रेमिका को मेरे से बेहतर कोई कैसे इस तरह चुंबन कर सकता है। और ये बात सत्य है कि जब तुम्हें स्क्रीन पर देखता हूं तो लगता है सौरभ हिंदी को चुंबन दे रहा। और जबरदस्ती होती तो दिल को मना भी लेता लेकिन महसूस होने लगता है कि हिंदी भी तुमसे लिपट गई है, और तुम्हारे चुम्मियों का पुरजोर साथ दे रही।
भैया, सौरभ ये ख़त यही ख़त्म कर रहा हूं। ट्विटर पे बड़ा पोस्ट नहीं कर सकता क्योंकि बड़ा सब्सक्रिप्शन चाहिए। और उतनी मेरी औकात नहीं है।
खैर! इस ख़त का 3 पार्ट तो लिखूंगा ही। तब तक के लिए आशीर्वाद दे देना। रूममेट ने गाना बजा रखा है कि " तुम दिल की धड़कन में रहते हो, रहते हो।"
ख़त लिखने वाला लड़का।
चाय इश्क़ और राजनीति।
बुंदेलखंड की माटी में बसे चमारी गाँव में हाल ही में संपन्न हुआ ‘माता प्रसाद पुस्तकालय’ का लोकार्पण समारोह मात्र एक औपचारिक उद्घाटन नहीं, बल्कि भारतीय ग्रामीण परिवेश में एक ‘वैचारिक पुनर्जागरण’ का शंखनाद था। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस समागम को एक अद्भुत ‘तहरी’ या ‘खिचड़ी’ के रूप में परिभाषित किया। जिस प्रकार एक उत्तम तहरी में विभिन्न अवयव मिलकर एक विशिष्ट स्वाद रचते हैं, उसी प्रकार इस मंच पर ज्ञान, विज्ञान, साहित्य, राजनीति और सिनेमा के सुरों का जो संगम हुआ, वह सामाजिक नवाचार का एक अनूठा ‘प्रोटोटाइप’ [Prototype] है।
• मनीष चौरसिया
(https://t.co/1UoTQoHXDQ)
#hindwi #hindwibela #library #mataprasadpustkalay #ManishChaurasia
🚨 मोदी पर Khan Sir का करारा तंज!
“अफगानिस्तान ईरान के रास्ते ही जा सकते हैं…
POK इस जन्म में भूल जाओ, मोदी जी से होता नहीं दिख रहा” 😏
“मौका मिला था… ऑपरेशन सिंदूर लाकर ढप्पा आइस स्पाइस खेल लिया”
“पानी रोकने की बात… पहले बिहार और कोसी संभालो”
नाम बड़े, दर्शन छोटे 🎯💥
सारे आर्काइव खंगाले जा रहे हैं। हर लाइब्रेरी का पन्ना-पन्ना पलटा जा रहा है। क्वांटम प्रवक्ता डॉ आइंस्टीनवेदी कल तक वो खबर ढूँढ निकालेंगे।
जिसमें नेहरू राज में एक छात्रा को बीच सड़क पर उसके विश्विद्यालयों के सामाजिक न्याय वाले प्रोफेसरों और सहपाठियों द्वारा लिंच करने का प्रयास किया गया था।
अगर नहीं मिला तो ….वो पत्र तो है ही जिससे पता चलेगा कि नेहरू ने चर्चिल के मम्मी से सेक्स किया था।
एक नेत्री से कहीं अचानक मुलाक़ात हुई। बात चीत में पता चला कि उनकी बेटी का विवाह किसी बड़े नेता के पुत्र से हुआ है और उनका grand child by birth American नागरिक है। इतना ही नहीं उनकी बेटी की जेठानी अमेरिका में डिलीवरी के लिए गई ताकि बच्चे को अमेरिकी नागरिकता मिल सके। यह मेरे लिए नया अनुभव नहीं था । अमेरिका की नागरिकता के लिए वहाँ जाकर बच्चा पैदा करने की बात वर्षों पहले भी तब के युवा नेता से सुनी थी । पढ़ाई के लिए बच्चों को विदेश भेजने की परंपरा नेताओं में आम है। हमारे विदेश मंत्री जी के पुत्र तक अमेरिकी नागरिक हैं । अब ऐसे नेता देश से कितना प्रेम करते हैं यह राम जाने। 😒
मेरा भारत महान ✊