आचार्य प्रशांत का साप्ताहिक लेख The Sunday Guardian में
‘Reserved seats, unchanged cages’
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"For all the speeches, all the procedural maneuvering, all the passionate invocations of women’s empowerment in debates on the Women's Reservation Bill, one question went entirely unasked: not how many women should sit in Parliament, but which women? That is the question this moment demands. "
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पूरा लेख पढ़ें: https://t.co/YlEx5BLsey
डॉ. अंबेडकर का सम्मान करने पर आचार्य प्रशांत को मिली मौत की धमकी
· प्रसिद्ध दार्शनिक एवं लेखक आचार्य प्रशांत को एक बार फिर हत्या की धमकी मिली है। यह धमकी उन्हें डॉ. भीमराव अंबेडकर के सम्मान में दिए गए वक्तव्य के ब���द एक यूट्यूब अकाउंट के माध्यम से दी गई है।
🔗: https://t.co/D6SCEPgDmG
राहुल,
>> इसका क्या अर्थ है: "गलती से मेरा नंबर चला गया"?
अपने आप फ़ोन नंबर चलकर हमारे पास आया था? संस्था आपको स्वयं कभी सामने से कॉल नहीं करती - पह���े आपने ख़ुद वेबसाइट पर जाकर फ़ॉर्म भरा था और उस फ़ॉर्म में अनुरोध/स्वीकार किया था कि संस्था आपको कॉल करे।
और अगर आप चाहते थे कि संस्था कॉल न करे, तो वेबसाइट पर यह भी साफ़ बताया गया है कि अकाउंट कैसे डिलीट करते हैं। WhatsApp के हर संदेश पर लिखा आता है - "इन संदेशों को रोकें" (STOP Messages)। आप अपना नंबर हटा सकते थे। आप पढ़े लिखे तो होंगे? पाँच साल में ये नहीं पता चला कि अकाउंट कैसे डिलीट करना है? रोज़ सैकड़ों लोग करते हैं, बस आप ही अनूठे निकले.
>> “रोज़ कॉल और व्हाट्सएप आते हैं कि पैसे दो और कोर्स लो। ये अध्यात्म के नाम पर शुद्ध धंधा चला रहे हैं।”
भाई, तुम्हें मुफ़्त में कुछ दिया जा रहा है, और अगर तुम कुछ दो भी दोगे तो भी 50 रुपए दोगे। यही वो न्यूनतम योगदान र���शि है जिस पर दो लाख छात्रों को संस्था आज गीता पढ़ा रही है। आज तक तुमने 50 रुपए के लिए किसी को बार-बार कॉल करते हुए सुना है? बड़ी-बड़ी कंपनियाँ भी पैसे बचाने के लिए ऐसा नहीं करतीं। जितना तुम दोगे, उससे कहीं ज़्यादा संस्था सिर्फ़ कॉल और WhatsApp पर तुम पर खर्च कर देती है। ��ुम्हें गीता से जोड़ने से पहले ही संस्था तुम पर ज़्यादा खर्च कर चुकी होती है - और इसमें हम ये तो गिनाना भी नहीं चाहते कि गीता समझने का मूल्य क्या होता है। तो फ़ोन तुमसे कुछ लेने के लिए नहीं, तुम्हें कुछ देने के लिए किया जाता है।
जो भी व्यक्ति आचार्य जी की गीता से जुड़ता है, उसे
🔸महीने के तीसों दिन या तो सत्र या तो परीक्षा उपलब्ध करवाई जाती है। प्रतिदिन।
🔸गीता के हर श्लोक को दो-दो घंटे समझाया जात��� है, और हर श्लोक की रिकॉर्डिंग्स पिछले कई सालों की आपके लिए उपलब्ध हैं।
🔸सिर्फ़ गीता ही नहीं, कबीर साहेब के भजन, बौद्ध दर्शन, अष्टावक्र गीता, ऋभु गीता, लाओ त्ज़ू पर भी सत्र होते हैं।
🔸एक पूरी सोशल मीडिया ऐप आपके लिए बनाई गई है जहाँ गॉसिप नहीं, गहरी चर्चा होती है। एक सोशल मीडिया के IT system पर कितना खर्चा होता है, कुछ अंदाज़ा है? और वो आपको बिना किसी शु��्क के मिलता है।
🔸Ask AP AI आपको मुफ़्त में, हाँ मुफ़्त में, ऐसे जवाब देता है जो पिछले 25 सालों की आचार्य जी की मेहनत से निकले हैं।
🔸महीने में 15 गीता परीक्षापत्र बनाए जाते हैं, आपकी समझ को धार देने के लिए।
थोड़ा बुद्धि को ज़ोर दो, ये सब ₹50 में देना मुमकिन है? जिन्हें तुम धर्मगुरु वगैरह कहते हो, वे तुम्हें ₹50 में मिलने भी न दें, सिखाना तो दूर की बात है। इतने में तो Zomato पर एक समोसे की डिलीवरी भी नहीं आती।
और ��ुम कहते हो हम धंधा चला रहे हैं? अरे, ये धंधा नहीं, अहंकार के लिए बहुत बड़ा फंदा है, जो गीता से भागना चाहता है। तुम्हारा यह ट्वीट बता रहा है कि हमारा तरीका सच में कारगर है।
>> “इतनी शिद्दत से तो कोई भगवान का नाम नहीं जपता, जितनी शिद्दत से ये लोग मार्केटिंग करते हैं।”
ये भगवान का नाम भी बिना मार्केटिंग के तुम तक नहीं पहुँचा होता - पर खैर, इतना तुम नहीं समझ पाओगे। शुक्र करो कि संस्था ��ार्केटिंग पर खर्चा कर रही है, वरना 2 लाख से भी ज़्यादा लोग कभी गीता सुनने और परीक्षा देने नहीं आते, वो परीक्षा इंडिया बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स के मुताबिक़ अध्यात्म क्षेत्र में दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा है। अगर पहली attempt में पास कर लोगे न राहुल, तो जीवन भर के लिए गीता तुम्हें मुफ़्त में सिखाई जाएगी।
>> “अगर आपके ज्ञान में वाकई दम होता, तो आपको फोन कर-करके लोगों से भीख नहीं मांगनी पड़ती।”
उपनिषदों में दम है? यदि है, तो तुमने ख़ुद पढ़े हैं? सार्त्र, हैडेगर, विटगेंस्टीन में दम है? यदि है, तो तुमने ख़ुद पढ़े हैं? शून्यता सप्तति में दम है? यदि है, तो तुमने ख़ुद पढ़ी है?
जिस भी चीज़ में दम है, वो तुमने ख़ुद कभी नहीं पढ़ी, तुम्हें ज़बरदस्ती ही पढ़वाई गई - स्कूल से लेकर कालेज तक। अपनेआप तो सड़ा कोकशास्त्र और व्हाट्सएप साहित्य ही पढ़ा है तुमने। अपनी ज़िंदगी देखो - तुम हो किस गुमान में? तुम्हें सचमुच लगता ह�� तुम सच और गहराई की ओर अपनेआप ही चले जाओगे? नहीं, कभी नहीं। अपनेआप तो झूठ और गंदगी ही फैलते हैं। सफाई अपने आप कभी नहीं हो जाती - उसके लिए किसी को जान लगानी पड़ती है। सच स्वयं नहीं फैलता, दार्शनिकों और ज्ञानियों को सच फैलाने के लिए अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ती है।
फ़ोन कर कर के भीख नहीं माँगी जा रही। फ़ोन कर कर के इस दुनिया को कुछ ऐसा दिया जा रहा है जो माँगने की भी इसकी औक़ात नहीं है। एहसान समझो कि तुम्हें कॉल किया जा रहा है। वरना आज कोई नहीं है जो तुम्हें गीता का अतिशुद्धतम अर्थ समझा रहा हो, जो अपना IIT और IIM का करियर छोड़कर तीसों दिन आपको समर्पित कर रहा हो और ऊपर से इस काम के लिए खुद खर्चा कर रहा हो ताकि तुम्हें कुछ सिखा सके।
जो काम आज कोई नहीं कर रहा, वो प्रशांतअद्वैत संस्था कर रही है, चाहे वो अंधविश्वास को तोड़ने की बात हो, चाहे पशु प्रेम सिखाने की बात हो, चाहे स्त्री सशक्तिकरण की बात हो। हमारी संस्था आज इन सब में सबसे अग्रणी है।
अगर ये बात समझ नहीं आ रही तो गीता कम्युनिटी पर आइए और कुछ दिन बिताइए। आपको खुद समझ �� जाएगा, जहाँ हर कुछ मिनटों में नए-नए testimonials आते हैं, जिनमें दुनियाभर के लोग बताते हैं कि गीता मिशन से जुड़ने के बाद उनकी ज़िंदगी में क्या परिवर्तन आया और क्या लाभ हुआ।
और हाँ, हमारे पास तुम्हें किए गए सारे कॉल्स, उनकी ऑडियो रिकॉर्डिंग्स, तारीख़ और समय सहित उपलब्ध हैं। ऐसी झूठी अफ़वाहें फैलाने के कारण तुम्हारा Twitter account रिपोर्ट भी कर सकते है।
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आपके होने न होने से आचार्य प्रशांत गीता मिशन को कु�� नहीं होगा पर आपका नुकसान जरूर होगा। सच को समझें और अभी जुड़ें:
वेबसाइट: https://t.co/CbUvSIqVnu
गीता मिशन 🔥: https://t.co/31HNg3prBK
आचार्य जी का जीवन और काम: https://t.co/o49cDNzt6N
10,000+ आर्टिकल्स (Open to all): https://t.co/fZl6PuDHR8
160 बुक्स: https://t.co/XSD6HbSRFL
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1000+ Testimonials: https://t.co/pi1LqP1TJC
Largest online examination on the Bhagavad Gita conducted by a spiritual organisation:
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@Advait_Prashant
MANIPUR:
Moplah, Direct Action Day, Noakhali, Bangladesh, Punjab, Kashmir, Bengal, Kerala, Assam, Bastar and now Manipur…
Every time our innocent mothers and sisters become the ultimate victims of inhuman, barbarian acts.
As a Bharatiya, as a man, as a human being, I am shattered each time. I am ashamed. I am so guilty for my helplessness.
O Manipur, I tried… I tried… but I failed.
All I can do now is tell their tragic stories through my work. But it’s too late by then.
We are all victims of selective and hyper- competitive electoral politics.
We are victims of hyper-religion.
We are victims of dangerous media.
We, the people of Bharat, are victims.
There is no #RightToLife in free India. And we can’t do anything about it.
This is not the freedom I want.
This is not the kind of democracy I want.
It’s worth nothing if it makes us bay for each other’s blood.
We are a failed society.
I am sorry, my sisters.
I am sorry, my mothers.
I am sorry, Bharat Mata.
- VRA
On the viral video of Manipur women (kuki) being paraded naked, CJI said that If govt does not act, then we will.
Yes, CJI should act. Along with CM N. Biren Singh, Judiciary should also take responsibility for Manipur violence.
On 27th March: Manipur HC directed state govt to consider the plea of the Meitei community's inclusion in the ST list & send a recommendation to the Centre within 4 weeks.
On 3rd May: Tribal groups protested against the Manipur HC's order & Meitei community and ethnic violence started in Manipur.
On 12th May: Manipur HC extended one year for the inclusion of the Meitei community to the ST list.
On 17th May: SC slammed the Manipur HC order. CJI said Manipur HC's decision was factually incorrect.
The pictures of the woman coming from #Manipur r putting us all to shame. The ruling party is guilty of that victim woman. The clothes of that sisters were not removed, but we and our govt were naked happened.
#ManipurViolence#नरेंद्र_मोदी_इस्तीफा_दो