पहचानते हैं रास्ते मुझ ख़ाकसार को,
मैं साथ ले के चलता हूँ अपने ग़ुबार को !!
अपनी पसंद के रखे उस ने धनक में रंग
टोका नहीं किसी ने भी परवरदिगार को !!
कब तक छुपे रहोगे किताबों की ओट में
तन्हाई ढूँढ लेती है अपने शिकार को !!
~विकास शर्मा राज़
ख़्वाब यूँ भी पूरे होते हैं, अपने साथ हों तो सफ़र आसान हो जाता है! जौन तो जान हैं ही!!
तुम हक़ीक़त नहीं हो हसरत हो
जो मिले ख़्वाब में वो दौलत हो!
मैं तुम्हारे ही दम से ज़िंदा हूँ
मर ही जाऊँ जो तुम से फ़ुर्सत हो!
#जौन_एलिया
आइये दम भर के लिए ज़िंदा होते हैं…..जौन के दम से!!
ہر گلی کوچے میں رونے کی صدا میری ہے
شہر میں جو بھی ہوا ہے وہ خطا میری ہے
हर गली कूचे में रोने की सदा मेरी है
शहर में जो भी हुआ है वो ख़ता मेरी है
— FARHAT EHSAS —