अमेठी गाजीपुर फैजाबाद जौनपुर सुल्तानपुर आजमगढ़ एटा इटावा फतेहपुर मैनपुरी मेरठ अलीगढ़ प्रयागराज रायबरेली सहारनपुर बागपत बुलंद शहर सब जगह के ग्राम प्रधान की लिस्ट इलेक्शन कमीशन के वेबसाइट से डाउनलोड की बहुत आश्चर्य हुआ कि सब जगह 55% से ज्यादा प्रधान ओबीसी है यानी ओवरब्रिप्रेसेंटेड
मुझे पूरी उम्मीद है इसमें लगभग सारे अहीर कुर्मी कोइरी और जाट होंगे
क्या आपमें कोई ऐसा है जिसको हम उसके जिले की लिस्ट दे दें तो अपने ब्लॉक के सभी प्रधानों की जाती बता सकता है मोबाइल नंबर भी लिस्ट में है
बिहार में अहिर कुर्मी कोइरी को ग्राम ग्राम प्रधान में अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश से आरक्षण नहीं मिलता क्योंकि एक ठाकुर साहेब ने ही बिहार में हाईकोर्ट में साबित कर दिया था कि कुल 11000 प्रधान में 5500 यही तीन जातियों के थे
आप लोग मेरी मदद कर दो यूपी में यह काम शायद मेरे हाथों ही लिखा है
यदि यह सत्य है तो एक व्यवस्थित तरीके से यह सब हो रहा है ताकि सवर्णों का प्रतिनिधित्व स्वतः समाप्त हो जाए और फिर जो राज्य या राष्ट्र के स्तर पर नीतियाँ बनें, उसमें स्पष्ट पक्षपात हो।
इसी कारण से सबको जगना पड़ेगा।
कांग्रेस नेता जीतू पटवारी, OBC वर्ग के वकीलों पर 100 करोड़ खर्चने और आरक्षण 73% करने की बात कर रहे हैं और भाजपा के मुख्यमंत्री मोहन यादव सर हिलाकर उनकी बात मान रहे हैं।
मतलब साफ है-
भाजपा कांग्रेस के इशारे पर ही काम करती है!
#BJPCongressAgainstGC
बता दें कि ये 100 करोड़ रुपये OBC साइड के वकीलों पर खर्च हुए हैं!
सामान्य वर्ग के खिलाफ सरकार खुद लड़ रही है- ये सब आंखें खोलकर देख लें!
और ये भी देख लें कि भाजपा के मुख्यमंत्री और कांग्रेस, दोनों सामान्य वर्ग के खिलाफ, एकसाथ खड़े हैं!
भाजपा का कहना है कि आरक्षण की सीमा कोई ऐसी सीमा नहीं कि उसे तोड़ा न जा सके। मराठा समाज को तीन बार आरक्षण देने और तीनों बार कोर्ट से रोकने के बाद पुनः भाजपा कोर्ट में उसे डिफेंड कर रही है।
मध्यप्रदेश (73%), महाराष्ट्र (72%), बिहार (75%), छत्तीसगढ़ (68%) या राजस्थान (64%), भाजपा सरकार हर राज्य में 50% से आगे जा चुकी है और हर कोर्ट में उसे डिफेंड कर रही है।
अतः, जब आपको चटआ गिरोह कहे कि राहुल गाँधी आरक्षण बढ़ा देगा, उसके मुँह पर तथ्य मारिए। भाजपा शीघ्र ही निजी क्षेत्र के चतुर्थ श्रेणी से प्राइवेट में आरक्षण आरंभ करेगी। चटुए उसे भी मास्टरस्ट्रोक कहेंगे।
दर्जनों ट्रेन, दिल्ली के 57 मेट्रो स्टेशन आदि बंद कर दिए गए हैं। एक के बाद एक मूर्खतापूर्ण निर्णय!
इनसे हजार लोग हैंडल नहीं हो पा रहे। ये स्वयं इन चूतियों को बड़ा बना रहे हैं।
कहीं मोदी जी लॉकडाउन की घोषणा न कर दें। चटुआ गिरोह आता ही होगा कोई मास्ट्रस्ट्रोक ढूँढने।
शेर जब दो कदम…
मध्यप्रदेश सरकार का 73% आरक्षण वाला केस आज निरस्त हो गया। यह भाजपा सरकार द्वारा अपील किया गया था। पहले ही हायकोर्ट निरस्त कर चुकी थी। पर ओबीसी प्रेम में अंधी भाजपा भगवान राम को जातिवादी हत्यारा बताने के एफिडेविट को आधार बना कर ओबीसी को ऐतिहासिक प्रताड़ना का शिकार बता रही थी।
बहुत बढ़िया कार्य YFE द्वारा! देते रहो गाली! लोग समाज के लिए लड़ते रहेंगे।
बालियान जी, मोदी विरोध नहीं तो क्या मोदी का समर्थन किया जाए?
आज बड़ी देश धर्म की चिंता हो रही, देश तो सबका है सबको देश की चिंता है, क्या मोदी या भाजपा से ही देश और धर्म है और फिर देश और धर्म की फ़िक्र की इतनी ही चिंता होती तो लगातर आरक्षण न बढ़ाते और न ही जातिगत कानून बनाते?
आज भाजपा घिर रही है तो धर्म के नाम पर लोगों को बरगला रहे हो, और जब सरकार बन जाए उसके बाद योजनाएं जाति के आधार पर बांट दो, फिर कहो देश के संसाधनों पर तो पहला हक उनका है? भाजपा ऊंची जाति के लोगों की पार्टी नहीं है?
यह सब हम नहीं भूलेंगे, तुम सब पार्टी वाले इससे निपटो, हमारे समाज को इसमें मत लपेटो, हम आरक्षण और जातिगत कानूनों के खत्म होने तक भाजपा का विरोध करते रहेंगे।
अब उड़िसा में भाजपा ने आरक्षण 92% कर दिया गया है ।
हर रोज नया मामला आ रहा है कि आरक्षण की सीमा 50% को तोड़ा जा रहा है ।
भाजपा सामान्य वर्ग के लोगों को ख़त्म करके ही मानेगी ।
@MukeshPathakji मोदी ऐसी हालत करके जाएगा कि भीमटे जंगल से आपकी सारी मधुमक्खियों के डब्बे उठा कर ले जाएंगे और बोलने पर जेल भी भेजवायेंगे, क्यों कि 5000 साल से पानी नही पीने देने मे आप भी शामिल हैं।
कहने को सामान्य वर्ग को 10% EWS दिया गया है लेकिन EWS आरक्षण का खेल देखिए।
रेलवे के RRB NTPC CEN 06/2026 में...
- कुल पोस्ट = 3548
- 10% के हिसाब से मिलना चाहिए = 354.8 मतलब 355 पोस्ट
- मिली हैं = 305 पोस्ट
- तो 3548 में 305 का प्रतिशत = 8.59%
मतलब पूरे 10% से 49 सीट कम दी गई हैं, लगभग 1.4% कम।
तो भाई सामान्य वर्ग को तो EWS आरक्षण भी पूरा नहीं मिल रहा है।
मतलब यहां सीटें मिलनी चाहिए 354 मिल रहीं 305? क्यों भाई?
ज्ञानियों और 'लेकिन मोदी, लेकिन योगी' करने वालों के नाम
दस महीने से बातें चल रही हैं। इन दस महीनों में कई ‘नेता’ बने। किसी ने कॉन्ग्रेस से पैसे ले कर आंदोलन को खराब करने का प्रयास किया, कोई भाजपा के नेताओं की गोद में बैठ गया ताकि आंदोलन में टूट पड़ जाए। कोई गाँव-गाँव भटक कर ₹40-50 लाख जुटा चुका है, पर स्टेज पर गाली सुनता है, गद्दार कहलाता है।
जैसे-जैसे चुनाव समीप आता जाएगा, पार्टियों के फंड बढ़ते जाएँगे। इनमें से कई ने यह तक कहा कि फलाना आ जाएगा, हमने बताया कि जिसका भय, जो कह कर दिखा रहे हो, वही सब तुम्हारी फेवरेट पार्टी कर चुकी है। यह नैरेटिव ध्वस्त हो गया।
अब नया चल रहा है: सारी बातें सही हैं, हर नीति जिस पर GC नकारात्मक लाइन ले रहा है, सब उचित है! लेकिन मोदी जी… लेकिन योगी जी…
कैंचो! ये कौन सी लाइन है बे? जब सारी नीतियाँ, जिस पर हम बोल रहे हैं, गलत ही हैं। सब समाज को विभाजित करने वाली ही हैं, तो हम बोलेंगे किसको? विरोध किसका करें? तिलचट्टा पार्टी का?
तुमने ये जो कुत्ते की विष्ठा समाज के आँगन में फेंकी है, उसका हम करें क्या? और उल्टा हम पर ही आक्षेप कि हम मोदी विरोध में राष्ट्र विरोधी हो गए? मेरे मुँह से निकला एक वाक्य बता दो जहाँ मैंने भारत के विरोध में कुछ बोला हो पिछले दस महीनों में!
वो नहीं निकाल पाओगे। हाँ, तुम्हें यदि लगता है कि मोदी या योगी ही राष्ट्र हैं, तो मैं बता देता हूँ कि मोदी एक छपास का भूखा, निकृष्ट स्तर का जातिवादी हो चुका है। या, पहले ही था, हमें दिखा नहीं कभी।
योगी भी राष्ट्र नहीं हैं। राष्ट्र न मैं हूँ, न तुम हो, राष्ट्र हम सब हैं। नेता उतना ही अच्छा होता है जितनी उसकी गवर्नेंस। बाकी चीजें फ्लफ हैं। योगी जी के नाक के नीचे यूपी में जो भ्रष्टाचार, जातिवाद चल रहा है वह किसी को क्यों नहीं दिखता? सब भूल जाएँ क्योंकि वो भाजपा के हैं और हमारे पास कोई विकल्प नहीं! तो हम विकल्प बनाएँगे, समय लगेगा, लेकिन बनाएँगे। और कोई चारा नहीं है।
ध्यान रहे कि 2024 के बाद, हिन्दू समाज ‘बँटेंग तो कटेंगे’ पर एकजुट हो कर भाजपा को लगातार वोट दे रहा था। फिर इनके मलद्वार में UGC का कीड़ा घुसा कि राहुल गाँधी क्या ‘रोहित वेमुला एक्ट’ लाएगा, हम उस एक्ट से भी विकृत चीज ले कर आएँगे और OBC को बताएँगे कि तुम्हें भी सुरक्षा दे दी गई है। अब शत्रु केवल एक है: सवर्ण!
सरकार की अपनी रिपोर्ट में अब उच्च शिक्षा के कॉलेजों में SC/St/OBC की संख्या 62% हो चुकी है, सवर्णों (मुस्लिम आदि समेत) के बच्चे EWS समेत केवल 38% में हैं। जहाँ मुस्लिम, दलित का एनरोलमेंट 200% से अधिक बढ़ा है, अनारक्षित की संख्या, 2020-21 से 2023-24 में 37 लाख से घटी है! जी हाँ, प्रतिशत ही नहीं, संख्या भी घटी है!
हम अंधे नहीं हैं। हमें ओडीशा, मध्यप्रदेश समेत सब दिख रहा है। हमें कर्नाटक में वेमुला एक्ट पर तुम्हारी चुप्पी भी दिखी। हमें ओबीसी में मुस्लिम को घुसाना भी दिखा। हमें भर्तियों में लगातार कम होती सवर्ण सीटें भी दिख रही हैं।
हमारा माय-बाप अब हमारे घर वाले ही बचे हैं। हमने वह आउटसोर्सिंग अब बंद कर दी है। हम नहीं जानते कि यूपी चुनाव में क्या होगा, लोकसभा चुनाव कैसा बीतेगा, पर हम बिना लड़े नहीं मरेंगे। और जो हमारे साथ नहीं है, जो हमें शर्तें गिना रहा है, वह सब ही शत्रु है।
मेरे मन में ऐसे किसी भी व्यक्ति को ले कर कोई सम्मान नहीं है जो 'किंतु-परंतु' में उलझा हुआ है और किसी अस्तित्वहीन 'RW' की दुहाई दे रहा है। RW जैसी कोई भी सुसंगठित व्यवस्था ना कल थी, ना आज है।
मैंने फ़रवरी में ही यह सब सुना था कि 'अब बस कर दो भाई, कितना UGC करते रहोगे'। मैं तब भी नहीं रुका था। और जब आज भी तुम सब वही कह रहे हो कि 'ये साला पागल हो गया है, सबसे लड़ रहा है, एक ही बात हर दिन बोलता है', मैं आज भी नहीं रुकूँगा। क्योंकि फ़रवरी में न रुकने का परिणाम हमे सितंबर में दिखा, और आज ना रुकने का मार्च में दिखेगा।
मैं लाखों की भीड़ में अकेला भी एक तरफ़ रहूँ और मैं कनविंस्ड रहूँ कि मैं सही हूँ, तो मुझे भीड़ ना तो दिखाई देती है, ना उसकी ध्वनि सुनाई देती है। मैं जो कर रहा हूँ, और जो करता रहूँगा उसका एक कॉस्ट है जो मैंने इन किसी भी 'मठाधीशों' से नहीं माँगा।
आज ये ज्ञान देने लगे, तो बताया कि ये कितने बड़े दोगले हैं। आगे और भी बहुत कुछ बताऊँगा कि किसके लिए कोई विषय केवल एक विषय है, और किसके लिए फण्ड उगाही का एक मार्ग। डेढ़ हज़ार लोग को जोड़ नहीं सकते और 'चार लोग नहीं आएँगे सड़क पर' का ज्ञान देते थे ये सब। हमने कितने उतार दिए, वो सबको दिख गया।
अभी हमारी लड़ाई का पहला चरण है। और इसकी टाइमलाइन छः महीने की नहीं, छः वर्ष की है। तुम्हें हमारी भीड़ नहीं दिखेगी क्योंकि हम भीड़ जुटा ही नहीं रहे। बाक़ी, समय सबको उत्तर देता है। बड़े-बड़े सिंहासनों को इन्हीं ब्राह्मणों ने उठाया और गिराया है।
जो सत्ता अपने समाज की प्रतिभा का सम्मान नहीं करती, वह मिट्टी में मिल जाती है।
भाजपा के मीडिया सलाहकार कह रहे हैं कि मुसलमानों को बदनाम करना बंद करो और सांप्रदायिकता मत फैलाओ!
उधर IT सेल "बंटोगे तो कटोगे" और "एक हैं तो।सेफ हैं" के नैरेटिव का गुब्बारा फुला रहा है, इधर मीडिया सलाहकार खुद उस गुब्बारे में पिन चुभाकर हवा निकाल दे रहे हैं!😂
मतलब ऐसा disjointed नैरेटिव देखा ही नहीं!
ये लोग आपस में सलाह मशवरा नहीं करते क्या?
गजबे कंफ्यूज कर रखा है लोगों को!
मतलब करना क्या है?
हिन्दुत्व का झंडा उठाना है, कि सेकुलरिज्म का?
झूठ आप बोल रहे हैं!
UGC 2026 नियम 13 जनवरी 2026 को लागू हो चुके थे!
ये रहा gazetted regulations👇
मंत्री होकर गलत जानकारी दे रहे हैं?
हमने तो इसके लागू होने के 2 दिन बाद ही इसको देखा और आवाज़ उठाई!
और अब भी सुप्रीम कोर्ट ने इसको रोका हुआ है!
सरकार तो अभीतक इसको वापिस लेने की हिम्मत नहीं जुटा पाई!