अलविदा भरतपुर
“ज़िंदगी किसी मेले की तरह है — रंग बहुत हैं, रास्ते बहुत हैं, पर हाथ में सिर्फ़ एक टिकट होता है।
तुम चाहो तो झूला झूल लो, पर फिर जलेबी छूट जाएगी।
तुम चाहो तो तमाशा देख लो, पर फिर बांसुरी की धुन खो जाएगी।
यह जीवन ऐसे ही है — हर मोड़ पर चुनाव, हर चुनाव के पीछे एक छूटा हुआ सपना या कहानी।
हरिशंकर परसाई जी ने लिखा — ‘जीवन कोई पांडुलिपि नहीं, जो जन्म के साथ हाथ में थमा दी जाए। वह तो एक बीज है, जिसे हर रोज़ अपने भीतर बोना होता है—सपनों की धूप में, संघर्ष की छाँव में।’
आज जब एक पड़ाव से विदा ले रहा हूँ, तो दिल में संतोष है —
कि मैंने भी अपने हिस्से का बीज बोया।
कभी संवाद से, कभी संघर्ष से, कभी मुस्कान से, कभी कर्म से।
इस मेले में जो भी मिला — अपनापन, आलोचना, आशीर्वाद —
सब जीवन का हिस्सा बन गया।
विदाई एक ठहराव नहीं… बस एक नया रास्ता है।
क्योंकि ज़िंदगी मेले जैसी है — और टिकट अब अगले पड़ाव का है।
आभार, भरतपुर।
आपका साथ, मेरी यात्रा का सबसे कीमती हिस्सा रहेगा।
विनेश ने इतिहास रच दिया है. विनेश महिला कुश्ती में ओलंपिक के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बन गई हैं.
आज सब भारतीयों की आंखों में आसूं हैं.
ये देश की बेटियां हैं, जिन्होंने हमेशा ही देश की शान बढ़ाई है. जिन लोगों ने हमेशा इन बेटियों की राह में कांटे बिछाए हैं, वे कम से कम इन बेटियों से सबक लेंगे और आगे इन बेटियों के राह में कांटे बीजने से बाज आएंगे. 🇮🇳 #GoForGold 🥇 @Phogat_Vinesh